20 दिसंबर 2025 Insurance – एक पिता का लालच इतना अंधा हो सकता है कि वह अपनी सगे पुत्री को ही ‘मृत’ घोषित कर दे? बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दहगांव निवासी दयाशंकर सिंह ने अपनी जीवित बेटी अर्पिता कुमारी को मृत बताकर ICICI Prudential Insurance कंपनी से 6 लाख रुपये का फर्जी दावा किया। पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी पिता को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह घटना न केवल पारिवारिक विश्वास को झकझोरती है, बल्कि बीमा क्षेत्र में बढ़ते फर्जी दावों की कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है। जिले में बीमा धोखाधड़ी के ऐसे मामले बढ़ रहे हैं, जो आर्थिक लालच के साथ-साथ नैतिक पतन की कहानी बयां करते हैं।
मामला तब प्रकाश में आया जब Insurance कंपनी के अधिकारी गौरव आनंद ने जनवरी 2025 में बहादुरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। दयाशंकर सिंह ने अपनी बेटी अर्पिता के नाम पर Insurance पॉलिसी ली थी, जिसमें स्वयं को नामांकित (नॉमिनी) बनाया था। पॉलिसी लेने के मात्र तीन महीने बाद ही उन्होंने अर्पिता की ‘मृत्यु’ का दावा पेश कर दिया। फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्होंने मृत्यु प्रमाण-पत्र और अन्य कागजात जमा किए, जो बाद में जांच में नकली साबित हुए। कंपनी ने दावे की जांच शुरू की, तो संदेह गहरा गया। अर्पिता न केवल जीवित थी, बल्कि वह अपने पिता के साथ ही रह रही थी। यह खुलासा तब हुआ जब कंपनी के अधिकारी ने स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराया और अर्पिता का पता-ठिकाना ट्रेस कर लिया।
बहादुरगंज थाना प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने गहन जांच शुरू की। “यह मामला संदेह और धोखाधड़ी से जुड़ा था। आरोपी ने फर्जी दस्तावेज बनाकर Insurance कंपनी को गुमराह करने की कोशिश की। जांच में सारे तथ्य सामने आ गए, और शुक्रवार को दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद आगे की कार्रवाई जारी है।” एसएचओ के अनुसार, आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (जालसाजी का दुरुपयोग) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यदि दोषी साबित हुआ, तो उसे 7 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
दयाशंकर सिंह, जो एक साधारण किसान हैं, ने यह कदम आर्थिक तंगी के चलते उठाया, जैसा कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया। किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में बेरोजगारी और गरीबी आम समस्या है, लेकिन यह घटना लालच की उस हद को दर्शाती है जहां खून के रिश्ते भी दांव पर लग जाते हैं। अर्पिता कुमारी, जो मात्र 22 वर्ष की हैं, इस फर्जीवाड़े से आहत हैं। परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “दयाशंकर ने परिवार की इज्जत पर बट्टा लगाया। अर्पिता अब डर के साये में जी रही है। हमने कभी सोचा नहीं था कि पिता ऐसा कदम उठाएंगे।” अर्पिता ने भी पुलिस को बताया कि उन्हें इस साजिश की भनक तक नहीं थी। वह घरेलू कामकाज में व्यस्त रहती थीं, और पिता ने चुपके से यह प्लान बनाया।
यह पहला मामला नहीं है जब Insurance फ्रॉड ने परिवारों को बर्बाद किया हो। बिहार में पिछले दो वर्षों में ऐसे 200 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जहां रिश्तेदारों को ‘मृत’ बताकर करोड़ों का गबन किया गया। भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में देशभर में बीमा धोखाधड़ी के 15,000 से ज्यादा केस सामने आए, जिनमें से 30% परिवारिक सदस्यों से जुड़े थे। किशनगंज में ही पिछले साल एक मामले में एक चाचा ने भतीजे की ‘मृत्यु’ का दावा कर 4 लाख रुपये हड़प लिए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और फर्जी दस्तावेजों की आसानी से उपलब्धता इस समस्या को बढ़ावा दे रही है।
कानूनी नजरिए से देखें तो Insurance फ्रॉड एक गंभीर अपराध है। आईपीसी की धारा 420 के तहत सजा के साथ-साथ Insurance कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई भी आरोपी से वसूली जाती है। आईआरडीएआई ने हाल ही में ‘फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम’ लॉन्च किया है, जो एआई की मदद से संदिग्ध दावों को तुरंत पकड़ता है। किशनगंज के डीएम विशाल राज ने कहा, “ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस है। हम Insurance कंपनियों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं।” पुलिस ने अपील की है कि कोई भी फर्जी दावा करने से पहले सोचें, क्योंकि जांच के जाल में फंसना तय है।
इस घटना से समाज में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या गरीबी लालच को जन्म देती है, या नैतिक शिक्षा की कमी जिम्मेदार है? अर्पिता जैसे युवाओं के लिए यह ट्रॉमा लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। परिवारिक संबंधों में विश्वास का जो एक बार टूट जाए, उसे जोड़ना मुश्किल होता है। किशनगंज पुलिस ने अब बीमा फ्रॉड पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर वर्कशॉप आयोजित कर लोगों को फर्जी दावों के खतरों से आगाह किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, दयाशंकर सिंह का यह कृत्य एक सबक है कि लालच का अंत हमेशा बुरा होता है। यदि समय रहते नैतिकता और कानून का पालन किया जाता, तो एक परिवार की जिंदगी बिखरने से बच जाती। किशनगंज जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ नैतिक शिक्षा पर जोर देना जरूरी है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन समाज को भी सजग रहना होगा।