26 जनवरी 2026, मोतिहारी में नकली Diesel-Petrol फैक्ट्री का भंडाफोड़: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में पुलिस ने एक बड़े नकली डीजल-पेट्रोल निर्माण कारखाने का भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना पर छापेमारी में पुलिस ने करीब 3800 लीटर नकली ईंधन बरामद किया, बड़ी मात्रा में रसायन और मशीनरी जब्त की तथा एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस को शक है कि यह किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा है जो बिहार-यूपी बॉर्डर इलाके में लंबे समय से अवैध कारोबार चला रहा था। यह कार्रवाई जिले के सुगौली क्षेत्र में स्थित एक गोदाम में की गई, जहां सतही तौर पर कोई सामान्य कारोबारी गतिविधि नहीं दिख रही थी।
छापेमारी कैसे हुई?
पुलिस को पिछले सप्ताह एक गुप्त सूचना मिली थी कि मोतिहारी के छौतरवा थाना क्षेत्र के पास एक गोदाम में नकली डीजल-पेट्रोल बनाया जा रहा है। सूचना की तस्दीक के बाद एसपी डॉ. सौरभ कुमार सुमन के निर्देश पर एसडीपीओ और छौतरवा थानेदार की अगुवाई में विशेष टीम गठित की गई। रविवार देर रात करीब 11 बजे टीम ने गोदाम पर छापा मारा।
गोदाम के अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। वहां बड़े-बड़े ड्रमों में नकली डीजल-पेट्रोल भरा हुआ था। पुलिस ने गिनती के बाद कुल 3800 लीटर नकली ईंधन बरामद किया – जिसमें करीब 2200 लीटर नकली डीजल और 1600 लीटर नकली पेट्रोल शामिल है। इसके अलावा 500 लीटर से अधिक केरोसिन, सॉल्वेंट ऑयल, डाई और अन्य रसायन बरामद हुए जिनका इस्तेमाल नकली ईंधन बनाने में किया जाता था।
गोदाम में मिक्सिंग मशीन, पंप सेट, फिल्टर यूनिट और पैकेजिंग सामग्री भी मिली। पुलिस ने दो ट्रक और एक टैंकर भी जब्त किया जिनका इस्तेमाल नकली ईंधन की सप्लाई के लिए किया जाता था। मौके से गोदाम मालिक सह मुख्य आरोपी राजेश कुमार (42 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया गया, जो मूल रूप से मोतिहारी का ही रहने वाला है। अन्य संदिग्ध भागने में सफल रहे।
नकली ईंधन कैसे बनाया जाता था?
पुलिस की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरोह सस्ते केरोसिन, इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट और डीजल को मिलाकर नकली ईंधन तैयार करता था। इसमें विशेष डाई और केमिकल मिलाए जाते थे ताकि रंग और गंध असली पेट्रोल-डीजल जैसी हो जाए। यह नकली ईंधन स्थानीय पेट्रोल पंपों, ट्रक ड्राइवरों और छोटे व्यापारियों को कम दाम पर बेचा जाता था।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह नकली ईंधन वाहनों के इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इंजन खराब हो जाता है और प्रदूषण भी कई गुना बढ़ जाता है।” विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नकली ईंधन में सल्फर की मात्रा अधिक होती है जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक है।
संगठित गिरोह की आशंका
गिरफ्तार आरोपी राजेश कुमार से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। उसने कबूल किया कि यह कारोबार पिछले दो साल से चल रहा था और महीने में लाखों रुपये का टर्नओवर था। पुलिस को शक है कि यह स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा है। सप्लाई चेन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर और बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर तक फैली हुई थी।
एसपी डॉ. सौरभ कुमार सुमन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। हमें संदेह है कि बड़े स्तर पर यह रैकेट चल रहा था। बरामद सामग्री की कीमत करीब 25-30 लाख रुपये है।” पुलिस ने बरामद नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि सटीक रासायनिक संरचना पता चल सके।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
नकली ईंधन का यह कारोबार न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगाता है बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी ठगता है। ट्रक ड्राइवर और किसान जो सस्ता डीजल खरीदते हैं, बाद में वाहन खराब होने पर भारी नुकसान उठाते हैं। पिछले कुछ सालों में बिहार में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में बरामदगी पहली बार हुई है।
स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। एक ट्रक ड्राइवर ने कहा, “हम लोग सस्ता डीजल लेते थे, लेकिन गाड़ी बार-बार खराब हो रही थी। अब पता चला कि नकली था। पुलिस का शुक्रिया।” व्यापारी संघ ने भी इस कार्रवाई की सराहना की और मांग की कि ऐसे रैकेट पर सख्ती से नकेल कसी जाए।
आगे की जांच और कार्रवाई
पुलिस ने मामला IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पेट्रोलियम अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड ली जाएगी। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में यूपी बॉर्डर पर भी टीम भेज रही है। साथ ही उन पेट्रोल पंपों की जांच शुरू की जा रही है जहां यह नकली ईंधन सप्लाई किया गया था।
यह कार्रवाई बिहार पुलिस की सक्रियता का उदाहरण है। गणतंत्र दिवस के दिन भी पुलिस अपराधियों पर नजर रखे हुए थी। उम्मीद है कि जल्द ही पूरा गिरोह पकड़ा जाएगा और ऐसे अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी।
Sources: आज तक