30 जनवरी 2026, Gaya फायरिंग रेंज में विस्फोट: बिहार के गया जिले में एक बार फिर फायरिंग रेंज में विस्फोट की दर्दनाक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाराचट्टी थाना क्षेत्र के बिघी फायरिंग जोन (विघी पहाड़ी) में कबाड़ बीनने गए दो नाबालिग लड़कों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की लाश के चिथड़े उड़ गए, जिससे घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह हादसा सीआरपीएफ की ट्रेनिंग के बाद बचे अप्रस्फुटित विस्फोटक के कारण हुआ, जो प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश करने वाले ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
घटना का विवरण
घटना 29 या 30 जनवरी 2026 की है। राजगीर से आई सीआरपीएफ की टीम ने बिघी फायरिंग रेंज को तीन दिनों के लिए बुक किया था, लेकिन ग्रेनेड प्रैक्टिस एक ही दिन में पूरी कर ली। अभ्यास के बाद क्षेत्र की पूरी तरह जांच नहीं की गई, जिससे कुछ अप्रस्फुटित विस्फोटक (ग्रेनेड या शेल) खुले में रह गए।
स्थानीय ग्रामीणों की पुरानी आदत है कि फायरिंग प्रैक्टिस खत्म होने के बाद वे रेंज में घुसकर कबाड़ (वेस्टेज) इकट्ठा करते हैं, जिसमें से तांबा या पीतल निकालकर बेचा जाता है। इसी लालच में सेवई टोला जहाजवा या बुमेर पंचायत के दो नाबालिग लड़के — सौरभ कुमार (14-15 वर्ष) और मुकेश कुमार (15 वर्ष) — प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए। वहां पड़े एक विस्फोटक को छूते या खोलते समय अचानक धमाका हो गया।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि सौरभ कुमार की मौके पर ही मौत हो गई और उसका शरीर पूरी तरह चिथड़ों में बिखर गया। मुकेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे प्राथमिक उपचार के लिए बाराचट्टी पीएचसी ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गया रेफर कर दिया गया। उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
पीड़ितों का परिचय और परिवार की स्थिति
मृतक सौरभ कुमार बुमेर पंचायत या सेवई टोला का निवासी था और गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था। ऐसे परिवारों में बच्चे अक्सर कबाड़ बीनकर घर चलाने में मदद करते हैं। घायल मुकेश कुमार भी इसी इलाके का है। घटना की सूचना मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया। स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और आक्रोश व्यक्त किया। बुमेर पंचायत के मुखिया संजीव कुमार उर्फ गुड्डू यादव ने सीआरपीएफ अधिकारियों से संपर्क कर विस्फोटक की तस्वीर भेजी और जानकारी ली।
सीआरपीएफ और प्रशासन की भूमिका
सीआरपीएफ अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने ग्रेनेड प्रैक्टिस की थी, न कि तोप के गोले की। फायरिंग से पहले आसपास के गांवों को सूचना दी गई थी कि प्रतिबंधित क्षेत्र में न जाएं। अभ्यास पूरा होने के बाद टीम वापस चली गई। हालांकि, अभ्यास के बाद अप्रस्फुटित विस्फोटकों की जांच और उन्हें सुरक्षित नष्ट करने की प्रक्रिया में चूक हुई, जो हादसे का मुख्य कारण बनी।
बाराचट्टी थानाध्यक्ष अमरेंद्र किशोर ने कहा, “फायरिंग रेंज प्रतिबंधित है। आम लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। दोनों लड़के कबाड़ चुनने गए थे, जहां बम पार्ट्स इकट्ठा करते समय विस्फोट हो गया।” पुलिस ने मौके का मुआयना किया, क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। गया पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और पिछली घटनाएं
बिघी फायरिंग रेंज भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेस के अभ्यास के लिए उपयोग होती है। जंगल से घिरे इस इलाके में स्थायी घेराबंदी, सीसीटीवी निगरानी या चेतावनी बोर्ड की कमी है। फायरिंग से पहले अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है, लेकिन अभ्यास खत्म होने के बाद लोग आसानी से घुस जाते हैं।
स्थानीय विधायक ज्योति देवी ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया और आगामी विधानसभा सत्र में मुद्दा उठाने की घोषणा की। पिछले वर्षों में भी इसी रेंज में कबाड़ बीनते समय विस्फोट से कई मौतें हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वेस्टेज से तांबा निकालना उनकी मजबूरी है, लेकिन अप्रस्फुटित विस्फोटकों की सफाई नहीं होने से जान जोखिम में रहती है।
जरूरी कदम
यह घटना एक बार फिर सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमियों को उजागर करती है। अभ्यास के बाद रेंज की पूरी सफाई, अप्रस्फुटित विस्फोटकों को नियंत्रित तरीके से नष्ट करना और स्थायी निगरानी व्यवस्था अनिवार्य है। साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक करने और वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान करने की जरूरत है ताकि ऐसी मजबूरी न रहे। प्रशासन और सीआरपीएफ को मिलकर ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाना चाहिए, वरना मासूम जानें यूँ ही जाती रहेंगी।
Sources: दैनिक भास्कर