18 जनवरी 2026, Patna के 922 निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग का सख्त अल्टीमेटम: बिहार की राजधानी पटना में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। जिला शिक्षा कार्यालय ने 922 निजी स्कूलों को ज्ञानदीप पोर्टल पर RTE के तहत उपलब्ध सीटों का डेटा अपलोड न करने पर 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा में डेटा अपलोड नहीं करने पर स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने या जुर्माना लगाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। यह कार्रवाई आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के मुफ्त प्रवेश प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए की जा रही है।
RTE अधिनियम की पृष्ठभूमि और महत्व
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारत में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। इसके तहत सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इन बच्चों का प्रवेश मुफ्त होता है और सरकार स्कूलों को प्रति बच्चा खर्च की प्रतिपूर्ति करती है। बिहार में इस प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने के लिए ज्ञानदीप पोर्टल विकसित किया गया है, जहां स्कूलों को अपनी उपलब्ध सीटों की संख्या, कक्षा-वार विवरण और अन्य जानकारी अपलोड करनी होती है।
यह डेटा अपलोड होने के बाद ही अभिभावक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, लॉटरी सिस्टम से प्रवेश होता है और गरीब बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलता है। लेकिन पटना में 922 स्कूलों की लापरवाही से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद ये स्कूल डेटा अपलोड नहीं कर रहे, जिससे विभाग को सख्ती बरतनी पड़ रही है।
अल्टीमेटम की वजह: डेटा अपलोड में लापरवाही
पटना जिले में कुल लगभग 1800 से अधिक निजी स्कूल हैं, जिनमें से कई ने समय पर डेटा अपलोड कर दिया है। लेकिन 922 स्कूल अभी भी बाकी हैं। विभाग के अनुसार, इन स्कूलों को पहले कई बार नोटिस भेजा गया, मीटिंग्स आयोजित की गईं, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। अब 24 घंटे की समयसीमा दी गई है, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
स्कूल संचालकों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कुछ स्कूल RTE कोटे को बोझ मानते हैं और जानबूझकर डेटा अपलोड नहीं कर रहे। कुछ तकनीकी समस्याओं का हवाला दे रहे हैं, लेकिन विभाग ने हेल्पडेस्क और ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई थी। यह लापरवाही न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि हजारों गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार को प्रभावित कर रही है।
प्रभाव: गरीब बच्चों का भविष्य अधर में
RTE के तहत हर साल पटना में हजारों बच्चे निजी स्कूलों में प्रवेश पाते हैं। डेटा अपलोड न होने से आवेदन प्रक्रिया देरी से शुरू होगी, लॉटरी और प्रवेश प्रभावित होंगे। बिहार में पहले से ही RTE क्रियान्वयन में चुनौतियां हैं – राज्य के कई जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक स्कूल डिफॉल्टर हैं। पटना जैसे विकसित जिले में यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि यहां अच्छे निजी स्कूलों की संख्या अधिक है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में RTE कोटे को ‘राष्ट्रीय मिशन’ करार देते हुए सख्त निर्देश दिए हैं कि निजी स्कूल इसे दान नहीं, बल्कि अधिकार मानें। बिहार सरकार भी इस दिशा में सक्रिय है, लेकिन स्कूलों की उदासीनता बाधा बन रही है।
विभाग की आगे की योजना और कार्रवाई
जिला शिक्षा कार्यालय ने कहा कि 24 घंटे बाद भी डिफॉल्टर स्कूलों की लिस्ट तैयार की जाएगी और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। संभावित कार्रवाई में स्कूलों की मान्यता निलंबित करना, जुर्माना लगाना या RTE प्रतिपूर्ति रोकना शामिल है। साथ ही, अन्य जिलों में भी इसी तरह की सख्ती की जाएगी। बिहार शिक्षा विभाग ने ज्ञानदीप पोर्टल को और यूजर-फ्रेंडली बनाने की योजना बनाई है ताकि अगले सत्र में ऐसी समस्या न आए।
यह कदम सराहनीय है, क्योंकि RTE गरीबी और शिक्षा असमानता को कम करने का महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्कूलों पर सख्ती जारी रही तो अधिक बच्चे लाभान्वित होंगे।
शिक्षा में समानता के लिए सख्ती जरूरी
पटना के 922 निजी स्कूलों को दिया गया यह अल्टीमेटम बिहार में RTE के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ेगा। सरकार और स्कूल संचालकों को मिलकर काम करना होगा ताकि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। अगर स्कूल समय पर डेटा अपलोड कर दें तो प्रवेश प्रक्रिया सुचारू हो सकेगी और हजारों बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनेगा।
Sources: नव भारत टाइम्स