11 दिसंबर 2025: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) की समयसीमा को पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में बढ़ा दिया है। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह शामिल हैं। इससे पहले केरल में भी इसकी समयसीमा बढ़ाई जा चुकी थी, जबकि पश्चिम बंगाल में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह विस्तार मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

SIR प्रक्रिया 2025 के जनवरी से शुरू होने वाली है, जो मतदाता सूचियों को अपडेट करने, नए मतदाताओं को जोड़ने और पुरानी/गलत प्रविष्टियों को हटाने पर केंद्रित है। मूल योजना के तहत, गणना चरण (एन्यूमरेशन फॉर्म सबमिशन) की अंतिम तिथि 11 दिसंबर 2025 और ड्राफ्ट रोल प्रकाशन की तिथि 16 दिसंबर 2025 निर्धारित थी। लेकिन विभिन्न राज्यों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर ईसीआई ने इसे एक सप्ताह से लेकर दो सप्ताह तक बढ़ा दिया। विस्तृत समयसीमा इस प्रकार है:

  • तमिलनाडु और गुजरात: गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 14 दिसंबर 2025, ड्राफ्ट रोल प्रकाशन 19 दिसंबर 2025।
  • अंडमान एवं निकोबार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़: गणना फॉर्म 18 दिसंबर 2025 तक, ड्राफ्ट रोल 23 दिसंबर 2025 को।
  • उत्तर प्रदेश: गणना फॉर्म 26 दिसंबर 2025 तक, ड्राफ्ट रोल 31 दिसंबर 2025 को।

इसके अलावा, गोवा, गुजरात, लक्षद्वीप, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में गणना चरण 11 दिसंबर 2025 को समाप्त होगा, जबकि ड्राफ्ट रोल 23 दिसंबर को जारी होंगे। केरल के लिए पहले ही विस्तार कर दिया गया है, जहां गणना 18 दिसंबर और ड्राफ्ट 23 दिसंबर को निर्धारित है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार स्थानीय स्तर पर प्राप्त सुझावों और प्रक्रिया की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, हालांकि आधिकारिक रूप से कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया गया।

यह निर्णय आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अत्यंत प्रासंगिक है। SIR के तहत अब तक 50.96 करोड़ से अधिक फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो युवा मतदाताओं (18-19 वर्ष) को विशेष रूप से लक्षित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयसीमा बढ़ने से लाखों नए मतदाता जुड़ सकेंगे, जिससे लोकतंत्र की नींव मजबूत होगी। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे ‘देर से उठाया गया कदम’ बताते हुए सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की, “मतदाता सूचियों में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन आयोग को पहले से सतर्क रहना चाहिए।” वहीं, भाजपा ने इसे ‘चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने’ की पहल कहा।

ईसीआई के अनुसार, विस्तारित समयसीमा के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करेंगे, और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी पंजीकरण संभव होगा। मतदाता ईसीआई की वेबसाइट या ऐप के जरिए अपनी स्थिति जांच सकते हैं। यह कदम विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगा, जहां पहुंच की समस्या बनी रहती है। कुल मिलाकर, यह विस्तार 2026 चुनावों को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग निगरानी कैसे सुनिश्चित करता है।

By SHAHID

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