DRI TAKES ACTIONDRI TAKES ACTION

7 जनवरी 2026, किशनगंज में सोना तस्करी के खिलाफ DRI की बड़ी कार्रवाई: बिहार के किशनगंज जिले में सोना तस्करी के खिलाफ राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। DRI की टीम ने शहर के सोनार पट्टी रोड स्थित अमर पाटिल के ज्वेलरी कारखाने पर छापा मारा, जहां सोना तस्करी से जुड़ी जांच चल रही है। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल की सिलीगुड़ी DRI इकाई ने मुख्य भूमिका निभाई। स्थानीय सदर थाना पुलिस के सहयोग से यह ऑपरेशन चलाया गया, जो सीमा क्षेत्र में बढ़ती सोना तस्करी की समस्या पर एक मजबूत प्रहार है।

पृष्ठभूमि और संदिग्ध की जानकारी

इस छापेमारी की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प है। अमर पाटिल, जो किशनगंज के सोनारपट्टी इलाके में सोना-चांदी गलाने वाली भट्ठी और ज्वेलरी कारखाने के संचालक हैं, लंबे समय से सोना तस्करों के साथ सांठगांठ के आरोपों में घिरे हुए हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पाटिल का तस्करों के साथ गहरा संबंध है, जहां वे विदेशी सोने को गलाकर बाजार में खपाते हैं। हाल ही में, पश्चिम बंगाल की ग्वालपोखर पुलिस ने अमर पाटिल की आभूषण दुकान पर छापेमारी की थी, लेकिन वे मौके से फरार हो गए। इस घटना से तीन दिन पहले की छापेमारी सदर थाना पुलिस के सहयोग से की गई थी, जिसमें कई संदिग्ध साक्ष्य मिले।

ऑपरेशन का कार्यान्वयन

DRI की इस ताजा कार्रवाई में टीम ने बुधवार को अचानक कारखाने पर धावा बोला। सूत्रों के अनुसार, DRI को मुख्यालय से निर्देश मिले थे, और गुप्त सूचना के आधार पर यह ऑपरेशन लॉन्च किया गया। कारखाने में सोने की तस्करी से जुड़ी आवश्यक पड़ताल की जा रही है, जिसमें मशीनरी, रिकॉर्ड और सामग्री की जांच हो रही है। स्थानीय निवासियों में इस छापेमारी से हड़कंप मच गया, क्योंकि किशनगंज जैसे सीमावर्ती इलाके में सोना तस्करी एक आम समस्या है। नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से सटे होने के कारण यहां तस्करी के नेटवर्क मजबूत हैं, और DRI जैसी एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं।

पिछली घटनाएं और BSF की भूमिका

पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो अमर पाटिल का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। 2017 में, पश्चिम बंगाल की इस्लामपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने किशनगंज के टाउन थानाध्यक्ष आफताब आलम के सहयोग से पाटिल की भट्ठी पर छापेमारी की थी। उस समय लोहारपट्टी स्थित किराए के मकान से सोने के बिस्किट बरामद हुए थे, जो खाड़ी देशों से बांग्लादेश के रास्ते किशनगंज पहुंचे थे। इस छापेमारी ने तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। हाल ही में, 22 दिसंबर को ग्वालपोखर थाना क्षेत्र में सोने की बिस्किट के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में अमर पाटिल के पास बिस्कुट बेचने की बात कबूली। इस खुलासे से साफ हो गया कि पाटिल विदेशी सोने को गलाकर ज्वेलरी में बदलकर बाजार में बेचते हैं, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान होता है।

DRI की इस कार्रवाई में BSF की पिछली छापेमारियों का भी जिक्र आता है। सीमावर्ती इलाकों में BSF अक्सर सोना तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन चलाती है, और सूत्रों के मुताबिक, अमर पाटिल के कारखाने पर पहले BSF ने भी छापेमारी की थी। हालांकि, आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय पुलिस सूत्रों का कहना है कि BSF की कार्रवाई से तस्करों के नेटवर्क में हलचल मची थी। किशनगंज में सोना तस्करी एक संगठित अपराध है, जहां तस्कर नेपाल या बांग्लादेश से सोना लाकर यहां की फैक्टरियों में गलाते हैं। DRI की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में ही किशनगंज और आसपास के इलाकों में 5 किलोग्राम से ज्यादा सोना जब्त किया गया है, जिसकी कीमत करोड़ों में है।

निहितार्थ और जांच की स्थिति

इस छापेमारी के निहितार्थ गंभीर हैं। अमर पाटिल जैसे संचालकों के माध्यम से तस्करी का नेटवर्क न केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पैदा करता है। पुलिस थानाध्यक्ष विश्वजीत मित्रा ने कहा, “आरोपी के विरुद्ध कई साक्ष्य मिले हैं। इससे सोने की तस्करी मामले में संलिप्तता प्रतीत होती है। मामले में बारीकी से जांच की जा रही है।” वर्तमान में, अमर पाटिल भूमिगत हैं, और बंगाल पुलिस किशनगंज पुलिस के सहयोग से उनकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से आदेश लेने की तैयारी में है। जांच में तस्करों के गिरोहों में आपसी समझौते का भी खुलासा हुआ है, जो एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट की ओर इशारा करता है।

स्थानीय प्रभाव और विशेषज्ञों की राय

किशनगंज जिला प्रशासन और DRI की इस संयुक्त कार्रवाई से स्थानीय व्यापारियों में खौफ है। कई ज्वेलर्स का कहना है कि ऐसी छापेमारियां वैध व्यापार को प्रभावित करती हैं, लेकिन तस्करी रोकने के लिए जरूरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में सख्त निगरानी और तकनीकी सहायता से तस्करी पर अंकुश लगाया जा सकता है। DRI की यह कार्रवाई 2026 की शुरुआत में एक बड़ा संदेश है कि सोना तस्करी के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी जारी रहेगी।

निष्कर्ष और आंकड़े

इस घटना से साफ है कि किशनगंज जैसे इलाकों में सोना तस्करी एक चुनौती बनी हुई है। 2025 में DRI ने पूरे देश में 321 किलोग्राम सोना जब्त किया, जिसकी कीमत 406 करोड़ रुपये थी, और इसमें बिहार का हिस्सा महत्वपूर्ण था। अमर पाटिल मामले की जांच पूरी होने पर और खुलासे होने की उम्मीद है, जो तस्करी के पूरे नेटवर्क को उजागर कर सकता है। स्थानीय पुलिस और DRI की टीम जांच में जुटी हुई है, और जल्द ही गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

इस रिपोर्ट के माध्यम से हमारी वेबसाइट पाठकों को सीमावर्ती इलाकों की वास्तविकताओं से अवगत कराती रहेगी। सोना तस्करी न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह देश की सुरक्षा को भी कमजोर करती है। सरकार की ओर से ऐसी कार्रवाइयों को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि वैध व्यापार फल-फूल सके और अवैध गतिविधियां रुकें।

Sources: हिंदुस्तान,

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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