23 दिसंबर 2025: बिहार की राजधानी पटना में विज्ञान प्रेमियों और जिज्ञासु परिवारों के लिए एक नया अध्याय शुरू हो गया है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम Science City, पूर्वी भारत का सबसे बड़ा और अनूठा विज्ञान केंद्र, 22 दिसंबर से आम जनता के लिए खुल गया है। 21 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित यह Science City, उद्घाटन के करीब तीन महीने बाद अंततः अपने द्वार खोल चुकी है। क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियों के बीच यह खुलना समय पर है, जिससे परिवारों और युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग पोर्टल लॉन्च होने के साथ अब विज्ञान की रोमांचक दुनिया सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जीवंत प्रदर्शनियों और इंटरएक्टिव मॉडलों के माध्यम से प्रत्यक्ष अनुभव होगी।
Science City का इतिहास और विकास यात्रा
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम Science City का विचार बिहार सरकार की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में 2013 में उभरा। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि के रूप में नामित यह केंद्र, बिहार के वैज्ञानिक इतिहास को जीवंत करने का माध्यम बनेगा। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 200 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई परियोजना, समय के साथ विस्तारित होकर 889 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 20.5 एकड़ क्षेत्र में फैला यह परिसर, राजेंद्र नगर के मोइनुल हक स्टेडियम के निकट स्थित है। कुल निर्मित क्षेत्रफल 30,000 वर्ग मीटर है, जिसमें 7,725 वर्ग मीटर का मुख्य भवन शामिल है।
निर्माण कार्य 2018 में तेजी से आगे बढ़ा, जब बैंगलोर की फ्लाइंग एलीफेंट स्टूडियो को आर्किटेक्ट के रूप में चुना गया। परियोजना का उद्देश्य बिहार के ग्रामीण और शहरी युवाओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना था, जो लंबे समय से केंद्रीय विज्ञान केंद्रों से वंचित रहा है। 2022 तक पूर्ण होने का लक्ष्य था, लेकिन कोविड-19 महामारी और अन्य चुनौतियों के कारण विलंब हुआ। अंततः, 21 सितंबर 2025 को सीएम नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया, जहां उन्होंने कहा, “यह साइंस सिटी न केवल ज्ञान का भंडार है, बल्कि बिहार के बच्चों को मिसाइल मैन कलाम की तरह सपने देखने की प्रेरणा देगी।” उद्घाटन के बाद तकनीकी परीक्षण और तैयारी के लिए तीन महीने का समय लिया गया, ताकि जनता को सर्वोत्तम अनुभव मिले।
आकर्षणों की विविध दुनिया: इंटरएक्टिव गैलरियां और थिएटर
Science City का मुख्य आकर्षण इसके पांच प्रमुख गैलरियां हैं, जो विज्ञान को खेल-खेल में सिखाती हैं। ‘Be a साइंटिस्ट’ गैलरी में आगंतुक खुद वैज्ञानिक बनकर प्रयोग करते हैं। यहां हारमोनिक स्ट्रिंग्स, उड़ी जोइट्रोप, रिपल टैंक और लेविटेटिंग वाटर जैसे इंटरएक्टिव मॉडल हैं, जो ध्वनि, तरंगों और गुरुत्वाकर्षण के रहस्यों को उजागर करते हैं। ‘बेसिक साइंस’ गैलरी दशमलव प्रणाली, द्विआधारी सिस्टम, गोल्डन रेशियो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर केंद्रित है। कुल 269 विज्ञान मॉडल यहां प्रदर्शित हैं, जो पर्यावरण, अंतरिक्ष और मानव शरीर की जटिलताओं को सरल बनाते हैं।
‘सस्टेनेबल प्लैनेट’ गैलरी जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा पर फोकस करती है, जबकि ‘बॉडी’ गैलरी मानव शरीर के अंगों को 3डी मॉडल्स से समझाती है। ‘स्पेस’ गैलरी में सैटेलाइट, रॉकेट और ब्रह्मांड की यात्रा का अनुभव कराया जाता है। इसके अलावा, 4डी थिएटर विज्ञान आधारित रोचक फिल्में दिखाता है, जहां दर्शक हवा, पानी और कंपन महसूस कर सकते हैं। 500 सीटों वाला ऑडिटोरियम डॉ. कलाम की प्रतिमा, डिजिटल पैनल, म्यूरल वॉल और बच्चों के लिए सेल्फी पॉइंट से सजा है। यहां नियमित लेक्चर, वर्कशॉप और फिल्म शो आयोजित होंगे।
परिसर में 150 छात्रों और शिक्षकों के लिए डॉरमेट्री, कैफेटेरिया और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है, जो बाहर से आने वाले समूहों के लिए सुविधाजनक है। यह न केवल मनोरंजन केंद्र है, बल्कि एक लिविंग लैब जहां बच्चे प्रयोग करके सीखेंगे।
प्रवेश प्रक्रिया: आसान ऑनलाइन बुकिंग, किफायती शुल्क
Science City में प्रवेश पूरी तरह डिजिटल है। ऑफलाइन टिकट की कोई व्यवस्था नहीं है, जो भीड़ प्रबंधन के लिए है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तारीख, समय स्लॉट (हर घंटे 50 दर्शकों की क्षमता) और श्रेणी चुनें। पेमेंट के बाद ई-टिकट डाउनलोड करें, जिसे प्रिंट या मोबाइल पर दिखाकर प्रवेश लें। समय: सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक, सप्ताह में सातों दिन।
शुल्क संरचना सराहनीय है: 12 वर्ष से ऊपर के वयस्कों और किशोरों के लिए 50 रुपये, 5-12 वर्ष के बच्चों के लिए 10 रुपये। स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय के छात्र समूहों (25 या अधिक) को मुफ्त प्रवेश, साथ ही दिव्यांगजनों और 70 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को भी छूट। यह नीति शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में सराहनीय कदम है। हालांकि, शुरुआती दिनों में कुछ उपयोगकर्ताओं ने वेबसाइट की तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की, जिसे जल्द सुधारने का आश्वासन दिया गया है।
शैक्षिक और पर्यटन महत्व: बिहार के लिए नया अध्याय
बिहार, जहां वैज्ञानिक शिक्षा के संसाधन सीमित रहे हैं, के लिए यह Science City वरदान साबित होगी। पूर्वी भारत का यह सबसे बड़ा केंद्र, 2025 में पर्यटन को बढ़ावा देगा। न्यू ईयर पर भारी भीड़ की उम्मीद है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी। शिक्षा के लिहाज से, यह स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) शिक्षा को प्रोत्साहित करेगा। बच्चे यहां आकर कलाम की तरह ‘विंग्स ऑफ फायर’ की प्रेरणा पाएंगे। सरकार की योजना है कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से और गैलरियां जोड़ी जाएं, जैसे बिहार के प्राचीन वैज्ञानिकों (आर्यभट्ट, चाणक्य) पर फोकस।
यह केंद्र न केवल पटना, बल्कि पूरे बिहार और पड़ोसी राज्यों के लिए आकर्षण बनेगा। पर्यावरण जागरूकता से लेकर एआई तक, हर विषय पर ज्ञान उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित कर बिहार को ‘स्किल हब’ बनाने में मदद करेगा।
निष्कर्ष: विज्ञान का उत्सव, कलाम का सपना साकार
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी का खुलना बिहार के लिए गर्व का विषय है। 889 करोड़ की यह परियोजना, मात्र एक भवन नहीं, बल्कि सपनों का प्रतीक है। आम जनता के लिए खुलने से अब हर परिवार विज्ञान की उड़ान भर सकेगा। यदि आप पटना में हैं, तो जल्दी बुकिंग करें और इस रोमांचक यात्रा का हिस्सा बनें। विज्ञान कोई किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है—और साइंस सिटी यही साबित कर रही है।