19 दिसंबर 2025, Deputy CM Samrat Chaudhary– बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Deputy CM Samrat Chaudhary ने पेट्रोल पंप, सड़क किनारे ढाबों और रेस्तरां पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह पहल राज्य में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का हिस्सा है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के साथ पटना में आयोजित समीक्षा बैठक में चौधरी ने ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भारी वृद्धि पर जोर दिया। यह निर्णय बिहार की 2023 ईवी पॉलिसी और 2025 रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी के अनुरूप है, जो राज्य को हरित ऊर्जा का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखती है।
इस रिपोर्ट में हम इस पहल की पूरी पृष्ठभूमि, बैठक के प्रमुख बिंदुओं, निर्देशों के प्रभाव, आर्थिक-सामाजिक लाभों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहां वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह कदम वायु प्रदूषण कम करने और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। आपकी वेबसाइट के पाठकों के लिए, यह रिपोर्ट न केवल तात्कालिक अपडेट है, बल्कि ईवी क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर भी प्रकाश डालती है।
पृष्ठभूमि: बिहार की ईवी यात्रा और पॉलिसी फ्रेमवर्क
बिहार सरकार ने 2023 में अपनी इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी अधिसूचित की, जिसका उद्देश्य 2028 तक ईवी की हिस्सेदारी 15% और 2030 तक 30% तक पहुंचाना है। वर्तमान में राज्य में ईवी की पेनेट्रेशन 6.85% है, जो राष्ट्रीय औसत (6.49%) से थोड़ा ऊपर है। पॉलिसी के तहत 277 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन दो चरणों में स्थापित करने का प्लान है, साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क पर 75% सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, जुलाई 2025 में जारी बिहार रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 ने ईवी को रिन्यूएबल ऊर्जा से जोड़ दिया है। इस पॉलिसी का लक्ष्य 2030 तक 23.9 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और 6 जीडब्ल्यूएच एनर्जी स्टोरेज हासिल करना है।
ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस है। पॉलिसी में पहले 1,000 ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए सरकारी जमीन पर 50% छूट, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी पर पूर्ण छूट और 25% कैपिटल सब्सिडी (प्रति स्टेशन अधिकतम 10 लाख रुपये) का प्रावधान है। इसके अलावा, पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए तीन साल तक 30% इलेक्ट्रिसिटी रेट सब्सिडी और रोड टैक्स तथा परमिट फीस पर छूट दी गई है। ये प्रोत्साहन निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, खासकर पेट्रोल पंप मालिकों और ढाबा संचालकों के लिए।
Deputy CM Samrat Chaudhary, जो एनर्जी और ट्रांसपोर्ट मंत्रालयों से जुड़े हैं, ने इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। जुलाई 2025 में बिहार रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपो के उद्घाटन में उन्होंने ईवी को हरित विकास का इंजन बताया था। वर्तमान पहल इसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है, जो राज्य के 56.54 करोड़ रुपये के ईवी बजट को प्रभावी बनाने का प्रयास है।
बैठक के प्रमुख बिंदु: चौधरी के निर्देशों का विवरण
18 दिसंबर को पटना में आयोजित समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री चौधरी ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, ट्रांसपोर्ट विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी (BSPGCL) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। बैठक का मुख्य एजेंडा ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार था। चौधरी ने कहा, “ईवी को अपनाने के लिए चार्जिंग की सुविधा अनिवार्य है। पेट्रोल पंप, ढाबे और रेस्तरां जैसे व्यस्त स्थानों पर स्टेशन लगाने से यूजर्स को सुविधा मिलेगी और राज्य में ईवी अपनाना आसान होगा।”
निर्देशों का ब्रेकडाउन इस प्रकार है:
- स्थापना के स्थान: सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों, हाईवे पर ढाबों और शहरी रेस्तरां पर चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य। प्रारंभिक लक्ष्य: 500 नए स्टेशन अगले छह महीनों में।
- तकनीकी मानक: रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर) आधारित स्टेशन प्राथमिकता। फायर सेफ्टी और साइबर सिक्योरिटी मानकों का पालन।
- प्रोत्साहन: पहले 1,000 आवेदकों को सरकारी जमीन पर 50% छूट और कैपिटल सब्सिडी। PPP मॉडल के तहत निजी कंपनियों को आमंत्रित।
- मॉनिटरिंग: ट्रांसपोर्ट विभाग को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश। ईवी पोर्टल (odtransportmis.nic.in/EVBihar) के माध्यम से आवेदनों का ट्रैकिंग।
चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया, कहा कि यह कदम बिहार के वायु प्रदूषण को 20% कम करने में मदद करेगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि पटना, गया और भागलपुर जैसे शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
प्रभाव: पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज पर असर
यह पहल बहुआयामी लाभ प्रदान करेगी। पर्यावरणीय दृष्टि से, बिहार में वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में कमी आएगी। राज्य में 1.5 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड वाहन हैं, जिनमें से अधिकांश डीजल-पेट्रोल आधारित हैं। ईवी चार्जिंग नेटवर्क से कार्बन एमिशन में 15-20% की कमी संभव है, जो क्लाइमेट चेंज कमिटमेंट्स के अनुरूप है।
आर्थिक रूप से, यह निवेश का द्वार खोलेगा। 25% कैपिटल सब्सिडी से निजी कंपनियां जैसे टाटा पावर और ओला इलेक्ट्रिक आकर्षित होंगी। राज्य में ईवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन होगा – अनुमानित 50,000 नौकरियां 2030 तक। सब्सिडी से उपभोक्ताओं को दोपहिया पर 20,000 रुपये, तिपहिया पर 30,000 रुपये और कार पर 1.5 लाख रुपये की बचत होगी।
सामाजिक प्रभाव सकारात्मक है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ईवी अपनाने से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी। महिलाओं और युवाओं के लिए सस्ते ईवी विकल्प उपलब्ध होंगे। हालांकि, चुनौतियां भी हैं – ग्रिड क्षमता बढ़ानी होगी और जागरूकता अभियान चलाने पड़ेंगे।
भविष्य की संभावनाएं: लक्ष्य और चुनौतियां
बिहार सरकार का लक्ष्य 2030 तक 30% ईवी पेनेट्रेशन है, जिसमें 6,000 चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी के तहत सोलर-आधारित स्टेशन 50% होंगे। केंद्र सरकार की PM E-DRIVE स्कीम से 1,000 करोड़ रुपये का फंडिंग मिल सकता है। लेकिन चुनौतियां जैसे बैटरी स्वैपिंग इंफ्रा, स्किल्ड वर्कफोर्स और ग्रामीण विद्युतीकरण बाधा बन सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चौधरी की यह पहल बिहार को ईवी इन्वेस्टमेंट हब बना सकती है। इंडस्ट्री मिनिस्टर नीतीश मिश्रा ने कहा, “बिहार का मजबूत इंडस्ट्रियल बेस ईवी ग्रोथ के लिए आदर्श है।”
निष्कर्ष: हरित बिहार की ओर एक कदम
Deputy CM Samrat Chaudhary की यह पहल बिहार को सतत मोबिलिटी की राह पर ले जा रही है। पेट्रोल पंप और ढाबों पर चार्जिंग स्टेशन न केवल सुविधा बढ़ाएंगे, बल्कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। राज्य सरकार को अब इंप्लीमेंटेशन पर फोकस करना चाहिए।