10 जनवरी 2026, Nitish Kumar के लिए भारत रत्न की मांग: बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री Nitish Kumar को भारत रत्न देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (S) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि नीतीश कुमार को इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाए। वहीं, जेडीयू ने अपने ही पूर्व सांसद केसी त्यागी के इसी मांग वाले बयान से दूरी बना ली है, इसे उनकी व्यक्तिगत राय बताकर। इस रिपोर्ट में हम इस मुद्दे की पृष्ठभूमि, वर्तमान घटनाक्रम, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और संभावित प्रभावों की विस्तृत पड़ताल करेंगे।
पृष्ठभूमि: भारत रत्न की मांग का इतिहास
Nitish Kumar के लिए भारत रत्न की मांग कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार यह मुद्दा उठा है, खासकर एनडीए गठबंधन के सहयोगियों की ओर से। उदाहरण के लिए, 2024 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी Nitish Kumar को भारत रत्न देने की वकालत की थी, जिसका समर्थन जीतन राम मांझी ने किया। इसी साल अक्टूबर में पटना में जेडीयू कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाए गए थे, जिसमें नीतीश को भारत रत्न देने की मांग की गई थी। ये मांगें नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल, सामाजिक न्याय और विकास कार्यों पर आधारित हैं, लेकिन हमेशा राजनीतिक रंग ले लेती हैं।
पहले की मांगें और संदर्भ
Nitish Kumar खुद 2016 में समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के लिए भारत रत्न की मांग कर चुके हैं। हाल ही में, 2025 में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश के योगदान को रेखांकित करते हुए इस मांग को दोहराया। ये मांगें अक्सर चुनावी मौसम या गठबंधन की मजबूती दिखाने के लिए उठती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नीतीश कुमार की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
वर्तमान घटनाक्रम: मांझी की अपील और त्यागी का बयान
10 जनवरी 2026 को जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “भारत रत्न नीतीश कुमार जी…ये शब्द सुनने में कितना अच्छा लगेगा ना। हमें पूर्ण विश्वास है कि अपने फैसले से सबको चौंका देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी को भारत रत्न से नवाजे जाने का फैसला कर एक बार फिर से सबको चौकाएंगे।” मांझी ने Nitish Kumar के सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा-विकास में योगदान की सराहना की। इस पोस्ट ने बिहार राजनीति में हलचल मचा दी, और कई सहयोगी दलों जैसे चिराग पासवान ने भी इसका समर्थन किया।
जेडीयू की दूरी: केसी त्यागी का मामला
दूसरी ओर, जेडीयू के पूर्व सांसद केसी त्यागी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर Nitish Kumar को भारत रत्न देने की मांग की थी। लेकिन जेडीयू ने इससे तुरंत दूरी बना ली। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “यह केसी त्यागी की व्यक्तिगत राय है, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का त्यागी से अब कोई औपचारिक संबंध नहीं है, और उनके बयान पार्टी की विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करते। सूत्रों के मुताबिक, त्यागी और पार्टी के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है, हालांकि कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का तंज
इस मांग पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, “नीतीश कुमार को किस बात के लिए भारत रत्न? हाल ही में उन्होंने विधानसभा में महिलाओं को अपमानित किया।” आरजेडी ने इसे एनडीए की आंतरिक कलह का संकेत बताया। वहीं, बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने त्यागी के बयान को व्यक्तिगत बताकर पार्टी की एकजुटता जताई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मांग राज्यसभा चुनावों से पहले उठी है, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को हवा दे रही है।
अन्य दलों की राय
NDA सहयोगी जैसे हम (एस) और लोक जनशक्ति पार्टी ने मांझी की अपील का समर्थन किया, जबकि बीजेपी ने अभी चुप्पी साध रखी है। विश्लेषकों का कहना है कि पीएम मोदी की छवि चौंकाने वाली फैसलों वाली है, इसलिए इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विश्लेषण: राजनीतिक निहितार्थ
यह मांग बिहार की राजनीति में नेतृत्व संकट या गठबंधन की मजबूती का संकेत हो सकती है। नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए, यह उनके राजनीतिक उत्तराधिकार की चर्चा को तेज कर रही है। जेडीयू की त्यागी से दूरी आंतरिक असंतोष को दर्शाती है, जहां पुराने नेता स्वतंत्र बयानबाजी से पार्टी को असहज कर देते हैं। यदि यह मांग पूरी हुई, तो नीतीश की राष्ट्रीय छवि मजबूत होगी, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक सौदेबाजी बताएगा।
संभावित प्रभाव
राज्यसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा एनडीए को एकजुट दिखाने का प्रयास लगता है, लेकिन जेडीयू की आंतरिक कलह से गठबंधन पर असर पड़ सकता है। बिहार के विकास कार्यों पर भी ध्यान भटक सकता है।
निष्कर्ष: सस्पेंस बरकरार
Nitish Kumar के लिए भारत रत्न की मांग ने बिहार राजनीति को गर्मा दिया है। मांझी की अपील उत्साहजनक है, लेकिन जेडीयू की दूरी से साफ है कि पार्टी आधिकारिक तौर पर इससे अलग है। आने वाले दिनों में पीएम मोदी का फैसला क्या होगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है, जो बिहार की सत्ता की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।