INDORE WATER CRISISINDORE WATER CRISIS

2 जनवरी 2026, Indore– भारत की सबसे स्वच्छ शहर के रूप में आठ वर्षों से सम्मानित Indore अब एक भयानक जल संकट का शिकार हो गया है। भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण डायरिया का प्रकोप फैला, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की, जबकि स्थानीय निवासियों का दावा है कि मृतकों की संख्या 14-15 तक पहुंच चुकी है। 1,400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती हैं। लैब रिपोर्ट में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज का मिश्रण दर्शाती है। यह संकट न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को भी उजागर करता है। इस रिपोर्ट में हम संकट की जड़ों, प्रभावों, सरकारी प्रतिक्रिया और राजनीतिक विवादों का विश्लेषण करेंगे।

संकट की शुरुआत: पाइपलाइन लीकेज की अनदेखी

संकट की जड़ें 26 दिसंबर 2025 को हैं, जब भगीरथपुरा के निवासियों ने नल के पानी में दुर्गंध, कड़वापन और रंग की शिकायत की। शुरुआत में शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, लेकिन जल्द ही उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार के मामले बढ़ने लगे। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि शहर के मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी की पुष्टि हुई। पुलिस चौकी के पास मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन में दरार थी, जहां एक शौचालय का निर्माण हो चुका था, जिससे सीवेज पानी में घुल गया। ई. कोलाई और अन्य बैक्टीरिया की मौजूदगी ने इसे घातक बना दिया।

यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है, जहां गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दूषित पानी से होने वाली बीमारियां जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस, हैजा और डिसेंट्री विकासशील देशों में मौतों का प्रमुख कारण हैं। Indore में आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 71 डिस्चार्ज हो चुके हैं, लेकिन 201 अभी भर्ती हैं, जिसमें 32 आईसीयू में हैं। एक दर्दनाक घटना में, 10 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जन्मा छह माह का शिशु अव्यन भी इसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। परिवार ने सरकारी मुआवजे को ठुकरा दिया, कहते हुए कि कोई राशि उनके बच्चे की जगह नहीं ले सकती।

प्रभावित समुदाय: कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग इस संकट के प्रमुख शिकार बने। स्थानीय निवासी 15 मौतों का दावा कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग केवल चार की पुष्टि करता है। अस्पतालों में दवाओं की कमी और डिहाइड्रेशन के कारण जटिलताएं बढ़ गईं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग दूषित पानी के नमूने दिखाते नजर आ रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी “स्वच्छ भारत” के नारे लगा रहे हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #IndoreWaterCrisis ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स सरकार की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया: देरी और विवाद

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा, “मुझे 10 मौतों की जानकारी मिली है।” लेकिन उन्होंने कोलेरा की आशंका पर स्वास्थ्य विभाग पर छोड़ दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त आयुक्त और अधीक्षण अभियंता को निलंबित करने का आदेश दिया। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रारंभिक लैब रिपोर्ट में दूषण की पुष्टि हुई है, लेकिन विशिष्ट बैक्टीरिया की पहचान बाकी है। शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सीवेज पानी पुलिस चेकपोस्ट के पास मिश्रित हो गया।

हालांकि, प्रतिक्रिया में देरी ने विवाद बढ़ाया। स्थानीय शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया, जबकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुफ्त इलाज का आदेश दिया। एनडीटीवी पत्रकार अनुराग द्वारी ने मंत्री विजयवर्गीय से सवाल किया, तो उन्होंने गुस्से में “फोकट” और “घंटा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसका वीडियो वायरल हो गया।

राजनीतिक तूफान: विपक्ष का हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “विष बांटा गया जबकि प्रशासन गहरी नींद में था।” उन्होंने गरीबों की मौत पर केंद्र की चुप्पी पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार को “स्वच्छ पानी-हवा न देने” का दोषी ठहराया। हाईकोर्ट में सरकार ने केवल चार मौतें बताईं, जबकि शहर में 14 ताबूत उठे। यह छिपावाल का आरोप लगा रहा।

भविष्य की चुनौतियां: सबक और सुधार

Indore की स्वच्छता की ताज 2016-17 और 2017-18 में भी पानी के सैंपल फेल होने के कारण फीकी पड़ी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 60 में से 59 सैंपल असफल बताए थे। WHO के अनुसार, दूषित पानी से बचाव के लिए नियमित निगरानी, पाइपलाइन मरम्मत और जागरूकता जरूरी है। लक्षणों में उल्टी-दस्त पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।

यह संकट शहरीकरण की चुनौतियों को उजागर करता है। यदि बुनियादी ढांचे पर ध्यान न दिया गया, तो “स्वच्छ भारत” का सपना अधूरा रहेगा। सरकार को पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए, वरना जनता का विश्वास डगमगा सकता है। इंदौर अब न केवल स्वच्छता, बल्कि सुरक्षित जलापूर्ति के लिए संघर्ष कर रहा है। दुनिया की नजर इस पर है – क्या यह सुधार का मोड़ बनेगा?

Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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