12 जनवरी 2026, Dalmia Cement का ठाकुरगंज में 550 करोड़ का निवेश: बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में Dalmia Cement (NORTH EAST) लिमिटेड द्वारा एक स्टैंडअलोन सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट स्थापित करने की योजना ने क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है। कंपनी ने पर्यावरण मंत्रालय से टर्म्स ऑफ रेफरेंस (TOR) के लिए आवेदन किया है, जिसमें 3 मिलियन टन प्रति वर्ष (TPA) क्षमता वाली यूनिट के लिए 550 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह प्लांट भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से मात्र 2.23 किलोमीटर दूर स्थित होगा, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा। यह परियोजना बिहार सरकार की औद्योगिक नीति के अनुरूप है, जो रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देती है।
ठाकुरगंज, जो नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, अब सीमेंट उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय व्यापार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
Dalmia Cement की यह यूनिट 53.36 एकड़ भूमि पर फैली होगी, जिसमें आधुनिक ग्राइंडिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। क्षमता 3 मिलियन TPA होने से यह बिहार की सीमेंट उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगी। कंपनी का फोकस पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन पर है, जिसमें कम उत्सर्जन वाली मशीनरी और जल संरक्षण प्रणालियां शामिल होंगी। निवेश की राशि 550 करोड़ रुपये है, जो निर्माण, मशीनरी और बुनियादी ढांचे पर खर्च की जाएगी। निर्माण कार्य शुरू होने पर लगभग 500 प्रत्यक्ष और 1000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
ठाकुरगंज की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को विशेष बनाती है। नेपाल सीमा से निकटता के कारण, उत्पादित सीमेंट का निर्यात आसान होगा, जो बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता, जैसे चूना पत्थर और क्लिंकर, लागत को कम रखेगी। डालमिया भारत लिमिटेड, जो देश की प्रमुख सीमेंट कंपनियों में से एक है, पहले से ही पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में सक्रिय है। यह निवेश कंपनी की विस्तार रणनीति का हिस्सा है, जो 2027 तक 75 मिलियन टन क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है।
पर्यावरणीय और नियामकीय पहलू
पर्यावरण मंत्रालय से टीओआर प्राप्त करने की प्रक्रिया में पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) रिपोर्ट अनिवार्य है। कंपनी ने वादा किया है कि प्लांट में धूल नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन भी किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण और अनुमतियों में सहयोग का आश्वासन दिया है। हालांकि, कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जल स्रोतों पर प्रभाव की चिंता जताई है, जिस पर कंपनी को स्पष्टता प्रदान करनी होगी।
बिहार में डालमिया का पिछला योगदान
डालमिया भारत लिमिटेड बिहार में पहले से ही सक्रिय है। कंपनी का बनजारी प्लांट रोहतास जिले में स्थित है, जहां 1 मिलियन टन क्षमता वाली यूनिट है। 2023 में कंपनी ने यहां 10.9 मिलियन डॉलर (लगभग 90 करोड़ रुपये) का निवेश किया था। ठाकुरगंज परियोजना कंपनी की पूर्वी भारत में विस्तार की श्रृंखला में नया अध्याय है। हाल ही में, कंपनी ने असम, झारखंड और कर्नाटक में भी निवेश किए हैं, जैसे बोकारो में 500 करोड़ की ग्राइंडिंग यूनिट।
बिहार सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत, ऐसे निवेशों को कर छूट, सब्सिडी और तेज अनुमति प्रक्रिया मिलती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा था कि बिहार अब निवेश का हॉटस्पॉट है। यह परियोजना सीमांचल क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है, जहां बेरोजगारी और गरीबी प्रमुख मुद्दे हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यह निवेश स्थानीय अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। ठाकुरगंज और किशनगंज में निर्माण से ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े व्यवसाय बढ़ेंगे। नेपाल से व्यापार बढ़ने से सीमा व्यापार केंद्र मजबूत होंगे। रोजगार के अवसर युवाओं को पलायन से रोकेंगे। महिलाओं के लिए भी स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा सकते हैं। हालांकि, चुनौतियां हैं जैसे सड़क और रेल कनेक्टिविटी की कमी। सरकार को ठाकुरगंज को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की योजना पर काम करना चाहिए।
स्थानीय प्रतिक्रियाएं और भविष्य की संभावनाएं
स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना का स्वागत किया है, लेकिन भूमि दान और पर्यावरण मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है, जहां लोग रोजगार की उम्मीद जता रहे हैं। राजनीतिक स्तर पर, किशनगंज विधायक ने इसे क्षेत्र की जीत बताया। भविष्य में, यदि यह सफल होता है, तो अन्य कंपनियां भी आ सकती हैं, जैसे डिफेंस कॉरिडोर की योजना।
निष्कर्ष: बिहार के विकास की नई दिशा
Dalmia Cement का ठाकुरगंज निवेश बिहार की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करेगा। 550 करोड़ का यह प्रोजेक्ट न केवल सीमेंट उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगा। सरकार और कंपनी को मिलकर इसे समय पर पूरा करना चाहिए, ताकि बिहार निवेश का प्रमुख गंतव्य बने। यह परियोजना 2026 की शुरुआत में निर्माण शुरू कर सकती है, जो राज्य की GDP में योगदान देगी।
Sources: ग्लोबल सीमेंट्स