Pawan Khera of CongressPawan Khera of Congress

18 फरवरी 2026, Congress ने हरदीप सिंह पुरी पर एपस्टीन फाइल्स विवाद में तीखा हमला: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर जेफरी एपस्टीन फाइल्स से जुड़े विवाद में गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। पार्टी ने दावा किया है कि 2014 से 2017 के बीच पुरी और अमेरिकी फाइनेंसर तथा दोषसिद्ध यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच कुल 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें पुरी ने 32 ईमेल भेजे और एपस्टीन ने 30। साथ ही, इस अवधि में दोनों के बीच 14 मुलाकातें हुईं। कांग्रेस ने इन संपर्कों की प्रकृति पर पूरी सफाई मांगते हुए पुरी से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। यह विवाद हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी एपस्टीन फाइल्स के नए बैच के बाद और गहरा गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

जेफरी एपस्टीन एक कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर थे, जिन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप थे। 2008 में उन्होंने एक सौदे के तहत दोष स्वीकार किया था, लेकिन 2019 में जेल में उनकी मौत हो गई। हाल के वर्षों में अमेरिकी अदालतों द्वारा जारी फाइल्स में कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें भारत से हरदीप सिंह पुरी का नाम भी शामिल है। ये दस्तावेज ईमेल, मीटिंग रिकॉर्ड और अन्य संचार दिखाते हैं, जो पुरी के राजदूत काल और उसके बाद के समय से जुड़े हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि ये संपर्क मोदी सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद शुरू हुए और 2017 तक जारी रहे। पार्टी ने इसे नैतिक संकट करार दिया है, क्योंकि एपस्टीन की आपराधिक पृष्ठभूमि 2014 से पहले ही सार्वजनिक थी।

कांग्रेस के प्रमुख आरोप और सवाल

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने 17 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत दावे पेश किए। उन्होंने कहा:

  • 2014-2017 के बीच कुल 62 ईमेल एक्सचेंज हुए।
  • पुरी ने 32 ईमेल भेजे, एपस्टीन ने 30।
  • कुल 14 मुलाकातें हुईं, जिनमें से 2014 में ही 9 मुलाकातें दर्ज हैं।
  • विशेष तारीखों का जिक्र: 5, 6, 8 और 9 जून; 19, 23 और 24 सितंबर; तथा 9 और 10 अक्टूबर 2014।
  • खेड़ा ने सवाल उठाया कि इन मुलाकातों में क्या चर्चा हुई? पुरी उस समय किस पद पर थे और किस हैसियत से एपस्टीन से मिले?

कांग्रेस ने पुरी पर “झूठ बोलने” का भी आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि पुरी ने हाल के बयानों में केवल 3-4 मुलाकातों का जिक्र किया था, जबकि सबूत 14 मुलाकातों और दर्जनों ईमेलों के हैं। खेड़ा ने कहा कि ऐसे गहन संपर्क—विशेषकर एपस्टीन की आपराधिक छवि के बावजूद—सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। पार्टी ने मांग की कि पुरी इन ईमेल और बैठकों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करें।

हरदीप सिंह पुरी का पक्ष

हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके संपर्क पूरी तरह प्रोफेशनल थे। पुरी ने दावा किया कि:

  • मुलाकातें 3-4 बार हुईं, जो 8 साल की अवधि में फैली थीं।
  • ये मीटिंग्स अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (International Peace Institute) से जुड़ी थीं, जहां पुरी संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रह चुके थे।
  • चर्चा मुख्य रूप से भारत की आर्थिक वृद्धि, डिजिटल इंडिया और निवेश अवसरों पर थी।
  • एपस्टीन फाइल्स में उनका नाम केवल कुछ ईमेलों में आया है, लेकिन कोई गलत इरादा या आपराधिक गतिविधि नहीं जुड़ी।
  • पुरी ने कांग्रेस पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा कि ये दावे बेबुनियाद हैं।

पुरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे “कुछ भी छिपा नहीं रहे” और जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को “बेतुका” बताया।

राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

यह विवाद मोदी सरकार के लिए बड़ा नैतिक और राजनीतिक संकट बन गया है। कांग्रेस ने इसे “कॉम्प्रोमाइज्ड सरकार” का सबूत बताया और कहा कि ऐसे व्यक्ति को संवेदनशील मंत्रालय जैसे पेट्रोलियम में रखना उचित नहीं। पार्टी ने संसद, सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।

विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया है। TMC सांसद सागरिका घोष ने कहा कि एपस्टीन से ईमेल एक्सचेंज “शॉकिंग” है और सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों में मंत्री इस्तीफा दे देते हैं, इसलिए पुरी को भी ऐसा करना चाहिए।

दूसरी ओर, भाजपा ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताया है। सरकार का रुख है कि कोई गलत काम साबित नहीं हुआ और आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

एपस्टीन फाइल्स विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की पारदर्शिता और नैतिकता पर बड़ा सवाल बन गया है। कांग्रेस की मांग है कि पुरी तत्काल इस्तीफा दें और पूर्ण सफाई दें, जबकि पुरी ने इसे प्रोफेशनल इंटरैक्शन बताया है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद और जनता के बीच बहस का प्रमुख मुद्दा बना रहेगा। फिलहाल पुरी पद पर बने हुए हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

Sources: अमर उजाला

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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