10 दिसंबर 2025: बिहार में मानो सर्दी ने पूरी ताकत झोंक दी हो। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने राज्य के ज्यादातर हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे दैनिक जीवन पटरी से उतर गया है। मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया है, जबकि दृश्यता मात्र 50-200 मीटर रह गई है। यह सर्द लहर अगले कुछ दिनों तक और तीव्र होने की आशंका है, जिससे यातायात, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
राज्य के 25 जिलों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिसमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शेओहर, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, भागलपुर, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, बांका, पटना, गया, औरंगाबाद, सासाराम और कैमूर प्रमुख हैं। कैमूर जिले के अधौरा ब्लॉक में न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसम का सबसे निचला स्तर है। भागलपुर में 8.4 डिग्री, जबकि पटना में न्यूनतम 14 डिग्री और अधिकतम 27 डिग्री रहा, लेकिन दिन का औसत तापमान 20 डिग्री के आसपास घूम रहा। गोपालगंज, सिवान, गया और नालंदा जैसे जिलों में रात का तापमान 5-10 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। दक्षिणी बिहार और पठारी क्षेत्रों में ठंड का असर सबसे ज्यादा है, जहां पछुआ हवाओं की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई है।
इस ठंड और कोहरे ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर दिया है। पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे शहरों में वाहन धीमी गति से चल रहे हैं, जिससे जाम और देरी आम हो गई है। कई जगहों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि दृश्यता बेहद कम है। रेल और हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है—कई ट्रेनें लेट हो रही हैं, जबकि एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी दर्ज की गई। आईएमडी ने चालकों को सतर्क रहने और धीमी गति अपनाने की सलाह दी है।
दैनिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ा है। लोग सुबह-शाम हीटर, अंगीठी और ऊनी कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। बाजारों में सन्नाटा पसर गया है, जबकि स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों की उपस्थिति घटी है। कई जिलों में सुबह के समय बोनफायर जलाकर लोग ठंड से बच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी की है कि ठंड-कोहरे के मिश्रण से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं। पटना का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 255 पर ‘खराब’ पहुंच गया है, जबकि मुजफ्फरपुर (184) और गया (191) में ‘मध्यम’ स्तर है। बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि कोहरे से प्रदूषण फंस जाता है, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कृषि क्षेत्र भी चपेट में है। रबी फसलें जैसे गेहूं और सरसों को जमीन पर जमी ठंड से खतरा है। किसानों को टार्पॉलिन या पुआल से फसलों को ढकने और पशुओं को आश्रय देने की सलाह दी गई है। पशुपालन विभाग ने चारा और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में तापमान 2-4 डिग्री और गिरेगा, जबकि अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा। 15 दिसंबर के बाद पछुआ हवाओं की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है, जिससे न्यूनतम तापमान 5-7 डिग्री तक पहुंच सकता है। यह सर्दी का सबसे कठोर दौर होगा। विशेषज्ञों ने लोगों से गर्म कपड़े पहनने, गर्म भोजन करने और धूम्रपान-शराब से परहेज करने की अपील की है।
बिहार सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। जिला प्रशासन ने कंबल वितरण और गर्माहट केंद्र खोले हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर, यह ठंडी लहर राज्य की चुनौतियों को उजागर कर रही है, लेकिन जनता की हिम्मत से यह दौर भी गुजर जाएगा।