7 जनवरी 2026, किशनगंज में ठंड का प्रकोप: उत्तर भारत में जारी शीतलहर की चपेट में बिहार का Kishanganj जिला भी आ गया है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 8 तक की पढ़ाई 9 जनवरी 2026 तक स्थगित कर दी गई है। यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट (DM) विशाल राज ने जारी किया है, जिसका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ठंड के इस प्रकोप ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि आम जनजीवन को भी बुरी तरह झकझोर दिया है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसमें मौसम की स्थिति, प्रशासनिक कदम, छात्रों और अभिभावकों पर प्रभाव, तथा इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
ठंड की वर्तमान स्थिति और इसका कारण
बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित किशनगंज जिला, जो नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, हमेशा से ही सर्दियों में कठोर मौसम का सामना करता रहा है। लेकिन इस वर्ष 2026 की शुरुआत में ठंड का प्रकोप असाधारण रूप से तीव्र है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, Kishanganj में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर चुका है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान भी 15 डिग्री के आसपास ही रह रहा है। घना कोहरा सुबह के समय दृश्यता को 50 मीटर से कम कर देता है, जिससे यातायात और दैनिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
यह शीतलहर हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं और उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्पन्न हुई है। आईएमडी ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, जिससे ठंड से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। Kishanganj जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां अधिकांश आबादी गरीबी रेखा से नीचे है, ठंड का प्रभाव और भी गंभीर है। लोग अलाव जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईंधन की कमी और प्रदूषण की समस्या इसे जटिल बना रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार ठंड की तीव्रता 20-30% अधिक है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को इंगित करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम के चरम रूप अधिक बार देखने को मिल रहे हैं, जिसमें ठंड की लहरें भी शामिल हैं।
DM विशाल राज का आदेश: विवरण और पालन
जिला मजिस्ट्रेट विशाल राज ने 6 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों के लिए स्कूल 9 जनवरी तक बंद रहेंगे। यह निर्णय ठंड के कारण छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह सभी सरकारी, निजी और मदरसा स्कूलों पर लागू होगा। हालांकि, कक्षा 9 से ऊपर के छात्रों के लिए स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन उनके लिए भी समय में बदलाव किया जा सकता है यदि स्थिति बिगड़ती है।
DM विशाल राज, जो एक अनुभवी प्रशासक हैं और पहले भी आपदा प्रबंधन में अपनी कुशलता दिखा चुके हैं, ने इस आदेश के साथ ही जिले के स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा है। उन्होंने निर्देश दिया है कि ठंड से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाए जाएं और कंबल वितरण तेज किया जाए। आदेश के पालन के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है, और उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है। इस कदम की सराहना करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक था, क्योंकि सुबह के समय ठंड में स्कूल जाना जोखिम भरा होता।
छात्रों और अभिभावकों पर प्रभाव
इस स्कूल बंदी का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों पर पड़ा है। Kishanganj जिले में लगभग 50,000 छात्र कक्षा 1 से 8 तक के हैं, जो अब घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। कई स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने की कोशिश की है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी और स्मार्टफोन की अनुपलब्धता के कारण यह प्रभावी नहीं हो पा रही है। अभिभावक चिंतित हैं कि यह बंदी छात्रों की शिक्षा को प्रभावित करेगी, खासकर उन बच्चों की जो सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील पर निर्भर हैं। ठंड के कारण कई परिवारों में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, जैसे सर्दी, खांसी और बुखार, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ गया है।
एक स्थानीय अभिभावक, रामेश्वर यादव ने बताया, “हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, लेकिन घर पर ठंड से बचाना भी मुश्किल है। सरकार को ऑनलाइन शिक्षा के लिए सहायता प्रदान करनी चाहिए।” वहीं, शिक्षक संघों ने मांग की है कि बंदी के दौरान शिक्षकों को ऑनलाइन मोड में काम करने की सुविधा दी जाए। इस स्थिति ने शिक्षा की असमानता को उजागर किया है, जहां शहरी क्षेत्रों के बच्चे आसानी से ऑनलाइन जुड़ सकते हैं, लेकिन ग्रामीण बच्चे पिछड़ जाते हैं।
अन्य राज्यों में समान स्थिति: तुलनात्मक विश्लेषण
Kishanganj की यह स्थिति पूरे उत्तर भारत में व्याप्त शीतलहर का हिस्सा है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में जयपुर जिले में कक्षा 5 तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद हैं, जबकि झारखंड में सभी स्कूल 8 जनवरी तक बंद घोषित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी 8 जनवरी तक बंदी है, और दिल्ली में 15 जनवरी तक विंटर वेकेशन चल रहा है। बिहार के अन्य जिलों जैसे पटना में कक्षा 5 तक के स्कूल बंद हैं, लेकिन Kishanganj में यह कक्षा 8 तक विस्तारित है, जो यहां की अधिक ठंड को दर्शाता है।
ये बंदियां छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी बंदी से छात्रों का लर्निंग लॉस बढ़ सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत, सरकार को ऐसे समय में वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। अन्य राज्यों की तुलना में Kishanganj में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन संसाधनों की कमी एक चुनौती बनी हुई है।
स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव
ठंड का प्रकोप केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। Kishanganj में ठंड से संबंधित मौतों की संख्या बढ़ रही है, खासकर बेघर और मजदूर वर्ग में। स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट किया है कि पिछले सप्ताह में ठंड से जुड़ी बीमारियों के 200 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक है, क्योंकि वे घरेलू कामों में अधिक समय बाहर बिताते हैं। सामाजिक संगठन जैसे रेड क्रॉस और स्थानीय एनजीओ कंबल और गर्म कपड़ों का वितरण कर रहे हैं, लेकिन मांग अधिक है।
सरकार ने राहत के लिए 10 लाख रुपये का फंड जारी किया है, लेकिन स्थानीय नेता मांग कर रहे हैं कि इसे बढ़ाया जाए। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वनों की कटाई और प्रदूषण ने ठंड को और तीव्र बनाया है, इसलिए लंबे समय के समाधान की जरूरत है।
निष्कर्ष और सुझाव
Kishanganj में ठंड का यह प्रकोप एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है। DM विशाल राज का आदेश समय पर लिया गया कदम है, लेकिन अब फोकस शिक्षा की निरंतरता पर होना चाहिए। सरकार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ानी चाहिए। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उम्मीद है कि 9 जनवरी के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि ठंड जारी रही, तो आगे के कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने हमें सतर्क और तैयार रहना चाहिए।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया