19 फरवरी 2026, Galgotias University में चाइनीज रोबोडॉग विवाद: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत की AI क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित कई बड़े नाम मौजूद थे। लेकिन समिट की चमक एक छोटी-सी घटना ने धूमिल कर दी – ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) द्वारा प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर उठा विवाद। इस घटना ने न केवल यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर का रास्ता दिखाया, बल्कि राजनीतिक हमलों, सोशल मीडिया मीम्स और राष्ट्रीय शर्मिंदगी का कारण भी बन गई। कांग्रेस ने इसे “गलगोटिया गवर्नमेंट” कहकर केंद्र पर निशाना साधा। यह रिपोर्ट इस पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल करती है। (शब्द गिनती जारी)
विवाद की शुरुआत समिट के दूसरे दिन, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने पवेलियन में एक चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया, जिसका नाम “ओरियन” (Orion) रखा गया था। यूनिवर्सिटी की कम्युनिकेशंस प्रोफेसर नेहा सिंह ने राज्य समाचार चैनल DD News को इंटरव्यू देते हुए कहा, “यह ओरियन हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डेवलप किया गया है।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
लेकिन कुछ ही घंटों में टेक उत्साही, AI एक्सपर्ट्स और आम यूजर्स ने इसे पहचान लिया – यह रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल था। Unitree Go2 एक कमर्शियल प्रोडक्ट है, जो भारत में लगभग 2-3 लाख रुपये (करीब $2,200-$3,000) में उपलब्ध है। यह रोबोट रिसर्च, एजुकेशन और इंडस्ट्री में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है, लेकिन यह किसी भी यूनिवर्सिटी का इन-हाउस इनोवेशन नहीं है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और क्रिटिसिज्म की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने लिखा – “Make in India की जगह Make in China हो गया?” कुछ ने यूनिवर्सिटी पर फ्रॉड का आरोप लगाया, तो कुछ ने समिट के आयोजकों पर सवाल उठाए कि कैसे ऐसा प्रोडक्ट एक्सपो में जगह पा गया।
यूनिवर्सिटी की सफाई और माफी विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने तुरंत सफाई जारी की। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उन्होंने कभी दावा नहीं किया कि रोबोडॉग उनका डेवलप्ड प्रोडक्ट है। यह Unitree से खरीदा गया था और छात्रों के रिसर्च व लर्निंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। नेहा सिंह ने भी कहा कि उन्होंने “स्लिप ऑफ टंग” की थी और मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था।
यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान में माफी मांगी: “हम इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में हुई किसी भी कन्फ्यूजन के लिए गहरा खेद व्यक्त करते हैं। हमारा इरादा छात्रों को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ना था, न कि गलत जानकारी देना।” उन्होंने प्रोफेसर की “कैमरा के प्रति उत्साह” को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह टेक्निकल डिटेल्स से अनजान थीं।
फिर भी, सफाई से विवाद थमा नहीं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यूनिवर्सिटी ने शुरुआत में इसे “डेवलप्ड बाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” बताया था, जो स्पष्ट रूप से गलत था।
सरकार और समिट आयोजकों की कार्रवाई विवाद बढ़ते ही MeitY (Ministry of Electronics and IT) और समिट आयोजकों ने सख्त कदम उठाया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी को “तुरंत” अपना स्टॉल खाली करने का आदेश दिया गया। बुधवार सुबह उनके पवेलियन की बिजली काट दी गई और स्टाफ को एक्सपो एरिया से बाहर कर दिया गया।
IT सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने कहा, “एग्जिबिटर्स को ऐसे आइटम्स नहीं दिखाने चाहिए जो उनके नहीं हैं। मिसइनफॉर्मेशन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। समिट में सिर्फ जेनुइन और ओरिजिनल वर्क को जगह मिलनी चाहिए।” सरकार ने इसे “नेशनल एम्बैरसमेंट” बताया, क्योंकि समिट भारत की AI लीडरशिप दिखाने का मंच था।
राजनीतिक हमला: कांग्रेस का “गलगोटिया गवर्नमेंट” तंज विपक्ष ने इस मौके का फायदा उठाया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X (पूर्व Twitter) पर लिखा, “यह ‘गलगोटिया गवर्नमेंट’ है, जिसने भारत में गलगोटिया जैसे यूनिवर्सिटीज को पोषित किया है।” उन्होंने कहा कि भारत के ग्लोबल टेक लीडर्स (जैसे सुंदर पिचाई, सत्य नडेला) कांग्रेस के समय बने संस्थानों से पढ़े हैं, जबकि BJP का “गला-घोंट” अप्रोच एजुकेशन को नुकसान पहुंचा रहा है।
CPI(M) सांसद जॉन ब्रिट्टास ने भी कहा कि गलगोटिया को BJP लीडर्स का संरक्षण मिला हुआ है, इसी वजह से ऐसा “बोल्ड” कदम उठाया गया। विपक्ष ने पूछा – समिट में ऐसे फर्जी क्लेम कैसे पास हो गए? क्या जांच नहीं हुई?
Unitree Go2 रोबोट की डिटेल्स Unitree Go2 एक एडवांस्ड क्वाड्रुपेड रोबोट है, जिसमें AI, मशीन लर्निंग, 360° LiDAR, 4K कैमरा और हाई-स्पीड मूवमेंट कैपेबिलिटी है। यह इंडस्ट्रियल इंस्पेक्शन, रिसर्च और एंटरटेनमेंट में इस्तेमाल होता है। भारत में इसे आसानी से खरीदा जा सकता है, लेकिन इसे “इंडिजिनस” बताना गलत था।
सबक यह विवाद छोटा लग सकता है, लेकिन यह भारत की AI महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाता है। जब देश “Make in India” और आत्मनिर्भरता की बात कर रहा है, तो एक यूनिवर्सिटी द्वारा विदेशी प्रोडक्ट को अपना बताना शर्मिंदगी है। यह घटना एक्सपो में सख्त वेरिफिकेशन, ट्रांसपेरेंसी और ट्रेनिंग की जरूरत दिखाती है।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफी मांग ली, लेकिन डैमेज हो चुका है – सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग जारी है, और राजनीतिक बहस गर्म है। समिट की सफलता (Google, Reliance जैसे बड़े निवेश) के बीच यह एक ब्लैक स्पॉट बन गया।
आगे ऐसे मामलों से बचने के लिए एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को क्लियर गाइडलाइंस फॉलो करनी होंगी। AI का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन ईमानदारी और इनोवेशन के बिना यह सिर्फ शोपीस बनकर रह जाएगा।
Sources: बीबीसी