12 जनवरी 2026, Seemanchal क्षेत्र में चीन की PLA बेस योजना: Seemanchal क्षेत्र, जो बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार जिलों को शामिल करता है, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं से सटा हुआ है। हाल ही में जारी पेंटागन की रिपोर्ट ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा बांग्लादेश में सैन्य अड्डा स्थापित करने की योजना पर चेतावनी दी है, जो सीधे सीमांचल क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। दिसंबर 2025 में अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन 21 देशों में सैन्य अड्डे बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें बांग्लादेश प्रमुख है। इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं, विशेष रूप से सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास, जहां किशनगंज में भारतीय सेना ने फॉरवर्ड बेस को मजबूत किया है। भारत ने निगरानी बढ़ा दी है, जिसमें ड्रोन और रडार सिस्टम का उपयोग शामिल है। यह रिपोर्ट इन घटनाक्रमों का विश्लेषण करती है।
पेंटागन रिपोर्ट की मुख्य बातें
पेंटागन की 2025 चीन मिलिटरी पावर रिपोर्ट में चीन की वैश्विक सैन्य महत्वाकांक्षा पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन मलक्का जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के लिए विदेशी अड्डे तलाश रहा है। बांग्लादेश के अलावा, म्यांमार, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी चीन की रुचि है। अमेरिका का मानना है कि चीन का उद्देश्य अपनी नौसेना और वायुसेना को विस्तार देना, अमेरिकी सेना की गतिविधियों पर नजर रखना और 2049 तक ‘विश्व-स्तरीय’ सेना बनाना है। रिपोर्ट में भारत के लिए चेतावनी है कि चीन LAC पर तनाव कम करके अमेरिका-भारत संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है, जैसे J-10C फाइटर जेट की आपूर्ति।
चीन की बांग्लादेश में रुचि
बांग्लादेश में चीन की सैन्य योजना Seemanchal क्षेत्र के लिए सीधा खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन बांग्लादेश में अड्डा स्थापित कर सकता है, जो भारत की पूर्वी सीमा को प्रभावित करेगा। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश चीन-पाकिस्तान धुरी की ओर झुक रहा है। चीन ने बांग्लादेश में प्रस्तावित एयर बेस साइट का निरीक्षण किया है, जो सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास है।
इससे भारत की पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी खतरे में पड़ सकती है। पेंटागन का कहना है कि चीन की यह रणनीति क्षेत्रीय प्रभुत्व हासिल करने की है, जो भारत-अमेरिका गठबंधन को चुनौती देगी। चीन ने रिपोर्ट को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बताकर खारिज किया है।
भारत की प्रतिक्रिया: किशनगंज में फॉरवर्ड बेस मजबूत
भारत ने इन खतरों के जवाब में Seemanchal क्षेत्र में सैन्य तैयारी तेज कर दी है। किशनगंज में नया फॉरवर्ड आर्मी बेस स्थापित किया गया है, जो बिहार में स्थित है और नेपाल-बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है। नवंबर 2025 में, भारत ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास तीन नए बेस बनाए, जिसमें किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा शामिल हैं। इन बेसों का उद्देश्य बांग्लादेश से उभरते खतरों का मुकाबला करना है, जहां अंतरिम सरकार चीन और पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध मजबूत कर रही है।
भारतीय वायुसेना ने रडार सुविधाएं बढ़ाई हैं, जो मिसाइल और हवाई खतरों का पता लगाएंगी। साथ ही, ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि सीमा पार गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
निगरानी और रणनीतिक बदलाव
भारत की निगरानी प्रणाली में बड़ा बदलाव आया है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्यभूमि से जोड़ता है, अब प्राथमिकता पर है। पेंटागन रिपोर्ट के बाद भारत ने अमेरिका के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाया है। बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता, जहां हसीना की प्रो-इंडिया सरकार गिर गई, ने चीन को अवसर दिया है। भारत ने डिफेंस बिल्डअप को ‘सुरक्षा उपाय’ बताया है, लेकिन पड़ोसी देशों में चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बेस गलतफहमी पैदा कर सकते हैं, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को बदल सकता है। चीन की बांग्लादेश में उपस्थिति से भारत की पूर्वी सीमा कमजोर हो सकती है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसका गठबंधन दो मोर्चों पर चुनौती पैदा करेगा। सीमांचल की मुस्लिम बहुल आबादी पहले से ही घुसपैठ के आरोपों से प्रभावित है, और सैन्य बनाने से स्थानीय तनाव बढ़ सकता है। आर्थिक रूप से, यह क्षेत्र निवेश से वंचित रह सकता है।
चुनौतियां और सुझाव
चुनौतियां मिसकैलकुलेशन का खतरा और क्षेत्रीय अस्थिरता। भारत को कूटनीति पर जोर देना चाहिए, जैसे बांग्लादेश के साथ बातचीत। अमेरिका के साथ साझेदारी मजबूत करने से संतुलन बनेगा।
निष्कर्ष: सतर्कता की जरूरत
पेंटागन की चेतावनी और भारत की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि सीमांचल क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति संवेदनशील है। किशनगंज में फॉरवर्ड बेस मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने से भारत तैयार है, लेकिन शांति के लिए संवाद आवश्यक है। यह घटना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया