2 फरवरी 2026, CBI का ‘ऑपरेशन CyStrike’: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ‘ऑपरेशन CyStrike’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत से संचालित कई ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क्स को ध्वस्त कर दिया। यह ऑपरेशन मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोगों को ठगने वाले संगठित गिरोहों पर केंद्रित था। 30 जनवरी 2026 को शुरू हुए इस अभियान में देशभर में 35 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें एक प्रमुख आरोपी की गिरफ्तारी हुई और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।
ऑपरेशन की शुरुआत और पृष्ठभूमि
CBI ने इंटरपोल के साथ मिलकर यह बहुराष्ट्रीय ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें अमेरिका की FBI, ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की कानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल रहीं। ऑपरेशन का उद्देश्य उन संगठित अपराध नेटवर्क्स को खत्म करना था जो तकनीक का इस्तेमाल कर वित्तीय धोखाधड़ी कर रहे थे। ये गिरोह मुख्य रूप से टेक सपोर्ट स्कैम, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और अन्य साइबर-enabled फाइनेंशियल क्राइम्स में लिप्त थे।
छापेमारी 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई, जिनमें नई दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना आदि शामिल हैं। कुल 35 लोकेशंस पर एक साथ एक्शन लिया गया, जो इन नेटवर्क्स के हॉटस्पॉट्स थे। CBI के अनुसार, ये नेटवर्क भारत से संचालित होकर विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहे थे, जिसमें लाखों-करोड़ों की ठगी शामिल थी।
गिरफ्तारियां और जब्ती
ऑपरेशन में एक प्रमुख आरोपी पीटर को गिरफ्तार किया गया, जो इन नेटवर्क्स का किंगपिन माना जा रहा है। इसके अलावा कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, स्क्रिप्ट्स और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। CBI ने एक अन्य नेटवर्क को भी ध्वस्त किया, जो नई दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक से संचालित हो रहा था।
ये गिरोह फर्जी कॉल सेंटर्स चलाते थे, जहां विदेशी नागरिकों को फोन करके तकनीकी सहायता के नाम पर या निवेश के लालच में ठगा जाता था। कुछ मामलों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर पीड़ितों को डराया-धमकाया जाता था।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका
यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। इंटरपोल ने सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, जबकि FBI और अन्य एजेंसियों ने विदेशी पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर इनपुट दिए। CBI प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे अपराध सीमाओं से परे हैं, इसलिए वैश्विक स्तर पर समन्वय जरूरी है। इस कार्रवाई से न केवल भारत में चल रहे फ्रॉड सेंटर्स बंद हुए, बल्कि विदेशी नागरिकों को आगे की ठगी से बचाया जा सकेगा।
मानवीय और आर्थिक प्रभाव
साइबर फ्रॉड के कारण हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है। ये गिरोह अक्सर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जिनमें बुजुर्ग और कम जागरूक लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऑपरेशन CyStrike से कई पीड़ितों को राहत मिलेगी, क्योंकि जब्त डेटा से आगे की रिकवरी और जांच संभव होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत साइबर क्राइम का हब बनता जा रहा था, और यह कार्रवाई देश की छवि सुधारने में मदद करेगी।
प्रतिक्रियाएं और भविष्य की योजनाएं
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस ऑपरेशन की सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी CBI को बधाई दी। विपक्ष ने हालांकि सरकार से पूछा कि ऐसे नेटवर्क्स इतने लंबे समय तक कैसे फल-फूल रहे थे। CBI ने आश्वासन दिया कि जांच जारी रहेगी और और गिरफ्तारियां होंगी। ‘ऑपरेशन CyStrike’ साइबर अपराधों के खिलाफ भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों को सजा दिलाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसे नेटवर्क्स को रोकने में भी मदद करेगी। नागरिकों से अपील है कि वे संदिग्ध कॉल्स या मैसेज पर सतर्क रहें और तुरंत शिकायत दर्ज करें।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स