CAG report Serious irregularities exposed in Ayushman Bharat and other schemes in BiharCAG report Serious irregularities exposed in Ayushman Bharat and other schemes in Bihar

27 फरवरी 2026,CAG रिपोर्ट, बिहार में आयुष्मान भारत और अन्य योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं उजागर: बिहार में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं – आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) – के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां और अनियमितताएं सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट नंबर 4 ऑफ 2025 (वर्ष 2025 के लिए प्रदर्शन ऑडिट), जो 26 फरवरी 2026 को बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा रखी गई, ने इन योजनाओं में कई स्तरों पर लापरवाही, डेटा में गड़बड़ी और लाभार्थियों को वंचित करने के मामले उजागर किए हैं। रिपोर्ट का ऑडिट पीरियड 31 मार्च 2025 तक का है, लेकिन इसके निष्कर्ष बिहार की स्वास्थ्य और आवास योजनाओं पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में प्रमुख अनियमितताएं

AB-PMJAY का उद्देश्य गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना है। बिहार में योजना का लक्ष्य 6.18 करोड़ लाभार्थियों को कवर करना था (जनवरी 2022 में संशोधित), लेकिन मार्च 2024 तक केवल 2.56 करोड़ (लगभग 41%) लाभार्थियों का ही सत्यापन हुआ। CAG ने पाया कि:

  • 595 गांव पूरी तरह वंचित: राज्य के कम से कम 595 गांवों में कोई भी आयुष्मान कार्ड जारी नहीं हुआ, जिससे इन क्षेत्रों के निवासी योजना के लाभ से वंचित रहे। pmjay.gov पोर्टल पर इन गांवों का डेटा उपलब्ध नहीं था, और बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति (BSSS) ने ऑडिटर्स को अपडेटेड जानकारी नहीं दी।
  • जागरूकता और प्रक्रियागत बाधाएं: योजना की जागरूकता कम होने और प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण पात्र मरीजों को इलाज से वंचित होना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि कमजोर जागरूकता अभियान और प्रक्रियाओं ने योजना की पहुंच को सीमित किया।
  • प्री-ऑथराइजेशन में बड़े रिजेक्शन: कुल 14,015 प्री-ऑथराइजेशन रिजेक्ट हुए, जिनमें से 8,371 (लगभग 60%) मामलों में 12.20 करोड़ रुपये की राशि प्री-ऑथराइजेशन पैनल डॉक्टर्स (PPD) द्वारा रिजेक्ट की गई। कारणों में प्री-ऑथराइजेशन में देरी, गलत ट्रीटमेंट पैकेज का चयन और PMAM/MEDCO द्वारा उठाए गए सवालों का अनुपालन न करना शामिल था। इससे कई मरीजों को योजना के तहत इलाज नहीं मिल सका।

ये खामियां योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाती हैं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पहले से ही सीमित है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) में अनियमितताएं

PMAY-G का लक्ष्य ग्रामीण गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है। CAG ने बिहार में योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं पाईं:

  • अयोग्य लाभार्थियों को मंजूरी: कुछ मामलों में नाबालिग बच्चों को पक्के मकान स्वीकृत किए गए, जो नियमों के विरुद्ध है।
  • गलत जियो-टैगिंग: तीन मामलों में मकानों की लोकेशन गलत जियो-टैग की गई – एक दिल्ली में और दूसरा झारखंड में। इससे फर्जी निर्माण या फंड के दुरुपयोग का संदेह बढ़ता है।
  • अन्य गड़बड़ियां: रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मकान एक दिन में ही बनाए गए दिखाए गए, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। ये मामले योजना में मॉनिटरिंग और सत्यापन की कमी को दर्शाते हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव

रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। आरजेडी और कांग्रेस ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की मिलीभगत से योजनाओं का दुरुपयोग हो रहा है। भाजपा और जेडीयू ने कहा कि CAG की सिफारिशों पर कार्रवाई होगी और खामियां दूर की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग ने कहा कि वे रिपोर्ट की जांच कर सुधारात्मक कदम उठाएंगे।

CAG ने सिफारिश की है कि:

  • लाभार्थी सत्यापन और जागरूकता अभियान तेज किए जाएं।
  • डेटा अपडेट और पोर्टल पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
  • प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
  • PMAY-G में जियो-टैगिंग और सत्यापन सख्त किया जाए।

यह CAG रिपोर्ट बिहार में केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में व्यवस्थागत कमजोरियों को उजागर करती है। लाखों गरीब परिवारों को स्वास्थ्य और आवास के लाभ से वंचित रखना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को तत्काल सुधार करने होंगे, अन्यथा ये योजनाएं केवल कागजी लाभ तक सीमित रह जाएंगी। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मॉनिटरिंग, डेटा प्रबंधन और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में सुधार जरूरी है।

Sources: हिंदुस्तान टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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