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1 जनवरी 2026, Kishanganj: नए साल की शुरुआत होते ही बिहार के Kishanganj जिले में पुलिस ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर कड़ा प्रहार किया है। गलगलिया थाना क्षेत्र के बालूबाड़ी इलाके में संयुक्त छापेमारी के दौरान दो महिलाओं समेत दो अंतरराज्यीय तस्करों को 205 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया गया। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख 20 हजार रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के नेटवर्क को झकझोरने वाली साबित हो रही है, जहां से नशीले पदार्थों का प्रवाह लगातार जारी रहता है।

गलगलिया थाना पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 41वीं बटालियन की संयुक्त टीम ने 31 दिसंबर 2025 की रात को गुप्त सूचना के आधार पर यह अभियान चलाया। सूचना मिली थी कि पश्चिम बंगाल से कुछ संदिग्ध व्यक्ति ब्राउन शुगर की खेप लेकर नेपाल सीमा के रास्ते किशनगंज पहुंचने वाले हैं। टीम ने भातगांव बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) के आसपास नाकाबंदी की और एक स्कूटी पर सवार संदिग्धों को रोक लिया। तलाशी लेने पर उनके कब्जे से प्लास्टिक पाउच में पैक 205 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई। गिरफ्तार तस्करों में एक महिला और एक अन्य महिला शामिल हैं, जो अंतरराज्यीय तस्करी रैकेट से जुड़ी बताई जा रही हैं।

थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई नए साल की पूर्व संध्या पर की गई, जब सीमा क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। “हमारी टीम को विश्वसनीय टिप-ऑफ मिली थी कि तस्कर नेपाल से होकर पश्चिम बंगाल की ओर लौटने वाले थे। छापेमारी के दौरान तस्करों ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम की तत्परता से उन्हें पकड़ लिया गया। जब्त ब्राउन शुगर की शुद्धता की जांच फॉरेंसिक लैब में कराई जा रही है, और तस्करों से पूछताछ में बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।” उन्होंने आगे कहा कि स्कूटी भी जब्त कर ली गई है, जो तस्करी के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। मामले में NDPS एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है, और गिरफ्तार आरोपियों को जल्द कोर्ट में पेश किया जाएगा।

यह घटना Kishanganj जिले के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है, जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण नशीले पदार्थों की तस्करी का हॉटस्पॉट बना हुआ है। किशनगंज नेपाल के विराटनगर से सटा हुआ है, जहां से हिरोइन, ब्राउन शुगर और अन्य ड्रग्स का अवैध व्यापार फल-फूल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राउन शुगर (जिसे स्मैक भी कहा जाता है) अफगानिस्तान से होकर नेपाल के रास्ते भारत में तस्करी की जाती है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4-5 हजार रुपये प्रति ग्राम होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह 3-4 हजार रुपये तक बिकती है। 205 ग्राम की यह खेप सैकड़ों युवाओं को नशे की गिरफ्त में झोंक सकती थी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं का इस कारोबार में शामिल होना एक नई रणनीति का संकेत देता है। तस्कर अक्सर महिलाओं को आगे रखकर सुरक्षा बलों की नजरों से बचने की कोशिश करते हैं, क्योंकि उन्हें कम संदिग्ध माना जाता है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान अभी गोपनीय रखी गई है, लेकिन प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि वे पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की रहने वाली हैं और पिछले छह महीनों से इस रैकेट में सक्रिय थीं। एक अन्य आरोपी भी बंगाल से ही जुड़ा बताया जा रहा है। SSB के कमांडेंट ने कहा कि सीमा पर ड्रोन सर्विलांस और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Kishanganj में ड्रग तस्करी की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले एक साल में यहां से 50 किलोग्राम से अधिक ब्राउन शुगर जब्त हो चुकी है, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय गिरोह शामिल पाए गए। 2025 में ही थाकुरगंज थाने ने 10 किलोग्राम हिरोइन के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया था। यह कारोबार न केवल युवाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि स्थानीय अपराध दर को भी बढ़ा रहा है। नशे के आदी युवा चोरी, लूट जैसे अपराधों में लिप्त हो जाते हैं, जिससे परिवार टूट रहे हैं। एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “सीमा जिले में स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशे का जाल फैल चुका है। ऐसी कार्रवाइयां सराहनीय हैं, लेकिन जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं।”

राज्य स्तर पर बिहार पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत ड्रग कंट्रोल पर विशेष फोकस किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है, जिसमें सीमा जिलों में अतिरिक्त फंड आवंटित किए गए हैं। Kishanganj SP मनोज कुमार ने बताया कि गलगलिया जैसी घटनाएं टीम वर्क का नतीजा हैं। “हम एसएसबी, कस्टम्स और स्थानीय इंटेलिजेंस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले महीनों में और बड़ी कार्रवाइयां होंगी।” उन्होंने अपील की कि नागरिक गुप्त सूचनाएं दें ताकि तस्करी का स्रोत सूख जाए।

इस गिरफ्तारी से न केवल स्थानीय स्तर पर राहत मिली है, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए संदेश है कि कानून का साया हर जगह है। ब्राउन शुगर जैसा घातक पदार्थ कैंसर, हृदय रोग और मानसिक विकारों का कारण बनता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 3 करोड़ से अधिक लोग नशे के शिकार हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत युवा हैं। किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में यह आंकड़ा और चिंताजनक है।

निष्कर्षतः यह कार्रवाई नशा मुक्ति के संकल्प को मजबूत करती है। पुलिस की तत्परता और जन सहयोग से ही हम एक नशा-मुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। गलगलिया थाना की इस सफलता पर स्थानीय लोगों ने सराहना की है, और उम्मीद है कि इससे प्रेरित होकर अन्य थाने भी सक्रिय होंगे। आगे की जांच में बड़े मास्टरमाइंड का पर्दाफाश हो सकता है, जो इस रैकेट को जड़ से उखाड़ फेंकेगा।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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