30 जनवरी 2026, Bihar में सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया पर सख्ती: बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 29-30 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में ‘बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026’ को मंजूरी दे दी गई। यह संशोधन 1976 की पुरानी बिहार सेवक आचार नियमावली में किया गया है, जिसमें डिजिटल युग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त दिशा-निर्देश जोड़े गए हैं। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
नए नियमों की मुख्य विशेषताएं
नई नियमावली में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट और विस्तृत प्रतिबंध लगाए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकेगा या चला सकेगा। यह नियम फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व ट्विटर), व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा। गुमनाम या छद्म नाम से अकाउंट चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर विशेष सख्ती बरती गई है। कार्यस्थल पर किसी भी तरह की रील, वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग करना वर्जित है। सरकारी बैठकों, सुनवाई या कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण व्यक्तिगत अकाउंट से नहीं किया जा सकेगा। अश्लील या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करना या शेयर करना गंभीर कदाचार माना जाएगा। इसके अलावा, भड़काऊ, असत्य या विवादास्पद सामग्री साझा करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी। कर्मचारियों को किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचने का निर्देश दिया गया है।
राजनीतिक गतिविधियों पर भी कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है। सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन के समर्थन में पोस्ट या कमेंट नहीं कर सकेंगे। सरकारी नीतियों, योजनाओं, निर्णयों या कार्यप्रणाली पर नकारात्मक टिप्पणी करना मना है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या किसी न्यायालय के फैसलों पर व्यक्तिगत राय देना भी प्रतिबंधित है। वरिष्ठ अधिकारियों या सरकारी संस्थानों की आलोचना करना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है। कोई भी गोपनीय दस्तावेज, फाइल, रिपोर्ट या आंतरिक चर्चा सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी। शिकायतकर्ताओं के संवाद या यौन पीड़ितों की पहचान उजागर करना पूर्ण रूप से वर्जित है। सरकारी पदनाम, आधिकारिक ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट के लिए नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया से किसी भी तरह का धनार्जन भी प्रतिबंधित है।
सरकार का तर्क और पृष्ठभूमि
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने बताया कि पुरानी नियमावली में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का अलग से उल्लेख नहीं था, लेकिन हाल के वर्षों में इनके दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर अनियंत्रित गतिविधियां प्रशासनिक अनुशासन को प्रभावित करती हैं, सरकारी छवि को धूमिल करती हैं और जनता में भ्रम पैदा करती हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल युग में सरकारी कर्मचारियों की ऑनलाइन गतिविधियां जिम्मेदार और मर्यादित होनी चाहिए। इससे प्रशासन की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनता का विश्वास मजबूत होगा।
यह संशोधन इंटरनेट मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जरूरी बताया गया है। कई मामलों में कर्मचारियों द्वारा रील्स बनाकर ‘स्टार’ बनने की कोशिश या विवादित पोस्ट करने की घटनाएं सामने आई थीं, जिन्हें ध्यान में रखकर ये नियम बनाए गए हैं।
उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
नियमों का उल्लंघन गंभीर कदाचार माना जाएगा और इसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई की प्रकृति उल्लंघन की गंभीरता पर निर्भर करेगी, जिसमें निलंबन या अन्य दंड शामिल हो सकते हैं। सभी विभागों को इन नियमों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभाव और आगे की राह
बिहार में करीब 5-6 लाख सरकारी कर्मचारी और अधिकारी हैं, जिन पर ये नियम सीधे लागू होंगे। शिक्षक, पुलिसकर्मी, क्लर्क से लेकर आईएएस अधिकारियों तक सभी प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियम अनुशासन बनाए रखने में मदद करेंगे, लेकिन कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश मान रहे हैं। कर्मचारी संघों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर बहस तेज हो सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने की छूट है, बशर्ते वह पेशेवर जिम्मेदारियों से टकराव न पैदा करे। यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है, जहां सोशल मीडिया के दुरुपयोग की शिकायतें बढ़ रही हैं।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह फैसला डिजिटल अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कर्मचारियों को अब सोशल मीडिया पर हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।
Sources: हिंदुस्तान