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3 जनवरी 2026, बिहार STF को बड़ी सफलता– बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है। भोजपुर जिले के कुख्यात अपराधी ठाकुर यादव, पर जिसके सिर पर 50 हजार रुपये का इनाम था, को झारखंड के रामगढ़ जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी 2 जनवरी 2026 को हुई, जो अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। ठाकुर यादव पिछले 14 महीनों से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, गोलीबारी, रंगदारी वसूली जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। STF की इस सफलता से भोजपुर जिले के सरैया गांव सहित आसपास के इलाकों में राहत की सांस ली गई है। इस रिपोर्ट में हम इस गिरफ्तारी की पूरी कहानी, अपराधी के अतीत, पुलिस की रणनीति और इसके व्यापक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो बिहार-झारखंड सीमा पर अपराध के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अपराधी का अपराधिक इतिहास: गोलीबारी से रंगदारी तक का सफर

ठाकुर यादव, असली नाम ठाकुर यादव, भोजपुर जिले के कृष्णागढ़ थाना क्षेत्र के सरैया गांव का निवासी है। 30 वर्षीय यह अपराधी बिहार के अपराध जगत में ‘ठाकुर भैया’ के नाम से कुख्यात था। उसके अपराधिक करियर की शुरुआत 2018 में हुई, जब उसने स्थानीय स्तर पर छोटी-मोटी चोरी और लूट की घटनाओं में हाथ आजमाया। लेकिन 2024 में मामला तूल पकड़ गया। 3 अक्टूबर 2024 को कृष्णागढ़ थाना कांड संख्या 106/24 में एक मॉल पर गोलीबारी के मामले में वह मुख्य आरोपी बना। इस घटना में उसने व्यापारियों को डराने के लिए अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें दो लोग घायल हो गए। इसके अलावा, उसके खिलाफ रंगदारी वसूली, हत्या के प्रयास और अवैध हथियार रखने के कुल 8 से अधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ठाकुर यादव ने भोजपुर-रोहतास सीमा पर कई व्यापारियों को धमकी दी और लाखों रुपये की रंगदारी वसूली। एक मामले में उसने एक स्थानीय ठेकेदार को गोली मारने की कोशिश की, लेकिन चमत्कारिक रूप से वह बच गया। भोजपुर SP इंद्रजीत कुमार ने बताया, “ठाकुर का गिरोह स्थानीय स्तर पर सक्रिय था, जो छोटे व्यापारियों को निशाना बनाता था। उसके फरार होने के बाद अपराध की घटनाएं कम हुईं, लेकिन अब पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।” ठाकुर के गिरोह में 4-5 सहयोगी थे, जिनमें से दो पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकुर का अपराधी बनना गरीबी और बेरोजगारी से प्रेरित था, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा ने उसे कुख्यात बना दिया।

गिरफ्तारी का ऑपरेशन: रामगढ़ में छापेमारी, हथियार बरामद

STF की यह कार्रवाई लंबी निगरानी का नतीजा थी। नवंबर 2025 से ही ठाकुर की लोकेशन पर नजर रखी जा रही थी। इंटेलिजेंस इनपुट्स से पता चला कि वह झारखंड के रामगढ़ जिले में छिपा हुआ है, जहां उसके रिश्तेदार रहते हैं। 2 जनवरी को STF की 8 सदस्यीय टीम, जिसमें DSP रैंक के अधिकारी शामिल थे, रामगढ़ पहुंची। स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक किराए के मकान पर छापेमारी की गई। ठाकुर को सोते हुए पकड़ा गया, और उसके पास से एक देशी पिस्तौल, 10 जिंदा कारतूस और नकदी बरामद हुई।

STF के ADG मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह ऑपरेशन बिहार-झारखंड पुलिस के समन्वय का परिणाम है। ठाकुर सीमा पार अपराध नेटवर्क का हिस्सा था, जो हथियारों की तस्करी भी करता था।” गिरफ्तारी के बाद उसे पटना लाया गया, जहां जेल रिमांड लिया जाएगा। रामगढ़ SP ने भी इस कार्रवाई की सराहना की, जो अंतरराज्यीय अपराध पर अंकुश लगाने का उदाहरण है। वीडियो फुटेज में ठाकुर को हथकड़ियों में ले जाते पुलिसकर्मी दिख रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

पुलिस की रणनीति: STF की बढ़ती प्रभावशीलता

बिहार STF का गठन 2020 में किया गया था, जो संगठित अपराध और फरार अपराधियों पर फोकस करता है। 2025 में STF ने 150 से अधिक कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया, जिसमें 20 इनामी शामिल थे। इस सफलता का श्रेय इंटेलिजेंस नेटवर्क और टेक्नोलॉजी को दिया जाता है। CM नीतीश कुमार ने STF को 100 करोड़ का अतिरिक्त बजट दिया, जिससे ड्रोन सर्विलांस और AI-बेस्ड ट्रैकिंग संभव हुई। भोजपुर SP ने कहा, “हमारी यूनिट ने 6 महीने की मेहनत के बाद यह नतीजा दिया। अब ठाकुर के सहयोगियों पर नजर है।”

इस गिरफ्तारी से STF की छवि मजबूत हुई है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बधाई दी, जबकि बीजेपी ने इसे ‘नीतीश सरकार की कड़ी नीति’ का प्रमाण बताया। लेकिन आलोचकों का कहना है कि अपराध की जड़ें गरीबी में हैं, इसलिए STF के साथ सामाजिक सुधार जरूरी।

प्रभाव और भविष्य: अपराध मुक्त बिहार की ओर कदम

ठाकुर यादव की गिरफ्तारी से भोजपुर के सरैया, कृष्णागढ़ और आसपास के गांवों में खुशी की लहर है। स्थानीय व्यापारियों ने राहत व्यक्त की, “अब रंगदारी का डर नहीं रहेगा।” यह घटना बिहार-झारखंड सीमा पर अपराध के प्रवाह को रोकने में मददगार साबित होगी। पुलिस ने ठाकुर के फोन रिकॉर्ड्स की जांच शुरू कर दी है, जो बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसे अपराधी अकेले नहीं होते। भोजपुर में अपराध दर 2025 में 15% घटी, लेकिन रंगदारी के मामले अभी भी चुनौती हैं। STF को और मजबूत करने की मांग उठ रही है। ठाकुर को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां हत्या प्रयास के मामले में सख्त सजा की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, यह गिरफ्तारी बिहार पुलिस की दृढ़ता का प्रतीक है। अपराध के खिलाफ जंग जारी है, और STF जैसी यूनिटें इसे मजबूत बना रही हैं। क्या यह बिहार को अपराध मुक्त बनाने का नया अध्याय साबित होगी? आने वाले दिनों में साफ होगा।

Sources: दैनिक जागरण, न्यूज़4नेशन

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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