Bihar Land SurveyBihar Land Survey

5 फरवरी 2026, Bihar विशेष भूमि सर्वेक्षण: बिहार में दशकों से लंबित भूमि विवादों को जड़ से खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण को किसी भी हाल में दो वर्षों में पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि 2027 तक पूरे बिहार के भूमि अभिलेख दुरुस्त हो जाएंगे और जमीन से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान निकल आएगा।

बुधवार को पटना स्थित विभागीय कार्यालय में विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा बैठक में विजय सिन्हा ने अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “सर्वे कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गलत रिपोर्टिंग, अनावश्यक देरी या त्रुटि पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और कड़ी कार्रवाई होगी।” उपमुख्यमंत्री ने सर्वे को मात्र औपचारिकता नहीं, बल्कि भूमि सुधार की ठोस बुनियाद बताया।

2011 से चली आ रही योजना को मिलेगी रफ्तार

यह विशेष भूमि सर्वेक्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी नींव 2011 में रखी गई थी। उस समय का उद्देश्य स्पष्ट था – ब्रिटिश काल के पुराने कैडेस्ट्रल सर्वेक्षण के बाद बदले हुए भू-स्वरूप को दर्ज करना, भूमि अभिलेखों को अद्यतन करना और रैयतों के मालिकाना हक को पारदर्शी बनाना। लेकिन तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी, कर्मियों की कमी और अन्य कारणों से कार्य धीमा रहा। अब विजय सिन्हा ने इसे “लास्ट चांस” बताते हुए 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

बैठक में प्रधान सचिव सी.के. अनिल, सचिव जय सिंह और भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की। शुरुआती चरण में मार्गदर्शिका अधिसूचना में देरी के कारण कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया तेज हो गई है।

सर्वे की वर्तमान स्थिति

  • प्रथम चरण (20 जिलों के 89 अंचलों में 5657 राजस्व ग्राम): हवाई सर्वे, ग्राम सभा और उद्घोषणा शत-प्रतिशत पूरी। किस्तवार कार्य 99.92%, खानापुरी 94.4%, प्रपत्र-6 का कार्य 79% गांवों में पूरा। 67% गांवों में प्रारूप अधिकार अभिलेख प्रकाशित, जबकि 31% में अंतिम अभिलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
  • द्वितीय चरण (36 जिलों के 444 अंचलों में 37,419 राजस्व ग्राम): हवाई सर्वे पूर्ण, 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त। प्रपत्र-5 का कार्य 98.81% पूरा। त्रि-सीमाना निर्धारण और ग्राम सीमा सत्यापन तेजी से चल रहा है।

सर्वे पूरा होने से क्या फायदा?

बिहार में भूमि विवादों की जड़ पुराने और गलत अभिलेख हैं। कोर्ट-कचहरी में लाखों मुकदमे इसी कारण लंबित हैं। विशेष सर्वेक्षण पूरा होने से:

  • भूमि का सटीक नक्शा और मालिकाना हक स्पष्ट होगा।
  • दाखिल-खारिज और म्यूटेशन की प्रक्रिया आसान व पारदर्शी बनेगी।
  • जमीन की धोखाधड़ी और अवैध कब्जे पर अंकुश लगेगा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी क्योंकि साफ रिकॉर्ड से बैंक लोन और निवेश आसान होगा।

सरकार का दावा है कि सर्वे के बाद आधार से लिंक जमाबंदी और ऑनलाइन सुविधाएं आम लोगों के लिए और सहज हो जाएंगी।

आम जनता से अपील

उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा, “यदि सर्वेक्षण में किसी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी नजर आए तो लिखित शिकायत विभाग में दर्ज कराएं। ऐसी हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होगी।” यह अपील इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्वे की सफलता जनता की भागीदारी पर निर्भर है। रैयतों की स्वघोषणा और ग्राम सभा में सक्रियता से ही सटीक रिकॉर्ड बन सकता है।

सुशासन की दिशा में मील का पत्थर

विजय कुमार सिन्हा का यह सख्त रुख बिहार में सुशासन की नई मिसाल है। लंबे समय से लंबित यह कार्य पूरा होने से न केवल जमीन विवाद खत्म होंगे, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। सभी जिलों के अधिकारियों को अब हर महीने प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। यदि यह लक्ष्य हासिल हुआ तो बिहार देश में भूमि सुधार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन जाएगा।

आइए, हम सब मिलकर इस महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करें ताकि हर रैयत को अपनी जमीन का साफ-सुथरा हक मिल सके।

Sources: न्यूज़4नेशन

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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