Bihar is now 'Naxal free'Bihar is now 'Naxal free'

9 फरवरी 2026, Bihar अब ‘नक्सल मुक्त’: आज बिहार के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा। मुंगेर जिले में भाकपा (माओवादी) के स्पेशल एरिया कमेटी के कमांडर और तीन लाख रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने 25 साल बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस सरेंडर के साथ ही बिहार पुलिस ने राज्य को पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ घोषित कर दिया। STF और मुंगेर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से यह सफलता हासिल हुई। सुरेश कोड़ा ने एक AK-47, एक AK-56, दो INSAS राइफल्स, 10 मैगजीन और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे। पुलिस मुख्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अब राज्य में कोई संगठित माओवादी गतिविधि नहीं बची है। यह घटना न केवल सुरक्षा बलों की जीत है, बल्कि बिहार के उन जिलों के लिए राहत है जो दशकों से नक्सली हिंसा से प्रभावित थे – जैसे मुंगेर, लखीसराय, जमुई और अन्य।

सुरेश कोड़ा कौन थे? सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम भाकपा (माओवादी) का एक हार्डकोर कमांडर था। वह मुंगेर डिविजन के स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का प्रमुख था और पिछले दो दशकों से मुंगेर, लखीसराय और जमुई के पहाड़ी इलाकों में सक्रिय रहा। उस पर 60 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें UAPA के तहत कई गंभीर आरोप शामिल थे। पुलिस के अनुसार, वह 15 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की हत्या में शामिल था और कई लूट, विस्फोट तथा हमलों का मास्टरमाइंड रहा।

2008 में उसका नाम पहली बार सामने आया था, जब उसने पुलिस हथियार लूटने की घटना में हिस्सा लिया। उसके बाद से वह भूमिगत हो गया और लगातार पुलिस के निशाने पर रहा। तीन लाख रुपये का इनाम उसके सिर पर था, लेकिन वह लगातार पुलिस की पहुंच से बाहर रहता था। हाल के वर्षों में बिहार पुलिस की सघन कार्रवाई और अन्य कमांडर्स के सरेंडर (जैसे दिसंबर 2025 में नारायण कोड़ा, बहादुर कोड़ा आदि) ने उसे अलग-थलग कर दिया। आखिरकार, 18 फरवरी 2026 को वह STF के सामने आया और हथियार रख दिए। सरेंडर के दौरान उसने तीन बार ‘STF जिंदाबाद’ के नारे लगाए और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई।

सरेंडर की प्रक्रिया और पुलिस की भूमिका सरेंडर मुंगेर में डीआईजी राकेश कुमार और STF अधिकारियों के सामने हुआ। बिहार पुलिस के डीजीपी (ऑपरेशंस) कुंदन कृष्णन ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह सरेंडर बिहार में संगठित नक्सलवाद के अंत का प्रतीक है। मुंगेर-जमुई-लखीसराय क्षेत्र में अब कोई हथियारबंद माओवादी दस्ता नहीं बचा।”

पुलिस ने बताया कि सुरेश कोड़ा को ‘आत्मसमर्पण सह पुनर्वास योजना’ (Surrender-cum-Rehabilitation Policy) के तहत लाभ मिलेगा। इसमें आर्थिक मदद, प्रशिक्षण, रोजगार और सुरक्षा शामिल है। उसके परिवार ने भी इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि वह अब सामान्य जीवन जीना चाहता है।

यह सफलता STF, मुंगेर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की लंबी मेहनत का नतीजा है। पिछले कुछ सालों में बिहार में नक्सली सरेंडर की संख्या बढ़ी है। दिसंबर 2025 में तीन कोड़ा परिवार के सदस्यों (नारायण, बहादुर, बिनो) ने भी सरेंडर किया था। केंद्र सरकार की 31 मार्च 2026 तक पूरे देश को नक्सल मुक्त करने की मुहिम में बिहार का यह कदम बड़ा योगदान है।

नक्सलवाद का बिहार में इतिहास बिहार में नक्सलवाद की शुरुआत 1960-70 के दशक में नक्सलबाड़ी आंदोलन से हुई। 1980-90 के दशक में यह चरम पर पहुंचा, जब माओवादी संगठन ग्रामीण इलाकों में ‘जन अदालतें’ चलाते थे, जमींदारों पर हमले करते थे और पुलिस स्टेशनों पर कब्जा करने की कोशिश करते थे। मुंगेर, जमुई, लखीसराय, गया, औरंगाबाद जैसे जिलों में हिंसा चरम पर थी।

हजारों लोगों की मौत हुई, जिसमें सुरक्षा कर्मी, आम नागरिक और नक्सली शामिल थे। पिछले 10-15 सालों में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति – ऑपरेशन, विकास कार्य, सरेंडर नीति और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं – ने नक्सल प्रभाव को काफी कम किया। 2024-25 में पुलिस ने दावा किया था कि 2025 तक बिहार नक्सल मुक्त होगा, और अब यह लक्ष्य हासिल हो गया।

प्रभाव और भविष्य इस सरेंडर से मुंगेर, लखीसराय और जमुई जैसे जिलों में स्थानीय लोग राहत महसूस कर रहे हैं। विकास कार्य अब बिना डर के हो सकेंगे। सड़कें, स्कूल, अस्पताल और रोजगार योजनाएं तेजी से लागू होंगी।

हालांकि, पुलिस ने चेतावनी दी है कि कुछ छिटपुट घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन संगठित नक्सलवाद खत्म हो चुका है। केंद्र सरकार ने बिहार को मध्य प्रदेश के बाद दूसरा बड़ा राज्य बताया जहां नक्सलवाद का अंत हुआ है।

CM नीतीश कुमार और डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा ने इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि अब बिहार विकास की नई राह पर है।

सुरेश कोड़ा का सरेंडर बिहार के लिए एक मील का पत्थर है। 25 साल की भूमिगत जिंदगी, हिंसा और डर के बाद मुख्यधारा में लौटना कई अन्य नक्सलियों के लिए प्रेरणा बनेगा। बिहार अब नक्सल मुक्त होने का दावा करता है – यह सुरक्षा बलों, सरकार की नीतियों और सरेंडर करने वालों की साझा जीत है। राज्य अब शांति और विकास पर फोकस कर सकता है।

Sources: जनसत्ता

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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