26 दिसंबर 2025, Bihar: Bihar की नीतीश कुमार सरकार ने सरकारी शिक्षकों के लिए एक नया और कड़ा नियम लागू किया है। शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी चल एवं अचल संपत्ति के साथ-साथ वित्तीय दायित्वों का विस्तृत विवरण 31 दिसंबर तक जमा करें। इसकी अवहेलना करने पर जनवरी 2026 का वेतन पूरी तरह रोक दिया जाएगा। यह आदेश पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जारी किया गया है, लेकिन शिक्षक संगठनों में इससे असंतोष की लहर दौड़ गई है। विभाग के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जो राज्य के लाखों शिक्षकों को प्रभावित करेगा।
शिक्षा विभाग ने 25 दिसंबर को जारी पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संपत्ति विवरण A-4 साइज के सादे कागज पर कंप्यूटर पर टंकित होकर जमा करना अनिवार्य होगा। इसमें भूमि, भवन, वाहन, बैंक बैलेंस, शेयर, म्यूचुअल फंड, ऋण और अन्य दायित्वों का पूरा ब्योरा शामिल है। यह विवरण 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए, ताकि वर्षांत तक शिक्षकों की वित्तीय स्थिति का सटीक आकलन हो सके। विभागीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि समय सीमा के बाद कोई छूट नहीं दी जाएगी, और वेतन भुगतान प्रक्रिया में यह पहली शर्त होगी। बिहार में लगभग 3.5 लाख सरकारी शिक्षक हैं, जिनमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के सभी श्रेणी के शिक्षक शामिल हैं। प्रधानाध्यापकों को भी यह नियम लागू होगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में कार्यरत शिक्षकों को विशेष कठिनाई हो सकती है।
आदेश का बैकग्राउंड: पारदर्शिता की दिशा में कदम
यह आदेश Bihar सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जो पिछले दो वर्षों से तेज हो रहा है। 2023 में ही विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया था, लेकिन संपत्ति घोषणा का यह पहला ऐसा व्यापक प्रयास है। राज्य के मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने हाल ही में एक बैठक में कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति पर नजर रखना आवश्यक है, ताकि अवैध स्रोतों से अर्जित धन को रोका जा सके। शिक्षा विभाग के अपर सचिव संजय कुमार ने पत्र में उल्लेख किया कि यह प्रक्रिया केंद्रीय सूचना आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जहां सार्वजनिक सेवकों को वार्षिक संपत्ति विवरण जमा करना पड़ता है। लेकिन Bihar में यह पहली बार वेतन से जोड़कर लागू किया गया है, जो सख्ती का संकेत देता है।
पिछले वर्षों में Bihar शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। TET-STET घोटाले और शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं के बाद सरकार ने सफाई अभियान चलाया। 2024 में 1.7 लाख शिक्षकों की बहाली के बाद विभाग पर दबाव बढ़ा, और अब यह कदम उनमें से कुछ को निशाना बनाने का प्रयास लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह RTI कार्यकर्ताओं की मांगों का नतीजा है, जिन्होंने शिक्षकों की संपत्ति पर सवाल उठाए थे। हालांकि, विभाग का दावा है कि यह नियम सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू होगा, न कि किसी विशेष वर्ग को लक्षित करने के लिए।
शिक्षकों में हड़कंप: चुनौतियां और प्रतिक्रियाएं
आदेश जारी होते ही शिक्षक समुदाय में हड़कंप मच गया। Bihar राज्य शिक्षक संघ के अध्यक्ष राधाकृष्ण सिंह ने कहा, “यह अच्छी पहल है, लेकिन समय सीमा बहुत कम है। ग्रामीण शिक्षकों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा नहीं, ऐसे में वे कैसे 31 दिसंबर तक विवरण जमा करेंगे?” पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे जिलों में शिक्षक संगठनों ने आपात बैठकें बुलाईं। कुछ ने इसे “अनावश्यक उत्पीड़न” करार दिया, जबकि अन्य ने इसे पारदर्शिता का स्वागत योग्य कदम बताया। एक शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारी सैलरी पहले से ही कम है, अब यह अतिरिक्त बोझ। अगर दस्तावेज गुम हैं तो क्या होगा?”
विभाग ने स्पष्ट किया है कि विवरण जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा, और ऑनलाइन पोर्टल का विकल्प भी जल्द उपलब्ध होगा। लेकिन ठंड और छुट्टियों के बीच यह प्रक्रिया जटिल साबित हो रही है। विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। RJD नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “नीतीश सरकार शिक्षकों को डरा रही है, जबकि असली भ्रष्टाचार तो ऊपर है।” वहीं, BJP ने इसे सरकार की पारदर्शिता नीति की सराहना की। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि समय सीमा बढ़ाई जाए और प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएं। यदि लाखों शिक्षक समय पर विवरण नहीं जमा पाते, तो जनवरी में वेतन संकट उत्पन्न हो सकता है, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेगा।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह आदेश न केवल शिक्षा विभाग बल्कि पूरे प्रशासन पर असर डालेगा। यदि सफल रहा, तो अन्य विभागों में भी इसे लागू किया जा सकता है। आर्थिक रूप से, यह भ्रष्टाचार रोकने में मददगार होगा, क्योंकि संपत्ति विवरण से अवैध आय का पता लगाना आसान हो जाएगा। लेकिन असफल होने पर शिक्षकों का असंतोष बढ़ेगा, जो पहले से ही वेतन वृद्धि और पेंशन की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञ प्रो. अनिल सदागोपन कहते हैं, “यह डिजिटल इंडिया के अनुरूप है, लेकिन ग्रामीण Bihar में जमीनी चुनौतियां हैं। सरकार को सहायता प्रदान करनी चाहिए।”
कुल मिलाकर, यह फरमान बिहार की शिक्षा प्रणाली में सुधार का संकेत है, लेकिन कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा। शिक्षकों को अब दौड़-भाग शुरू करनी होगी, वरना नया साल कड़वा साबित हो सकता है। सरकार को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया को सरल बनाए, ताकि शिक्षा का मूल उद्देश्य—बच्चों का भविष्य—प्रभावित न हो। Bihar अब देख रहा है कि यह कदम वास्तव में पारदर्शिता लाएगा या सिर्फ कागजी कार्रवाई साबित होगा।
Sources: नव भारत टाइम्स