Bihar Assembly Election Funding DisclosureBihar Assembly Election Funding Disclosure

11 मार्च 2026, Bihar विधानसभा चुनाव फंडिंग खुलासा: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों द्वारा किए गए खर्च और फंडिंग का हालिया खुलासा राजनीतिक गलियारों में गरमा-गरमी पैदा कर रहा है। चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्टों से पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार चुनाव में कुल 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि कांग्रेस ने 35.07 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया। यह आंकड़े हाल ही में सार्वजनिक हुए हैं, जब चुनाव परिणाम आने के करीब चार महीने बाद दलों ने अपना लेखा-जोखा चुनाव आयोग को जमा किया।

यह खुलासा खासतौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के कुल फंड और खर्च के अनुपात में बड़ा अंतर दिखाई देता है। BJP ने अपनी कुल जमा पूंजी (फंड) का महज 2% हिस्सा बिहार चुनाव में खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने अपनी कुल पूंजी का 28% खर्च कर दिया। इससे BJP की वित्तीय मजबूती और कांग्रेस की तुलनात्मक कमजोरी साफ नजर आती है।

BJP का खर्च विवरण

BJP की रिपोर्ट 10 फरवरी 2026 को चुनाव आयोग को सौंपी गई थी। पार्टी ने कुल 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से सबसे बड़ा हिस्सा सामान्य पार्टी प्रचार (general party propaganda) पर गया। इसमें शामिल हैं:

  • प्रचार और विज्ञापन: 43.53 करोड़ रुपये (जिसमें Google India को 14.27 करोड़ का भुगतान प्रमुख था)।
  • स्टार कैंपेनर्स का यात्रा खर्च: 37.28 करोड़ रुपये।
  • अन्य नेताओं की यात्रा: 4.44 करोड़ रुपये (केंद्रीय स्तर से)।
  • कुल मिलाकर प्रचार मद में 117 करोड़ रुपये खर्च हुए।
  • उम्मीदवारों से संबंधित खर्च: 29.71 करोड़ रुपये।

चुनाव समाप्त होने के बाद BJP का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जहां बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में भी कुल फंड का छोटा सा हिस्सा ही खर्च हुआ।

कांग्रेस का खर्च विवरण

कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें प्रमुख मद थे:

  • स्टार कैंपेनर्स की यात्रा: 12.83 करोड़ रुपये।
  • सोशल मीडिया कैंपेन: 11.24 करोड़ रुपये।
  • अन्य प्रचार और उम्मीदवार सहायता।

चुनाव के बाद कांग्रेस का क्लोजिंग बैलेंस घटकर 89.13 करोड़ रुपये रह गया। यह BJP की तुलना में काफी कम है और पार्टी की वित्तीय चुनौतियों को उजागर करता है। बिहार चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन के तहत सीमित सीटों पर फोकस किया था, लेकिन खर्च का अनुपात कुल फंड के सापेक्ष ज्यादा होने से पार्टी पर दबाव बढ़ा है।

अन्य दलों का संक्षिप्त उल्लेख

रिपोर्टों में अन्य दलों के आंकड़े भी सामने आए हैं, हालांकि सभी दलों की रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं हैं:

  • CPI(M) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए।
  • BSP ने 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए।
  • RJD और JD(U) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के विस्तृत आंकड़े अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं या सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

विपक्ष का आरोप: पारदर्शिता की कमी

इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने BJP पर फंडिंग में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि BJP की कुल संपत्ति और खर्च का अनुपात देखते हुए पार्टी बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट फंडिंग और अन्य स्रोतों से धन जुटाती है, लेकिन राज्य-स्तरीय चुनावों में कम खर्च दिखाकर जवाबदेही से बचती है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता दावा करते हैं कि BJP की वित्तीय ताकत चुनावी मैदान में असमानता पैदा करती है, क्योंकि छोटे दल या कम फंड वाली पार्टियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं।

विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग को दलों की कुल फंडिंग स्रोतों (जैसे इलेक्टोरल बॉन्ड्स के बाद की व्यवस्था) की और गहन जांच करनी चाहिए। हालांकि, BJP का पक्ष है कि पार्टी ने सभी नियमों का पालन किया है और खर्च रिपोर्ट पूरी तरह पारदर्शी है। पार्टी का कहना है कि उसकी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत संगठन और डिजिटल प्रचार रणनीति के कारण राज्य-स्तरीय खर्च कम रहता है।

राजनीतिक संदर्भ

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA (BJP-JD(U) गठबंधन) ने बड़ी जीत हासिल की थी, जिसमें BJP ने 89 सीटें जीतीं। महागठबंधन (RJD-Congress-Left) को महज 34 सीटें मिलीं, जिसमें कांग्रेस को केवल 6 सीटें प्राप्त हुईं। इस जीत के बाद फंडिंग खुलासा विपक्ष के लिए नई बहस का मुद्दा बन गया है।

यह मामला भारतीय राजनीति में बड़े सवाल उठाता है: क्या वित्तीय संसाधनों का असमान वितरण लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है? क्या पार्टियों को अपनी कुल फंडिंग का ज्यादा प्रतिशत चुनावों में खर्च करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए? या फिर राष्ट्रीय पार्टियां राज्य चुनावों में कम खर्च करके रणनीतिक फायदा उठाती हैं?

चुनाव आयोग की रिपोर्टें लोकतंत्र में पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि फंडिंग स्रोतों की पूरी जानकारी (जैसे दानकर्ताओं के नाम) सार्वजनिक करने से और बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित हो सकती है। फिलहाल, यह खुलासा BJP की वित्तीय श्रेष्ठता और कांग्रेस की चुनौतियों को रेखांकित करता है, जो आने वाले चुनावों में दोनों दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

Sources: आज तक

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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