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17 दिसंबर 2025: बिहार के पूर्णिया जिले में Cyber Crime की दुनिया में एक बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। स्थानीय साइबर पुलिस और बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने एक 17 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जो प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के प्रमोशन, निजी डेटा चोरी और फर्जी क्रिप्टो एक्सचेंज के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। आरोपी के पास से करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी (लगभग 1.94 लाख अमेरिकी डॉलर) जब्त की गई है। यह गिरफ्तारी न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे बिहार में Cyber Crime के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जहां ग्रामीण युवा सोशल मीडिया और डिजिटल करेंसी के जाल में फंसकर अपराध की राह पकड़ लेते हैं।

इस मामले की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने महज तीन सालों में करीब 1.60 करोड़ रुपये की कमाई की, जो मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन से हुई। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि उसके साथी अभी फरार हैं। आइए, इस सनसनीखेज घटना की पूरी रिपोर्ट पर नजर डालें।

आरोपी का बैकग्राउंड: राजमिस्त्री के बेटे से साइबर ‘किंगपिन’ तक

आरोपी का नाम राकेश कुमार मंडल (उर्फ राकेश मंडल) है, जो पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के डिमिया छतरजान पंचायत स्थित श्रीनगर सहनी टोला का निवासी है। वह दीपक मंडल का सबसे छोटा पुत्र है, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी—राकेश ने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की, और उसके भाई हरिश्चंद्र मंडल को भी मैट्रिक पूरा नहीं करा सके। लेकिन पिछले दो वर्षों में परिवार का जीवन उलट-पुलट हो गया। कच्चा मकान पक्का बन गया, महंगे गैजेट्स और वाहनों की चमक दिखने लगी। संदिग्ध लोग लग्जरी कारों से घर आते-जाते, जिससे गांववालों को शक हुआ।

राकेश ने दावा किया कि उसने ड्रीम11 जैसे फैंटेसी गेम्स में जीतकर यह सब कमाया, लेकिन सच्चाई कुछ और निकली। 2022 से वह टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर सक्रिय हो गया। उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे, जहां वह रील्स के जरिए युवाओं को लुभाता था। गांव में उसने करोड़ों की जमीनें खरीदीं और लोगों से दूरी बना ली। पुलिस पूछताछ में राकेश ने कबूल किया कि साइबर दुनिया में ‘आसान पैसा’ कमाने की लालच ने उसे अपराध की ओर धकेल दिया।

ठगी का जटिल जाल: गेमिंग ऐप्स से डेटा लीक तक

राकेश का अपराध तंत्र बेहद चालाकी भरा था, जो सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइट्स और क्रिप्टोकरेंसी का घालमेल था। मुख्य रूप से वह भारत में प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स—जैसे तिरंगा ऐप, कैसीनो गेम, डीआईयू विन और ‘द एक्ट पोर्नहब’—को प्रमोट करता था। 2024 से शुरू हुए इस धंधे में वह इंस्टाग्राम रील्स पर स्क्रीन रिकॉर्डिंग पोस्ट करता, जहां खिलाड़ियों को दिखाता कि कैसे ये ऐप्स ‘जल्दी अमीर’ बना सकते हैं। फॉलोअर्स ऐप्स डाउनलोड करते, और राकेश को कमीशन मिलता—सब क्रिप्टोकरेंसी में।

लेकिन ठगी यहीं नहीं रुकी। राकेश ने ‘प्रोक्सीआर्थ.ओआरजी’ नाम की फर्जी वेबसाइट बनाई, जहां कोई भी व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर डालता तो तुरंत उसका पूरा निजी डेटा (मुख्य नंबर, वैकल्पिक नंबर, ईमेल आदि) सामने आ जाता। यह डेटा ‘डीडीसी ग्रुप’ नाम के टेलीग्राम चैनल से खरीदा जाता, जो अवैध रूप से डेटा लीक करता था। चोरी का डेटा इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर बेचा जाता, और भुगतान क्रिप्टो में लिया जाता। एक खास ऐप के जरिए, नंबर डायल करने पर OTP तुरंत आ जाता, जिसका इस्तेमाल अन्य स्कैम्स (जैसे बैंक फ्रॉड) में होता।

राकेश और उसके साथी रौनक (मोतिहारी निवासी) ‘कल्क.एफआई’ नाम का फर्जी क्रिप्टो एक्सचेंज ऐप विकसित कर रहे थे, जो निवेशकों को लुभाकर उनके पैसे लूटने वाला था। कमाई को पूर्वी चंपारण के रोहन कुमार के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता, जहां से एटीएम कार्ड के जरिए नकद निकाला जाता। तीन सालों में इस नेटवर्क ने सैकड़ों लोगों को शिकार बनाया, खासकर ग्रामीण युवाओं को।

पुलिस कार्रवाई: छापेमारी से गिरफ्तारी तक

यह खुलासा सेंट्रल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड सर्टिफिकेशन अथॉरिटी (CERT-In) की रिपोर्ट से हुआ, जो साइबर वर्ल्ड की संवेदनशील सामग्री की निगरानी करती है। पुलिस मुख्यालय को गुप्त सूचना मिली कि पूर्णिया में एक बड़ा डेटा लीक नेटवर्क सक्रिय है। एसटीएफ पटना, इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (ईओयू) और पूर्णिया साइबर थाना की संयुक्त टीम ने 16 दिसंबर को आरोपी के घर पर छापा मारा।

छापेमारी में राकेश को मौके से गिरफ्तार किया गया। उसके घर से 9 मोबाइल फोन (जिनमें ज्यादातर एप्पल के), एक एप्पल टैब, मैकबुक, लैपटॉप, विभिन्न बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड्स और 2.80 लाख रुपये नकद बरामद हुए। क्रिप्टो वॉलेट्स (ट्रस्ट वॉलेट सहित) से 87,809 अमेरिकी डॉलर सीधे जब्त हुए, जबकि कुल वॉलेट्स में 1,94,670 डॉलर (करीब 1.60 करोड़ रुपये) थे। अपर पुलिस अधीक्षक आलोक रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 24 घंटे की गहन पूछताछ में राकेश ने सारे राज खोले। उसके पिता दीपक और भाई हरिश्चंद्र से भी पूछताछ की गई।

प्राथमिकी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बेनामी संपत्ति अधिनियम 2019, अनियमित जमा योजना निषेध अधिनियम और भारतीय दूरसंचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई। मामला डेटा लीक, निजी डेटा बिक्री, गोपनीयता उल्लंघन, प्रतिबंधित ऐप्स प्रमोशन और फर्जी वेबसाइट्स से अवैध कमाई से जुड़ा है।

जांच के निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और फरार साथी

पूछताछ में सामने आया कि राकेश का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला था—डेटा विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर बेचा जाता, और क्रिप्टो लेन-देन अनट्रेसेबल तरीके से होते। एक साल में 2 लाख डॉलर की कमाई हुई, जो मुख्य रूप से युवा निवेशकों से लूटी गई। साथी रोहन (पूर्वी चंपारण) और रौनक (मोतिहारी) फरार हैं, जिनके बैंक खाते इस्तेमाल हुए। पुलिस अब इनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। एसटीएफ का कहना है कि जांच ‘शर्ट-इन’ एजेंसी की रिपोर्ट पर आधारित है, और क्रिप्टो स्रोतों की ट्रेसिंग जारी है।

व्यापक प्रभाव: बिहार में साइबर क्राइम का बढ़ता खतरा

यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में साइबर अपराध के विस्तार को दर्शाती है। पूर्णिया जैसे सीमांचल क्षेत्र में इंटरनेट पहुंच बढ़ी है, लेकिन जागरूकता की कमी युवाओं को शिकार बना रही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधित गेमिंग ऐप्स और क्रिप्टो स्कैम्स से सालाना अरबों रुपये का नुकसान हो रहा। CERT-In की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में डेटा लीक के 50% मामले बिहार-यूपी से जुड़े हैं। सरकार को स्कूलों में साइबर शिक्षा अनिवार्य करने और क्रिप्टो रेगुलेशन सख्त करने की जरूरत है।

पूर्णिया एसपी मनीष ने अपील की: “युवा आसान कमाई के चक्कर में न फंसें। साइबर थाना पर शिकायत करें।” यह गिरफ्तारी सैकड़ों पीड़ितों के लिए न्याय का द्वार खोलेगी।

निष्कर्ष: न्याय की दिशा में एक कदम

राकेश की गिरफ्तारी Cyber Crime के खिलाफ पुलिस की दृढ़ता का प्रतीक है, लेकिन यह अंत नहीं। फरार आरोपी पकड़े जाएंगे, और नेटवर्क उजागर होगा। बिहार सरकार को अब डिजिटल साक्षरता अभियान तेज करना होगा, ताकि ऐसे ‘किंगपिन’ न बनें। यह मामला हमें सतर्क करता है—डिजिटल दुनिया की चमक के पीछे अंधेरा छिपा हो सकता है।

By SHAHID

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