25 दिसंबर 2025, IIT: भारतीय उच्च शिक्षा की वैश्विक ख्याति अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रही है। भूटान और मोरक्को जैसे देशों ने भारत सरकार से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के ऑफशोर कैंपस स्थापित करने की औपचारिक मांग की है। यह कदम न केवल भारत की ‘एजुकेशन हब’ बनने की महत्वाकांक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण एशिया और अफ्रीका में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा का प्रसार भी सुनिश्चित करेगा। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कई अन्य देशों ने भी इसी तरह की रुचि जताई है, जो भारत की ‘नॉलेज सुपरपावर’ की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
यह मांग हाल ही में शिक्षा मंत्रालय को प्राप्त हुई है, जहां भूटान और मोरक्को के प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। भूटान, जो भारत का सबसे करीबी पड़ोसी है, लंबे समय से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की इच्छा रखता रहा है। थिम्पू सरकार का मानना है कि IIT कैंपस स्थापना से उसके युवाओं को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग शिक्षा मिलेगी, बिना विदेश जाने के खर्च का बोझ उठाए। इसी तरह, मोरक्को—उत्तरी अफ्रीका का एक उभरता हुआ आर्थिक केंद्र—अपने ‘अफ्रीका हब’ बनने के सपने को साकार करने के लिए भारतीय विशेषज्ञता की तलाश में है। रबात प्रशासन ने जोर दिया है कि IIT कैंपस से स्थानीय उद्योगों को कुशल मानव संसाधन मिलेगा, जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को प्राप्त करने में सहायक होगा।
भारत सरकार ने पहले ही इस दिशा में कदम उठाए हैं। 2024 में IIT मद्रास ने तंजानिया के जंजीबार में अपना पहला ऑफशोर कैंपस शुरू किया, जो कंप्यूटर साइंस और डेटा साइंस पर केंद्रित है। इसी वर्ष आईआईटी दिल्ली ने अबू धाबी (यूएई) में कैंपस की नींव रखी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिन्यूएबल एनर्जी कोर्सेस पर फोकस है। ये पहल ‘नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020’ के तहत हैं, जो उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को प्रोत्साहित करती है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में संसद में कहा था कि भारत 2030 तक 10 विदेशी कैंपस स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे 50,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र लाभान्वित होंगे। भूटान और मोरक्को की मांग इसी रोडमैप का हिस्सा बन सकती है।
भूटान के संदर्भ में यह प्रस्ताव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हिमालयी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से जलविद्युत और पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन युवा बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है। आईआईटी कैंपस से भूटानी छात्रों को AI, बायोटेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसी उन्नत शिक्षा मिलेगी, जो ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ मॉडल को मजबूत करेगी। भारत-भूटान संबंधों को देखते हुए, यह कैंपस थिम्पू के पास पुंट्सांगछू या परो हाइड्रोप्रोजेक्ट्स जैसे संयुक्त प्रोजेक्ट्स के लिए कुशल इंजीनियर तैयार करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सीमा सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ेगा। मोरक्को की बात करें तो, वह अफ्रीकी संघ का प्रमुख सदस्य है और ग्रीन एनर्जी में निवेश कर रहा है। IIT कैंपस कैसाब्लांका या रबात में स्थापित होने पर, यह अफ्रीकी छात्रों के लिए एक केंद्र बनेगा, जो भारत-अफ्रीका फोरम (IAF) को नई गति देगा।
सरकार की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने PTI को बताया, “हमने कई देशों से IIT के ऑफशोर कैंपस के लिए अनुरोध प्राप्त किए हैं, जिनमें भूटान और मोरक्को प्रमुख हैं। मंत्रालय इन प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है, जिसमें वित्तीय व्यवहार्यता, पाठ्यक्रम अनुकूलन और स्थानीय साझेदारी शामिल है।” यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ को ‘एजुकेट इन इंडिया’ से जोड़ता है, जहां IIT ब्रांड की वैश्विक पहुंच से भारत को विदेशी मुद्रा कमाने का अवसर मिलेगा। अनुमान है कि प्रत्येक कैंपस से सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व अर्जित हो सकता है। हालांकि, चुनौतियां भी हैं—जैसे सांस्कृतिक अनुकूलन, वीजा नियम और गुणवत्ता नियंत्रण। IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रो. सुब्रह्मण्यम ने कहा, “ऑफशोर कैंपस सफल होने के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम डिजाइन जरूरी है, वरना ब्रांड की छवि प्रभावित हो सकती है।”
यह विकास भारत की वैश्विक शिक्षा रणनीति का हिस्सा है। यूएस, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शिक्षा निर्यात से अरबों डॉलर कमाते हैं, जबकि भारत अभी प्रारंभिक चरण में है। NEP 2020 के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों को 50% अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने का लक्ष्य दिया गया है। भूटान और मोरक्को जैसे सहयोगी देशों के साथ साझेदारी से ‘सॉफ्ट पावर’ बढ़ेगी। उदाहरणस्वरूप, जंजीबार कैंपस में पहले ही 200 से अधिक छात्र नामांकित हैं, जिनमें 70% अफ्रीकी हैं। इसी तरह, अबू धाबी कैंपस मिडिल ईस्ट में भारतीय डिप्लोमेसी को मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये कैंपस साकार होते हैं, तो 2030 तक भारत एशिया का प्रमुख शिक्षा निर्यातक बन सकता है।
हालांकि, कुछ आलोचक चिंता जता रहे हैं। विपक्षी नेता ने संसद में सवाल उठाया कि क्या ये कैंपस भारतीय छात्रों की सीटों पर असर डालेंगे? शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऑफशोर कैंपस अलग से फंडेड होंगे। भूटान में कैंपस स्थापना से भारत-भूटान सीमा क्षेत्र में विकास होगा, जबकि मोरक्को में यह अफ्रीकी बाजार के लिए गेटवे बनेगा। कुल मिलाकर, यह मांग भारतीय शिक्षा की विजय है।
क्या भारत इन अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई करेगा? मंत्रालय ने कहा कि अगले कुछ महीनों में फैसला होगा। यह न केवल भूटान और मोरक्को के युवाओं के सपनों को पंख देगा, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाएगा। शिक्षा का यह विस्तार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार करेगा, जहां ज्ञान की कोई सीमा नहीं।
Sources: एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस