10 दिसंबर 2025: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठी पहल की। सोमवार (8 दिसंबर) को श्रीमंत शंकरदेव कालाक्षेत्र में आयोजित समारोह में उन्होंने हायर सेकेंडरी परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले 11,250 छात्रों को स्कूटर वितरित किए। यह वितरण डॉ. बनिकांता काकती मेरिट अवॉर्ड योजना के तहत किया गया, जो राज्य सरकार की शिक्षा उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाओं में से एक है। समारोह में शिक्षा मंत्री रणोज पेगू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। सरमा ने कहा, “ये स्कूटर न केवल छात्रों की उपलब्धि का सम्मान हैं, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देंगे। हमारा लक्ष्य है कि असम के युवा राष्ट्रीय स्तर पर चमकें।”
इस वर्ष योजना में मामूली बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण लाभार्थियों की संख्या घटकर 11,250 रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 48,673 थी। इनमें 6,860 लड़कियां और 4,390 लड़के शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017-18 से 2024-25 तक योजना के तहत कुल 1,86,442 छात्रों को स्कूटर प्रदान किए गए, जिस पर राज्य सरकार ने भारी निवेश किया। यह बदलाव योजना को अधिक लक्षित बनाने के लिए लाया गया, ताकि वास्तविक मेधावी छात्रों को प्राथमिकता मिले। सरमा ने जोर देकर कहा कि ये स्कूटर छात्रों को कॉलेज पहुंचने में सहायता करेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को सुलभ बनाएंगे। समारोह के दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनके भविष्य के सपनों को जाना। एक लाभार्थी छात्रा ने कहा, “यह स्कूटर मेरी मेहनत का फल है। अब मैं बिना किसी बाधा के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकूंगी।”
असम सरकार की यह योजना 2017 से चली आ रही है, जो लॉरेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और असम इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे संस्थानों से प्रेरित है। इसका उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को आर्थिक और परिवहन सहायता प्रदान करना है। पिछले वर्षों में योजना ने हजारों छात्रों को प्रेरित किया, जिससे असम में शिक्षा दर में सुधार हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर असम का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, और सरमा सरकार का दावा है कि यह योजना ‘निजुत मोइना’ (लड़कियों के लिए साइकिल योजना) की तरह सफल साबित हो रही है, जो अब पांच लाख से अधिक लड़कियों को कवर करती है। शिक्षा मंत्री पेगू ने कहा कि यह कदम राज्य के समग्र विकास का हिस्सा है, जहां शिक्षा पर बजट का बड़ा हिस्सा खर्च किया जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस पहल को सराहना मिल रही है, हालांकि कुछ विपक्षी दल इसे आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। कांग्रेस ने इसे “चुनावी स्टंट” करार दिया, लेकिन भाजपा ने इसे “युवा सशक्तिकरण” का उदाहरण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं ग्रामीण असम में ड्रॉपआउट दर को कम करेंगी और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देंगी। कुल मिलाकर, यह वितरण असम की शिक्षा नीति में एक सकारात्मक कदम है, जो मेधा को सम्मान देने की परंपरा को मजबूत करता है। भविष्य में ऐसी पहलों से राज्य राष्ट्रीय शिक्षा सूचकांकों में शीर्ष पर पहुंच सकता है।