7 जनवरी 2026, Ankita Bhandari हत्याकांड: कांग्रेस की CBI जांच की मांग: उत्तराखंड के बहुचर्चित Ankita Bhandari हत्याकांड ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने 6 जनवरी 2026 को इस मामले में सीबीआई जांच की मांग दोहराई, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जनवरी को कांग्रेस और आप को बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम को मामले से जोड़ने वाले पोस्ट हटाने का आदेश दिया। यह पुराना मामला, जो 2022 में हुआ था, अब नए आरोपों और विरोध प्रदर्शनों के कारण फिर सुर्खियों में है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वे पीड़िता के माता-पिता से बात करेंगे और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आगे जांच का आदेश दे सकते हैं। इस रिपोर्ट में हम इस घटना की पृष्ठभूमि, हालिया विकास, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और इसके निहितार्थों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Ankita Bhandari हत्याकांड की पृष्ठभूमि
Ankita Bhandari, एक 19 वर्षीय युवती, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को वे लापता हो गईं, और चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। पुलिस जांच में पता चला कि रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (तत्कालीन BJP नेता विनोद आर्य के बेटे), मैनेजर अंकित गुप्ता और कर्मचारी सौरभ भास्कर ने अंकिता की हत्या की। आरोप था कि अंकिता ने एक “वीआईपी गेस्ट” को “स्पेशल सर्विसेज” देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें नहर में धकेल दिया गया। 500 पेज की चार्जशीट में इस “VIP” का जिक्र था, लेकिन उसकी पहचान नहीं की गई।
मई 2025 में, सेशन कोर्ट ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन पैदा किए, और BJP ने विनोद आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया। हालांकि, “VIP” की पहचान न होने से पीड़िता के परिवार और विपक्ष असंतुष्ट रहे। अंकिता के पिता अजेंद्र सिंह भंडारी ने शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक संरक्षण और न्याय व्यवस्था के सवालों को उजागर करता है।
हालिया विकास और नया विवाद
दिसंबर 2025 के अंत में यह मामला फिर गरमाया जब पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर की पार्टनर अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने आरोप लगाया कि “VIP” एक वरिष्ठ राज्य बीजेपी नेता था। इस आरोप ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कांग्रेस ने इसे मौका बनाकर 6 जनवरी 2026 से राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में CBI जांच की मांग की गई। कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सीबीआई जांच का ऐलान नहीं होता।
उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी ने 6 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार न्याय के लिए कुछ भी करेगी, जिसमें नई जांच शामिल है। उन्होंने अंकिता के माता-पिता से बात करने का वादा किया और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद फैसला लेने की बात कही। दिलचस्प बात यह है कि BJP के कुछ नेता, जैसे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, भी नई जांच की मांग कर रहे हैं।
7 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस, आप और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स को बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को मामले से जोड़ने वाले कंटेंट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपों को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक बताया। गौतम ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया। यह आदेश मामले में नए राजनीतिक मोड़ को दर्शाता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस ने बीजेपी पर शक्तिशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि BJP सच्चाई छिपा नहीं सकती, और CBI जांच से शामिल लोगों के नाम सामने आएंगे। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी लखनऊ में कैंडल मार्च निकालकर CBI जांच की मांग की। वहीं, बीजेपी ने आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि जांच पारदर्शी रही है। दुष्यंत गौतम ने कोर्ट का सहारा लिया, जबकि धामी सरकार ने न्याय की प्रतिबद्धता दोहराई।
सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने न्यायिक निगरानी में समयबद्ध CBI जांच की मांग की। Ankita Bhandari के परिवार ने कहा कि वे CM से मिलेंगे और CBI जांच पर जोर देंगे। यह विवाद 2027 के लोकसभा चुनावों से पहले BJP के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।
विश्लेषण: राजनीतिक निहितार्थ और न्याय की आवश्यकता
यह पुराना मामला नए विवाद में बदल गया है क्योंकि “VIP” की पहचान अभी तक नहीं हुई, जो राजनीतिक संरक्षण के संदेह को जन्म देता है। कांग्रेस इसे BJP के खिलाफ हथियार बना रही है, जबकि BJP आंतरिक दबाव का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि CBI जांच से सच्चाई सामने आ सकती है, लेकिन राजनीतिक दखलंदाजी का खतरा भी है। यह मामला महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्याय की देरी को उजागर करता है। उत्तराखंड में पिछले दो सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जो जनता की नाराजगी दिखाते हैं।
निष्कर्ष
Ankita Bhandari हत्याकांड न्याय की मिसाल बन सकता है यदि सीबीआई जांच होती है। धामी सरकार के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा, जैसा कि कांग्रेस का कहना है। पीड़िता के परिवार को न्याय मिलना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यह विवाद राजनीति से ऊपर उठकर न्याय व्यवस्था की मजबूती पर सवाल उठाता है। उम्मीद है कि जल्द फैसला होगा और सच्चाई सामने आएगी।
Sources: इकनोमिक टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स