7 जनवरी 2026, आलोक राज का BSSC चेयरमैन पद से इस्तीफा: बिहार स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (BSSC) के नव नियुक्त चेयरमैन आलोक राज ने पद संभालने के महज छह दिनों बाद ही इस्तीफा दे दिया है। 1989 बैच के IPS अधिकारी और बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज ने सामान्य प्रशासन विभाग को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसमें उन्होंने निजी कारणों का हवाला दिया है। इस अचानक इस्तीफे ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, और कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या यह फैसला वाकई व्यक्तिगत है या पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है?
आलोक राज का पृष्ठभूमि और करियर
आलोक राज का करियर बिहार पुलिस में लंबा और विविध रहा है। वे 1989 बैच के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने बिहार के अलावा झारखंड और बंगाल में भी सेवाएं दी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग पटना में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में हुई थी। अविभाजित बिहार में उन्होंने रांची, गुमला, देवघर, पश्चिम सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जैसे जिलों में SP के रूप में काम किया।
प्रमुख उपलब्धियां और सम्मान
वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPFफ) में 2004 से 2011 तक तैनात रहे, जहां उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ अभियानों का नेतृत्व किया। आलोक राज को एक पुलिस एनकाउंटर में चार अपराधियों को मार गिराने के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया था, जब वे पटना में ASP थे। मुजफ्फरपुर जिले के मूल निवासी आलोक राज पटना विश्वविद्यालय से भूविज्ञान में एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और संगीत में भी रुचि रखते हैं। उन्होंने एक म्यूजिक एलबम भी जारी किया है, जिसमें उनके खुद के गाने शामिल हैं।
DGP पद और उसके बाद की भूमिकाएं
आलोक राज को 2024 में बिहार का DGP बनाया गया था। उन्होंने 30 अगस्त 2024 को पदभार ग्रहण किया, लेकिन मात्र 105 दिनों बाद उन्हें हटा दिया गया और 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी विनय कुमार को डीजीपी बनाया गया। डीजीपी पद से हटाए जाने के बाद उन्हें बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम (BPBCC) का चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया, जहां उन्होंने 31 दिसंबर 2025 तक सेवा दी। रिटायरमेंट के तुरंत बाद नीतीश कुमार सरकार ने उन्हें BSSC चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था, और पिछले सप्ताह अधिसूचना जारी कर उन्हें पांच साल के लिए पूर्णकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया। उन्होंने 1 जनवरी 2026 को पदभार ग्रहण किया, लेकिन 6 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। अधिसूचना में उनकी नियुक्ति पांच साल या 65 साल की उम्र तक, जो भी पहले हो, के लिए थी।
इस्तीफे के कारण और संदेह
इस्तीफे के कारणों पर आलोक राज ने सिर्फ ‘व्यक्तिगत कारण’ का जिक्र किया है। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को इस्तीफा सौंपते हुए कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अचानक लिया गया लगता है, क्योंकि पद संभालने के कुछ ही दिनों में इस्तीफा देना असामान्य है। BSSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था में जहां पेपर लीक और भर्ती घोटालों का इतिहास रहा है, वहां एक अनुभवी पुलिस अधिकारी की नियुक्ति से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन उनके जाने से अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजनीतिक दबाव या आंतरिक असहमति इसका कारण है?
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीव्र चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे नीतीश सरकार की अस्थिरता का सबूत बता रहे हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि ‘नीतीश सरकार में अच्छे अधिकारी भी नहीं टिक पा रहे, यह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।’ वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार योग्य लोगों को पद पर रखने में असफल है। जदयू की ओर से इसे निजी मामला बताकर बचाव किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर #AlokRajResignation ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या BSSC में चल रही अनियमितताओं से जुड़े दबाव के कारण यह कदम उठाया गया। एक एक्स पोस्ट में इंडियन मास्टर्माइंड्स ने इसे ‘बड़ी उथल-पुथल’ बताया है। पूर्व IAS और IPS अधिकारियों के बीच भी इस पर बहस छिड़ी है, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद ऐसे पदों पर नियुक्ति आम है, लेकिन इतनी जल्दी इस्तीफा दुर्लभ।
BSSC पर प्रभाव
BSSC के लिए यह इस्तीफा एक बड़ा झटका है। कमीशन बिहार में ग्रुप सी और अन्य सरकारी पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है। हाल के वर्षों में पेपर लीक, अनियमितताओं और देरी के कारण यह संस्था विवादों में रही है। आलोक राज की नियुक्ति से उम्मीद थी कि पुलिस बैकग्राउंड के कारण परीक्षाओं में निष्पक्षता और सुरक्षा बढ़ेगी। लेकिन उनके जाने से अब नया चेयरमैन नियुक्त होने तक कई भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
लंबित भर्तियां और युवाओं की चिंता
वर्तमान में द्वितीय इंटर स्तरीय परीक्षा, CGL-4 और अन्य भर्तियां पाइपलाइन में हैं, जिनके परिणाम और आगामी परीक्षाओं पर असर पड़ सकता है। बिहार के लाखों युवा जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं, वे इस घटना से चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द एक योग्य व्यक्ति की नियुक्ति करनी होगी, अन्यथा बेरोजगारी और असंतोष बढ़ सकता है।
व्यापक प्रशासनिक प्रभाव
बिहार प्रशासन पर इस इस्तीफे का व्यापक असर हो सकता है। नीतीश कुमार सरकार पहले से ही विभिन्न नियुक्तियों को लेकर विवादों में घिरी है। अच्छे अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद महत्वपूर्ण पद देने का चलन है, लेकिन अगर वे टिक नहीं पाते, तो यह प्रशासनिक स्थिरता पर सवाल उठाता है।
आगे की संभावनाएं
यह घटना दर्शाती है कि बिहार में भर्ती प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि युवाओं का विश्वास बना रहे। आलोक राज जैसे अनुभवी अधिकारी का जाना नुकसानदायक है, लेकिन इससे सबक लेकर सरकार को पारदर्शी और स्थिर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, आलोक राज का इस्तीफा बिहार की राजनीति और प्रशासन में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। क्या सरकार इस पर स्पष्ट बयान देगी या नया चेयरमैन कौन होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। राज्य के विकास और युवाओं के भविष्य के लिए ऐसे फैसलों का असर दूरगामी हो सकता है।
Sources: इंडियन एक्सप्रेस