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27 दिसंबर 2025, Bihar– नवंबर 2025 में हुए Bihar विधानसभा चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति को हिला दिया है। NDA की भारी जीत के बाद विपक्षी दलों ने ‘वोट चोरी’ और ‘वोट खरीदने’ के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने अब इस मामले को कानूनी जंग का रूप दे दिया है। पार्टी के छह हार चुके उम्मीदवारों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग पर पक्षपात, वोटर लिस्ट में हेरफेर और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए नतीजों में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह याचिका न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी कर सकती है।

चुनावी पृष्ठभूमि: NDA की लैंडस्लाइड जीत और विपक्ष का संकट

Bihar विधानसभा के 243 सीटों पर 15-16 नवंबर को हुए मतदान के नतीजे 17 नवंबर को घोषित हुए। NDA ने 202 सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा किया, जिसमें भाजपा को 89 और जद(यू) को 85 सीटें मिलीं। वहीं, महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) को महज 35 सीटें नसीब हुईं, जिसमें कांग्रेस के खाते में केवल छह सीटें आईं। यह जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी की ताकत को दर्शाती है, लेकिन विपक्ष इसे ‘खरीदी हुई जीत’ बता रहा है।

चुनाव प्रचार के दौरान ही आरोपों की बौछार शुरू हो गई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ का नारा दिया, जबकि पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने इसे सीधे ‘वोट खरीदने’ का मामला बताया। किशोर की जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, लेकिन उनकी आलोचना ने विपक्ष को हवा दी। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को ‘असंवेदनशील’ बताते हुए खारिज कर दिया, लेकिन अब कोर्ट में यह मुद्दा गरमाने को है।

वोट खरीदने के आरोप: 10 हजार रुपये का ‘आधिकारिक रिश्वत’

प्रशांत किशोर ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद NDTV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बम फोड़ा। उन्होंने दावा किया कि जद(यू)-भाजपा गठबंधन ने महिलाओं को 10 हजार रुपये नकद देकर वोट खरीदे। यह राशि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दी गई, जो कथित रूप से स्वरोजगार के लिए थी। किशोर के अनुसार, 1.21 करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपये दिए गए, और इसके अलावा छह महीनों में 2 लाख रुपये का अतिरिक्त वादा किया गया। प्रति विधानसभा क्षेत्र में 100 से 125 करोड़ रुपये का वितरण हुआ, जो चुनावी घोषणा-पत्र से लेकर वोटिंग डे तक चला।

“10 हजार रुपये ही वोट झुकाने के लिए काफी थे। जद(यू) को 25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलनी चाहिए थीं। NDA ने नकद से वोट खरीदे,” किशोर ने कहा। उन्होंने चुनाव आयोग पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ‘आधिकारिक रिश्वत’ थी, जो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में भी कहा गया कि Bihar में ‘नकद जाति से ज्यादा बोलती है’, जहां गरीबी और बेरोजगारी के बीच ऐसी योजनाएं वोटरों को लुभाती हैं।

कांग्रेस ने इन आरोपों को हवा दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने चार घंटे की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि Bihar के नेताओं और उम्मीदवारों ने वेलफेयर स्कीम्स के जरिए नकद प्रलोभन, नए वादों और वोटर लिस्ट में हेरफेर की शिकायतें दर्ज कीं। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। सबूत हमारे पास हैं।”

कांग्रेस की कोर्ट रणनीति: पटना हाईकोर्ट में याचिका

27 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका ने इस विवाद को नया मोड़ दिया। याचिकाकर्ता छह हार चुके कांग्रेस उम्मीदवार हैं – प्रवीण सिंह कुशवाहा (कहलगांव), अमित कुमार तुनना (रिगा), ऋषि मिश्रा (जले), नलिनी रंजन झा (बेनीपट्टी), तकीर आलम (बारारी) और शशांत शेखर (पटना साहिब)। उन्होंने चुनाव आयोग पर विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान पक्षपात का आरोप लगाया, जिसमें लाखों वोटरों के नाम काटे गए।

याचिका में कहा गया कि मॉडल कोड का उल्लंघन हुआ – चुनाव के दौरान नई वेलफेयर घोषणाएं और नकद प्रोत्साहन दिए गए। EVM में ‘वोट चोरी’ का दावा करते हुए कहा गया कि नतीजे वोटरों की मंशा से मेल नहीं खाते। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि उनके पक्ष में मजबूत समर्थन था, लेकिन परिणाम उलटे आए। वकील ने कहा, “याचिका जमा हो चुकी है, जल्द सुनवाई की उम्मीद है।” कोर्ट ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, जैसा कि अगस्त 2025 में वोटर रोल विवाद में हुआ था।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: एनडीए का पलटवार

NDA ने आरोपों को ‘हार का रोना’ बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “वोट चोरी के दावे बेबुनियाद हैं। राहुल गांधी को सबूत आयोग के पास ले जाना चाहिए।” जद(यू) नेता ने महिला योजना को ‘सशक्तिकरण’ का नाम दिया, न कि वोट खरीद। भाजपा ने कांग्रेस पर ‘नकारात्मक राजनीति’ का आरोप लगाया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने समर्थन जताते हुए कहा, “यह सत्ता का दुरुपयोग है।”

विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद 2029 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करेगा। विकिपीडिया पर ‘2025 भारतीय चुनावी विवाद’ पेज में इसे ‘लोकतंत्र पर संकट’ बताया गया है। रेडिट पर बहस छिड़ी है कि विपक्ष कोर्ट क्यों नहीं जाता, जबकि अब कांग्रेस ने यही कदम उठाया।

प्रभाव: लोकतंत्र पर सवाल और भविष्य की राह

ये आरोप Bihar के गरीब वोटरों की मजबूरी को उजागर करते हैं, जहां 10 हजार रुपये जीवन बदल सकता है। लेकिन इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर दाग लगता है। यदि कोर्ट कांग्रेस के पक्ष में फैसला देता है, तो पुनर्मतदान या नतीजों में बदलाव संभव। अन्यथा, NDA की सरकार मजबूत होगी।

चुनाव आयोग को अब कड़े कदम उठाने होंगे – वेलफेयर योजनाओं पर समयबद्ध प्रतिबंध और ईवीएम ट्रांसपेरेंसी। विपक्ष को सबूत मजबूत करने की जरूरत है। बिहार, जो भारत का सबसे युवा राज्य है, को ऐसी साजिशों से बचाना जरूरी है। अन्यथा, जनता का विश्वास टूटेगा।

यह जंग जारी है। पटना हाईकोर्ट का फैसला Bihar की राजनीति का भविष्य तय करेगा।

Sources: हिंदुस्तान टाइम्स

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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