AIMIM Bihar State President Akhtarul ImanAIMIM Bihar State President Akhtarul Iman

27 जनवरी 2026, Akhtarul Iman का गिरिराज सिंह पर तीखा हमला: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और अमौर विधायक अख्तरुल इमान ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर जोरदार हमला बोला है। इमान ने गिरिराज सिंह के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव को निशाना बनाते हुए संघ की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह बयान किशनगंज में एक कार्यक्रम के दौरान आया, जिसने स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

अख्तरुल इमान ने अपने बयान में कहा, “गिरिराज सिंह जैसे नेता RSS को राष्ट्रवादी संगठन बताकर उसकी तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन इतिहास गवाह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश की आजादी की लड़ाई में कोई सक्रिय योगदान नहीं दिया। संघ के संस्थापक और नेताओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं चलाया, बल्कि कई मौकों पर वे तटस्थ या ब्रिटिश समर्थक रहे। गिरिराज सिंह RSS की इस कथित भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जो ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है।” इमान ने आगे कहा कि ऐसे बयानों से समाज में विभाजन पैदा होता है और सीमांचल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।

यह बयान कोई अचानक नहीं है। गिरिराज सिंह, जो बेगूसराय से सांसद और केंद्रीय कपड़ा मंत्री हैं, लंबे समय से RSS के प्रचारक रहे हैं और अक्सर अपने बयानों में संघ की राष्ट्रवादी छवि को मजबूत करने की कोशिश करते हैं। हाल के महीनों में गिरिराज ने कई मंचों से RSS को स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बताया है, जिस पर विपक्षी दल और खासकर AIMIM लगातार आपत्ति जताते रहे हैं। किशनगंज, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और AIMIM का मजबूत आधार, ऐसे बयानों के लिए संवेदनशील माना जाता है। पिछले साल भी गिरिराज सिंह की प्रस्तावित ‘हिंदू स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर यहां विवाद हुआ था, जिसे AIMIM ने नफरत फैलाने वाला करार दिया था।

RSS और स्वतंत्रता संग्राम: एक विवादित इतिहास

RSS की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका लंबे समय से विवाद का विषय रही है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। कई इतिहासकार और दस्तावेज बताते हैं कि संघ ने संगठन के रूप में ब्रिटिश विरोधी आंदोलनों में हिस्सा नहीं लिया। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन या भारत छोड़ो आंदोलन में RSS की कोई संस्थागत भागीदारी नहीं थी। संघ के दूसरे सरसंघचालक एमएस गोलवलकर की किताब ‘विचार नवनीत’ में ऐसे उद्धरण हैं जहां ब्रिटिश शासन को हिंदू समाज के संगठन के लिए उपयोगी बताया गया है।

हालांकि, RSS के समर्थक दावा करते हैं कि कई स्वयंसेवकों ने व्यक्तिगत स्तर पर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और जेल गए। संघ का कहना है कि उसका फोकस हिंदू समाज को संगठित करना था, न कि कांग्रेस की तरह सीधे ब्रिटिश से टकराव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर RSS की राष्ट्रवादी भूमिका की सराहना की है। लेकिन विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और वामपंथी, इसे ‘इतिहास का विकृतिकरण’ बताते हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी अक्सर इस मुद्दे पर RSS की आलोचना करते हैं।

अख्तरुल इमान का यह बयान इसी पुराने विवाद को नई ज्वाला देता है। उन्होंने कहा, “जो संगठन आजादी की लड़ाई से दूर रहा, उसे अब राष्ट्रवाद का ठेका देना गलत है। गिरिराज सिंह जैसे नेता इससे राजनीतिक फायदा उठाते हैं, लेकिन जनता सब समझती है।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सीमांचल का समीकरण

गिरिराज सिंह की ओर से अभी इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन BJP सूत्रों का कहना है कि वे इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार देंगे। बिहार BJP में गिरिराज को फायरब्रांड नेता माना जाता है, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हिंदू वोटों को एकजुट करने की रणनीति पर काम करते हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीमांचल में BJP और AIMIM के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है।

AIMIM ने सीमांचल में अपनी पकड़ मजबूत की है। अख्तरुल इमान खुद अमौर से विधायक हैं और पार्टी ने किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया जैसे जिलों में अच्छा प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, RJD-कांग्रेस गठबंधन भी इस क्षेत्र में मुस्लिम-यादव वोट बैंक को बचाने की कोशिश कर रहा है। इमान के इस बयान से AIMIM को मुस्लिम वोटर्स में और मजबूती मिल सकती है, जबकि BJP इसे हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

स्थानीय लोग क्या कहते हैं? किशनगंज के कुछ निवासियों का मानना है कि ऐसे बयान क्षेत्र की शांति भंग कर सकते हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “यहां हिंदू-मुस्लिम सदियों से साथ रहते हैं। राजनीतिक नेता अपने फायदे के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ रहे हैं।” वहीं, AIMIM समर्थकों का कहना है कि इमान साहसिक तरीके से सच बोल रहे हैं।

इतिहास या राजनीति?

अख्तरुल इमान का यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि RSS और BJP की विचारधारा पर बड़ा सवाल है। स्वतंत्रता संग्राम में RSS की भूमिका पर बहस पुरानी है, लेकिन चुनावी मौसम में यह और तीखी हो जाती है। सीमांचल जैसे क्षेत्र में जहां धार्मिक और जातीय समीकरण नाजुक हैं, ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द पर असर डाल सकते हैं। आने वाले दिनों में गिरिराज सिंह का जवाब और अन्य दलों की प्रतिक्रिया से यह विवाद और बढ़ सकता है।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय राजनीति में इतिहास अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा—वह वोटों की लड़ाई का हथियार बन गया है।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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