15 जनवरी 2026, Kishanganj में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर: Kishanganj, बिहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हाल ही में खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, AQI 389 पर दर्ज किया गया, जो ‘हैजार्डस’ श्रेणी में आता है। मुख्य प्रदूषक PM2.5 की सांद्रता 269.5 µg/m³ मापी गई, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वार्षिक दिशानिर्देश मूल्य से 53.9 गुना अधिक है। यह स्तर संवेदनशील समूहों जैसे बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए तत्काल खतरा पैदा करता है। जिले में प्रदूषण की निगरानी SDM ऑफिस खागरा स्टेशन पर की जा रही है, जहां PM10, SO2 और CO जैसे अन्य प्रदूषक भी ऊंचे स्तर पर हैं। सर्दियों में ठंडी हवा और नमी के कारण प्रदूषक नीचे जम जाते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। हाल के दिनों में AQI में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन औसतन यह 200 से ऊपर रहा, जो अस्वास्थ्यकर है।
ऐतिहासिक रुझान और तुलना
Kishanganj में प्रदूषण का स्तर पिछले वर्षों में बढ़ता जा रहा है। 2025 में औसत PM2.5 150 µg/m³ से ऊपर रहा, जबकि 2024 में यह 100 µg/m³ के आसपास था। बिहार के अन्य जिलों जैसे पटना (AQI 283) और गया (335) की तुलना में Kishanganj अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन फिर भी राज्य के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल है। मौसमी बदलाव महत्वपूर्ण हैं; सर्दियों में कोहरा और धुंध प्रदूषण को बढ़ाते हैं, जबकि मानसून में बारिश से राहत मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपाय नहीं किए गए तो 2030 तक PM2.5 स्तर 300 µg/m³ पार कर सकता है।
Kishanganj में वायु प्रदूषण के कारणों की रिपोर्ट
स्थानीय स्रोतों का विश्लेषण
Kishanganj में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाना, कचरा जलाना और निर्माण कार्य हैं। जिले में उद्योग कम हैं, लेकिन ट्रैफिक और डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं PM2.5 को बढ़ाता है। फसल अवशेष जलाना (17% योगदान) और घरेलू ईंधन जैसे लकड़ी व गोबर का उपयोग (5%) प्रमुख हैं। सीमा क्षेत्र होने के कारण पड़ोसी राज्यों से प्रदूषक हवा के साथ आते हैं। निर्माण धूल और सड़क धूल भी 45% तक योगदान देते हैं। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि सर्दियों में नमी प्रदूषकों को फंसाती है, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
बाहरी और क्षेत्रीय कारक
बिहार में प्रदूषण का 51% उद्योगों से, 27% वाहनों से आता है, लेकिन Kishanganj में ग्रामीण स्रोत प्रमुख हैं। इंडो-गंगा मैदान की भौगोलिक स्थिति के कारण पश्चिम से प्रदूषक यहां पहुंचते हैं। जलवायु परिवर्तन से बढ़ती नमी और तापमान प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। कचरा जलाने की आदत (गांवों में दैनिक) और अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन समस्या को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने से इन कारणों पर नियंत्रण संभव है।
उच्च PM2.5 के स्वास्थ्य प्रभावों की रिपोर्ट
तत्काल स्वास्थ्य जोखिम
उच्च PM2.5 (269.5 µg/m³) से सांस की तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन और थकान जैसे लक्षण तुरंत दिखते हैं। संवेदनशील समूहों में हृदय रोग, अस्थमा के हमले और फेफड़ों की क्षति बढ़ जाती है। लंबे समय तक एक्सपोजर से समय से पहले मौत, हार्ट अटैक और अनियमित दिल की धड़कन का खतरा होता है। Kishanganj में बच्चे और बुजुर्ग सबसे प्रभावित हैं, जहां सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। WHO के अनुसार, PM2.5 फेफड़ों और रक्तप्रवाह में घुसकर कैंसर का कारण बन सकता है।
दीर्घकालिक प्रभाव और कमजोर समूह
दीर्घकालिक एक्सपोजर से फेफड़े की क्षमता कम होती है, और गर्भवती महिलाओं में समय से पहले जन्म का जोखिम बढ़ता है। Kishanganj के ग्रामीण इलाकों में आउटडोर वर्कर्स को सिरदर्द, कमजोरी और अस्थमा के हमले अधिक होते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि 2018 में PM2.5 से 4.11 मिलियन समय से पहले मौतें हुईं। बिहार में हृदय और श्वसन रोगों की दर बढ़ रही है, जो प्रदूषण से जुड़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह देते हैं।
सरकारी कार्रवाइयों और समाधानों की रिपोर्ट
राज्य और राष्ट्रीय पहल
बिहार सरकार ने क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान के तहत वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के अंतर्गत Kishanganj में निगरानी स्टेशन बढ़ाए गए। बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (BSPCB) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया, जिसमें निर्माण पर प्रतिबंध और वाहन नियंत्रण शामिल हैं। विश्व बैंक की मदद से राज्यव्यापी क्लीन एयर प्लान विकसित किए जा रहे हैं। IEC अभियान से जागरूकता फैलाई जा रही है, विशेषकर कमजोर समूहों के लिए।
सिफारिशें और भविष्य की योजनाएं
सरकार को कचरा जलाने पर सख्ती, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा और पेड़ लगाने पर ध्यान देना चाहिए। स्थानीय स्तर पर मॉनिटरिंग बढ़ाकर 2024 तक AQI लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। निवासियों को मास्क, घरेलू फिल्टर और कम आउटडोर गतिविधियों की सलाह दी जाती है। सामूहिक प्रयास से प्रदूषण को 30% तक कम किया जा सकता है।
Sources: आई क्यू एयर वेबसाइट, रेडिट्स, आईआईटी दिल्ली रिपोर्ट