18 दिसंबर 2025, AIMIM – बिहार के सीमांचल क्षेत्र में अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के मुद्दों को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पार्टी के बिहार प्रमुख विधायक अख्तरुल इमान ने किशनगंज में आयोजित संगठन विस्तार कार्यक्रम के दौरान कहा कि AIMIM सीमांचल के हक की आवाज को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर बुलंद करेगी। उन्होंने कहा, “सीमांचल का विकास लंबे समय से उपेक्षित रहा है। बाढ़, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं से जूझते इस क्षेत्र के लोगों को उनका हक दिलाना हमारा संकल्प है।” यह बयान हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की सफलता के बाद आया है, जहां AIMIM ने सीमांचल की पांच सीटें जीतीं। इस रिपोर्ट में हम इस एलान के पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, कार्यक्रम की बारीकियां, क्षेत्रीय मुद्दों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
AIMIM का सीमांचल में उदय: चुनावी सफलता का आधार
सीमांचल – जो किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सहरसा जिलों को मिलाकर बनता है – बिहार का एक ऐसा क्षेत्र है जहां मुस्लिम आबादी 60 प्रतिशत से अधिक है। लंबे समय से यहां विकास की कमी, नेपाल सीमा से जुड़े तस्करी और बाढ़ की समस्याएं रही हैं। 2020 के विधानसभा चुनावों में AIMIM ने यहां अपनी जड़ें जमाईं, जब पार्टी ने अमौर, बहादुरगंज, कोचाधमान, जोकीहाट और ठाकुरगंज जैसी सीटों पर जीत हासिल की। नवंबर 2025 के चुनावों में भी यही ट्रेंड जारी रहा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, AIMIM ने चार सीटें जीतीं और दो पर मजबूत लीड बनाई। असदुद्दीन ओवैसी ने जीत के बाद सीमांचल के लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा था कि यह सफलता क्षेत्र के मुद्दों पर पार्टी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
अख्तरुल इमान, जो अमौर से विधायक हैं, AIMIM के बिहार चेहरा बने हुए हैं। उन्होंने 2025 चुनावों से पहले लालू यादव को पत्र लिखकर गठबंधन की अपील की थी, लेकिन पार्टी ने स्वतंत्र लड़ाई लड़ी। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, AIMIM ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन किया और सीमांचल में मजबूत पैठ बनाई। अब, चुनावी धूल जमने के बाद, पार्टी संगठन विस्तार पर फोकस कर रही है। किशनगंज का यह कार्यक्रम उसी कड़ी का हिस्सा है, जहां युवाओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
किशनगंज कार्यक्रम: युवा ऊर्जा से नई शुरुआत
18 दिसंबर को किशनगंज के बहादुरगंज प्रखंड कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। अख्तरुल इमान ने मंच से कहा, “हम सीमांचल को सिर्फ वोट बैंक नहीं मानते, बल्कि यह हमारा अपना घर है। यहां की मिट्टी में हमारी जड़ें हैं।” उन्होंने हालिया बाढ़ प्रभावित इलाकों का जिक्र किया, जहां हजारों परिवार बेघर हो गए। “सरकारें आती-ज जाती हैं, लेकिन सीमांचल की पीड़ा अनसुनी रहती है। AIMIM इस अन्याय के खिलाफ लड़ेगी,” इमान ने जोर देकर कहा।
कार्यक्रम में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उन्होंने युवा विंग को मजबूत करने पर जोर दिया। किशनगंज जिले में 20 नए युवा नेताओं को जिला और ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारियां दी गईं। एक युवा कार्यकर्ता ने बताया, “हमारी पीढ़ी बेरोजगारी से त्रस्त है। इमान साहब का यह एलान हमें प्रेरित करता है।” कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जहां लैंगिक समानता और शिक्षा पर सत्र आयोजित किए गए।
यह विस्तार अभियान AIMIM की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ने नवंबर में जीत के बाद ही बिहार में 50 से अधिक जिलों में समितियां गठित करने का फैसला लिया। फेसबुक पोस्ट के अनुसार, इमान ने विधानसभा में नवनिर्वाचित स्पीकर को धन्यवाद देते हुए सदन को मजबूत बनाने की बात कही। लेकिन उनका मुख्य फोकस सीमांचल रहा, जहां पार्टी अब स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है।
सीमांचल के प्रमुख मुद्दे: AIMIM की प्राथमिकताएं
सीमांचल की समस्याएं जटिल हैं। सबसे बड़ा खतरा बाढ़ है, जो हर साल कनकाई, कोसी और महानंदा नदियों से आती है। 2025 में भी पूर्णिया और किशनगंज में हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई। अख्तरुल इमान ने कहा, “बाढ़ नियंत्रण के नाम पर सिर्फ कागजी योजनाएं हैं। हमें स्थायी बांध और राहत पैकेज चाहिए।” इसके अलावा, बेरोजगारी दर 40 प्रतिशत से ऊपर है। युवा पलायन को मजबूर हैं, जो मुंबई और दिल्ली चले जाते हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य भी चिंता का विषय हैं। जिले में प्रति 1000 बच्चों पर मात्र 2 डॉक्टर हैं। इमान ने कहा, “मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद, मदरसों को आधुनिक शिक्षा से वंचित रखा गया। AIMIM लड़कियों की शिक्षा पर विशेष अभियान चलाएगा।” पार्टी ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया कि नीतीश कुमार सरकार को समर्थन देने की शर्त सीमांचल को न्याय है। यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि AIMIM की 5 सीटें विधानसभा में संतुलन बनाने वाली साबित हो सकती हैं।
आर्थिक रूप से, सीमांचल कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई सुविधाओं की कमी है। तस्करी और अवैध घुसपैठ भी चुनौतियां हैं। इमान ने कहा, “सीमा सुरक्षा मजबूत हो, लेकिन स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिले।” AIMIM की योजना है कि पार्टी स्थानीय स्तर पर जागरूकता शिविर लगाएगी, जहां किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सहयोगी या प्रतिद्वंद्वी?
AIMIM के इस एलान पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। जेडीयू के एक नेता ने कहा, “सीमांचल का विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन AIMIM का अलगाववाद हानिकारक है।” वहीं, आरजेडी ने इसे सकारात्मक बताया, लेकिन गठबंधन की संभावना पर चुप्पी साधी। भाजपा ने इसे ‘वोटबैंक राजनीति’ करार दिया।
ओवैसी ने लोकसभा में वंदे मातरम को राष्ट्रवाद का लिटमस टेस्ट बताने पर सवाल उठाए, जो सीमांचल के मुस्लिम युवाओं को प्रेरित कर रहा है। मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, AIMIM को अब स्थानीय निकाय चुनावों में चुनौती है।
भविष्य की राह: चुनौतियां और संभावनाएं
AIMIM का यह विस्तार सीमांचल को नई राजनीतिक ऊर्जा दे सकता है। लेकिन चुनौतियां कम नहीं। पार्टी को मुख्यधारा में जगह बनानी होगी, जहां उसे ‘कट्टरपंथी’ का लेबल झेलना पड़ता है। इमान ने कहा, “हम संविधान के दायरे में रहकर लड़ेंगे।” पार्टी की योजना है कि 2026 तक हर ब्लॉक में कार्यालय खोले जाएं।
सीमांचल के लोग उम्मीद बांधे हैं। एक स्थानीय किसान ने कहा, “अगर AIMIM वादा निभाएगी, तो हम उनके साथ हैं।” लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब पार्टी मुद्दों पर कार्रवाई करे। संडे गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, AIMIM की जीत ने एनडीए को झकझोर दिया है।
निष्कर्ष: न्याय की लड़ाई में नया अध्याय
अख्तरुल इमान का यह एलान AIMIM के लिए एक नया अध्याय है। सीमांचल, जो लंबे समय से उपेक्षित रहा, अब अपनी आवाज पा सकता है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब पार्टी संगठन को मजबूत करे और मुद्दों पर लगातार दबाव बनाए। बिहार की राजनीति में AIMIM का उदय अल्पसंख्यकों के लिए आशा की किरण है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। क्या यह एलान वास्तविक बदलाव लाएगा, समय बताएगा। फिलहाल, किशनगंज की सड़कों पर AIMIM के झंडे लहरा रहे हैं, जो सीमांचल के हक की नई जंग का संकेत हैं।