AI helps detect tax evasion worth Rs 31 crore in BiharAI helps detect tax evasion worth Rs 31 crore in Bihar

29 जनवरी 2026, बिहार में AI की मदद से पकड़ी गई 31 करोड़ की टैक्स चोरी: बिहार सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लेकर जमीन और भवन रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खुलासा किया है। निबंधन विभाग की जांच में राज्य के कई जिलों में 838 दस्तावेजों में अनियमितता पाई गई, जिसमें संपत्ति के मूल्य को जानबूझकर कम आंककर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की चोरी की गई। इसके चलते सरकार को करीब 31 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। विभाग ने अब इन जमीन मालिकों (लेख्यधारियों) से पूरी राशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया है।

यह मामला उस समय सामने आया जब तीन महीने पहले निबंधन विभाग ने AI आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली लागू की। इस नई तकनीक ने हजारों रजिस्ट्री दस्तावेजों की स्वचालित जांच की और संदिग्ध मामलों को चिह्नित किया। जांच में पता चला कि कई मामलों में जमीन या भवन की वास्तविक कीमत को कम दिखाया गया, जिससे सरकार को कम राजस्व मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, यह चोरी आमतौर पर खरीदार-विक्रेता और कुछ मामलों में विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से होती थी।

AI कैसे कर रही है चोरी का पता?

AI तकनीक दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति मूल्य की तुलना बाजार दर, न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) और अन्य पैरामीटर्स से करती है। अगर कोई असंगति मिलती है, तो वह स्वतः फ्लैग हो जाता है। इसके बाद मैनुअल जांच होती है। निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” बताया है। उन्होंने कहा, “यह कर चोरी का संगीन मामला है। इसमें विभागीय कर्मियों की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हमने सभी अवर निबंधकों को अपने क्षेत्र में चिह्नित दस्तावेजों की वसूली सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है।”

यादव ने आगे कहा कि अगर तय समय में वसूली नहीं हुई, तो संबंधित नियमों के तहत नीलामवाद या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अतिरिक्त महानिरीक्षक (एआईजी) राकेश कुमार ने भी राजस्व वसूली में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को संपत्ति लेनदेन की सख्त निगरानी करने, आवेदन मिलने के तीन दिनों में साइट निरीक्षण करने और कर्मचारी तैनाती सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

प्रभावित जिले और मामले

हालांकि विभाग ने सभी प्रभावित जिलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन मुजफ्फरपुर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर मामले सामने आए हैं। यहां AI ने सैकड़ों दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ी। सूत्रों के अनुसार, राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं मिली हैं। विभाग का मानना है कि वास्तविक मामले इससे कहीं अधिक हो सकते हैं, जिससे निबंधन कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है।

वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं और विभाग की राजस्व वसूली लक्ष्य से काफी पीछे है। कई जिलों में केवल 62 फीसदी तक ही राजस्व जुटाया जा सका है। नई MVR दरें लागू होने से पहले विभाग सभी संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट मांग रहा है।

सरकार की डिजिटल पहल और भविष्य

बिहार सरकार लंबे समय से भूमि सुधार और राजस्व विभाग में डिजिटलाइजेशन पर जोर दे रही है। भू-लगान वसूली, ऑनलाइन म्यूटेशन और अब AI आधारित जांच जैसी पहलें पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का इस्तेमाल न केवल राजस्व बढ़ाएगा, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगा।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि तकनीक कैसे सरकारी प्रणाली में छिपी गड़बड़ियों को उजागर कर सकती है। जमीन मालिकों के लिए यह चेतावनी है कि अब कम मूल्य दिखाकर टैक्स बचाना आसान नहीं रहेगा। वहीं, आम जनता के लिए यह राहत की खबर है कि सरकार का राजस्व बढ़ेगा, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।

विभाग अब और सख्ती बरतने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में AI का दायरा बढ़ाकर अन्य क्षेत्रों में भी अनियमितताओं की जांच की जाएगी। यह कदम बिहार को डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

Sources: हिंदुस्तान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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