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23 दिसंबर 2025, Kishanganj: बिहार सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने Kishanganj जिले में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया आरंभ कर दी है। यह पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है। कक्षा 9वीं और 11वीं (कला एवं विज्ञान धारा) में प्रवेश के लिए आवेदन 30 दिसंबर 2025 तक आमंत्रित किए गए हैं। यह विद्यालय सीमांचल क्षेत्र के पिछड़े इलाकों के प्रतिभावान युवाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण कई छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

Kishanganj जिला, जो बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है, में मुस्लिम समुदाय की बहुलता है। यहां शिक्षा का स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है, और ड्रॉपआउट दर 40 प्रतिशत से अधिक है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार, यह विद्यालय मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन एवं पारसी समुदायों के छात्र-छात्राओं को लक्षित करता है। विद्यालय का स्थान डेरामारी, कोचाधमानान ब्लॉक में है, जो ग्रामीण क्षेत्रों से आसानी से सुलभ है। सरकार का उद्देश्य इन छात्रों को मुख्यधारा में लाना, ड्रॉपआउट दर को कम करना और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना है। विभाग के सचिव ने कहा, “यह योजना अल्पसंख्यक युवाओं को सशक्त बनाएगी, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।” पिछले वर्षों में इसी तरह की योजनाओं से राज्य में अल्पसंख्यक छात्रों की सफलता दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

पात्रता मानदंड: सरल और समावेशी

प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड स्पष्ट और सरल रखे गए हैं। कक्षा 9वीं के लिए आवेदक की अधिकतम आयु 16 वर्ष होनी चाहिए, जबकि कक्षा 11वीं के लिए 18 वर्ष। परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक बिहार निवासी होना अनिवार्य है, और अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध प्रमाणित होना चाहिए। ग्रामीण छात्रों के लिए 75 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं, जिनमें 50 प्रतिशत लड़कियों के लिए विशेष प्रावधान है। इसके अलावा, राज्य सरकार की आरक्षण नीति (एससी/एसटी/ओबीसी) भी लागू होगी। कुल सीटें लगभग 200 हैं, जो मेरिट के आधार पर वितरित की जाएंगी। यह आरक्षण व्यवस्था पिछड़े गांवों जैसे बहादुरगंज, ठाकुरगंज, दौलताबाद और पलासी के छात्रों को प्राथमिकता देगी, जहां शिक्षा की पहुंच सीमित है।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों विकल्प

आवेदन प्रक्रिया उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाई गई है। इच्छुक छात्र या अभिभावक आधिकारिक वेबसाइट www.minoritywelfare.bih.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कक्षा 9वीं के लिए फॉर्म https://www.biharstatehajcommittee.org/form9.php पर उपलब्ध है, जबकि कक्षा 11वीं के लिए https://www.biharstatehajcommittee.org/form11.php। फॉर्म भरने के बाद, स्व-प्रमाणित दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यदि ऑनलाइन सुविधा न हो, तो फॉर्म डाउनलोड कर संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में जमा किया जा सकता है। आवश्यक दस्तावेजों में जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र (कक्षा 8वीं/10वीं की मार्कशीट), पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर एवं आयु प्रमाण पत्र (जन्म प्रमाण पत्र या अंचल अधिकारी से जारी) शामिल हैं। विभाग ने जागरूकता के लिए पंचायत स्तर पर कैंप लगाए हैं और हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। आवेदन की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2025 है, उसके बाद कोई विस्तार नहीं होगा।

चयन प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा पर आधारित मेरिट

चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। प्रवेश परीक्षा जनवरी 2026 में आयोजित होने की संभावना है, जिसमें सामान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान, भाषा कौशल एवं तर्कशक्ति का परीक्षण होगा। परीक्षा के एडमिट कार्ड वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकेंगे। मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद, चयनित छात्रों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। कक्षा 11वीं में कला (इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान) एवं विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान) धाराओं का विकल्प उपलब्ध होगा। परीक्षा का पाठ्यक्रम कक्षा 8वीं/10वीं स्तर का होगा, ताकि ग्रामीण छात्र आसानी से तैयारी कर सकें। जिला शिक्षा अधिकारी मोहम्मद जावेद ने बताया, “हमारा फोकस पारदर्शिता पर है। कोई कोटा या सिफारिश नहीं चलेगी; केवल मेरिट ही निर्णायक होगी।”

सुविधाएं: समग्र विकास पर जोर

विद्यालय में शिक्षा निःशुल्क होने के साथ-साथ आवास, पौष्टिक भोजन (तीन समय), वर्दी, किताबें, स्टेशनरी एवं चिकित्सा सुविधाएं भी मुफ्त प्रदान की जाएंगी। पाठ्यक्रम सीबीएसई पैटर्न पर आधारित होगा, जिसमें डिजिटल लिटरेसी, करियर काउंसलिंग एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं। हॉस्टल सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण वाला होगा, जहां खेलकूद, योग एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करेंगी। एक ग्रामीण अभिभावक, रमजान अली ने कहा, “मेरी बेटी को अब दिल्ली या पटना जाने की मजबूरी नहीं। घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, जो परिवार के लिए बड़ी राहत है।”

प्रभाव: सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम

यह पहल Kishanganj जैसे जिले में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करेगी। अल्पसंख्यक समुदाय में शिक्षा की कमी से उत्पन्न असमानता को दूर करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार ने ऐसे विद्यालयों का विस्तार पूरे बिहार में करने का लक्ष्य रखा है, ताकि ड्रॉपआउट दर 20 प्रतिशत तक कम हो। विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगी, क्योंकि शिक्षित युवा रोजगार सृजन में योगदान देंगे। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने टिप्पणी की, “यह न केवल शिक्षा का प्रसार करेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को गति भी देगा।”

अंत में, समय रहते आवेदन करें। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट या जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय से संपर्क करें। यह अवसर अल्पसंख्यक युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। यदि सही दिशा में प्रयास किया गया, तो किशनगंज शिक्षा का नया केंद्र बन सकता है।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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