10 दिसंबर 2025: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाने वाली एक बड़ी कार्रवाई मंगलवार को किशनगंज जिले में हुई। जिला स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन की अगुवाई में चूड़ी पट्टी इलाके में एक अवैध नर्सिंग होम और सात पैथोलॉजी सेंटरों पर छापेमारी की गई। इन सभी प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि ये केंद्र बिना किसी वैध लाइसेंस के संचालित हो रहे थे, जहां अनक्वालिफाइड स्टाफ द्वारा इलाज किया जा रहा था। इस कार्रवाई से दर्जनों मरीज प्रभावित हुए, जिन्हें अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।
छापेमारी सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई, जब स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिसमें ड्रग इंस्पेक्टर, मेडिकल अधिकारी और पुलिस बल शामिल था, चूड़ी पट्टी के व्यस्त बाजार क्षेत्र में पहुंची। लक्षित नर्सिंग होम ‘सुंदर मेडिकल सेंटर’ में बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रसव और छोटे-मोटे ऑपरेशन किए जा रहे थे। टीम ने मौके पर 15 से अधिक मरीजों को पाया, जिनमें गर्भवती महिलाएं और बच्चे शामिल थे। नर्सिंग होम के मालिक, डॉ. (दावा) रमेश कुमार, ने जांच के दौरान दस्तावेज पेश करने से इनकार कर दिया। सिविल सर्जन डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया, “यह केंद्र बिना बिहार मेडिकल काउंसिल के लाइसेंस के चल रहा था। यहां दवाओं का स्टॉक एक्सपायर्ड था और इमरजेंसी उपकरण अनुपस्थित थे। मरीजों की जान को खतरा था।”
इसी क्रम में सात पैथोलॉजी सेंटरों—जिनमें ‘क्विक डायग्नोस्टिक लैब’, ‘हेल्थ चेक सेंटर’ आदि शामिल हैं—पर भी छापा मारा गया। इनमें से अधिकांश बिना बायोकेमिस्ट के ब्लड टेस्ट और एक्स-रे सुविधा चला रहे थे। टीम ने सैंपल कलेक्ट किए और फर्जी रिपोर्ट्स जब्त कीं। एक पैथोलॉजी सेंटर से 5,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि अन्य पर एफआईआर दर्ज की गई। जिला प्रशासन के अनुसार, ये केंद्र पिछले दो वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रहे थे, जिसकी शिकायतें स्थानीय निवासियों से प्राप्त हो रही थीं। एक प्रभावित मरीज की पत्नी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे बच्चे का टेस्ट यहां कराया था, लेकिन रिपोर्ट गलत निकली। अच्छा हुआ कि समय रहते कार्रवाई हुई।”
यह कार्रवाई बिहार सरकार की ‘स्वास्थ्य सुधार अभियान’ का हिस्सा है, जो नई एनडीए सरकार के गठन के बाद तेज हुई है। सीएम नीतीश कुमार के निर्देश पर पूरे राज्य में अवैध मेडिकल प्रतिष्ठानों के खिलाफ ड्राइव चल रही है। सीमांचल में पहले भी पूर्णिया और कटिहार में इसी तरह की छापेमारी हुईं, जहां 20 से अधिक केंद्र बंद किए गए। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर मरीज को मानक सुविधा मिले। अवैध केंद्रों से न केवल धनलाभ हो रहा है, बल्कि जानें भी जा रही हैं।” विपक्षी दल आरजेडी ने कार्रवाई का समर्थन किया, लेकिन पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत है। किशनगंज जिले में कुल 150 से अधिक नर्सिंग होम हैं, जिनमें से 30% अवैध बताए जाते हैं। इस छापेमारी से स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आगे की कार्रवाइयां और कड़ी होंगी। मरीजों को सलाह दी गई है कि केवल रजिस्टर्ड केंद्रों पर ही इलाज कराएं। कुल मिलाकर, यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो सीमांचल के निवासियों के लिए राहत की सांस बनेगी।