21 फरवरी 2026, Katihar में बच्चा चोरी अफवाह से भीड़ ने विक्षिप्त महिला को पीटा: बिहार के कटिहार जिले में बच्चा चोरी की अफवाह ने एक बार फिर हिंसा का रूप ले लिया। मनसाही थाना क्षेत्र के हफलागंज चौक (फोरलेन सड़क) पर गुरुवार की सुबह एक विक्षिप्त (मानसिक रूप से परेशान) महिला पर बच्चा चोर होने का आरोप लगाकर भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलते ही मनसाही पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद महिला को भीड़ के चंगुल से निकालकर बचाया। महिला को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की है, लेकिन जांच जारी है।
घटना का विवरण
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्रोतों के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह हुई जब महिला हफलागंज चौक के आसपास घूम रही थी। वह विक्षिप्त अवस्था में थी और स्थानीय लोगों को संदिग्ध लगी। अचानक अफवाह फैली कि वह बच्चा चोरी करने आई है। भीड़ जमा हो गई और लोगों ने बिना किसी सबूत के महिला पर लाठियां और हाथापाई की। महिला ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का गुस्सा बढ़ता गया। कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया।
महिला की हालत गंभीर होने पर किसी ने पुलिस को सूचना दी। मनसाही थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। भीड़ को समझाने-बुझाने के बाद महिला को सुरक्षित निकाला गया। पुलिस ने महिला को थाने लाकर प्राथमिक उपचार दिया और फिर सदर अस्पताल रेफर किया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला को चोटें आई हैं, लेकिन जान को खतरा नहीं है। वह मानसिक रूप से अस्थिर है और परिवार से अलग दिख रही है।
पुलिस की कार्रवाई और अलर्ट
मनसाही थाना प्रभारी ने कहा, “अफवाह के आधार पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने महिला को बचाया और जांच कर रहे हैं।” पुलिस ने भीड़ में शामिल कुछ लोगों की पहचान की कोशिश की है, लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। अधिकारी ने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना पुलिस को दें।
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ दिनों में बिहार के कम से कम पांच जिलों (कटिहार, सीतामढ़ी, सारण, वैशाली, नवादा) में बच्चा चोरी की अफवाह से जुड़ी हिंसा की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। सीतामढ़ी में दिव्यांग महिला को खंभे से बांधकर पीटा गया, सारण में महिला पर हमला हुआ और चार गिरफ्तारियां हुईं, जबकि वैशाली में व्यक्ति को भीड़ ने पिटाई की। इन मामलों में पुलिस ने हस्तक्षेप कर पीड़ितों को बचाया, लेकिन अफवाहों का प्रसार सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर तेजी से हो रहा है।
अफवाहों का खतरनाक चेहरा
बिहार में बच्चा चोरी की अफवाहें अक्सर व्हाट्सएप और फेसबुक पर वायरल वीडियो या मैसेज से फैलती हैं। ये अफवाहें पुरानी घटनाओं या फर्जी वीडियो पर आधारित होती हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में तुरंत हिंसा का रूप ले लेती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा की कमी, सोशल मीडिया की गलत जानकारी और कानून हाथ में लेने की मानसिकता इसका मुख्य कारण है। 2018 में भी ऐसी अफवाहों से देशभर में कई मौतें हुई थीं, और अब 2026 में बिहार में फिर से यह सिलसिला शुरू हो गया है।
पुलिस और प्रशासन ने राज्य स्तर पर अलर्ट जारी किया है। कटिहार एसपी ने कहा, “अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लोग सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करें।” जिला प्रशासन ने ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।
सामाजिक प्रभाव और सलाह
यह घटनाएं समाज में भय और अविश्वास पैदा कर रही हैं। निर्दोष लोग, खासकर मानसिक रूप से कमजोर या गरीब महिलाएं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। पुलिस का कहना है कि बच्चा चोरी के वास्तविक मामलों की जांच अलग से होती है, लेकिन अफवाहों पर हिंसा कानून का उल्लंघन है।
लोगों से अपील:
- किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को देखकर तुरंत पुलिस को सूचित करें, खुद हिंसा न करें।
- सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज की सत्यता जांचें।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार में जागरूकता बढ़ाएं, लेकिन अफवाहों से बचें।
यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पुलिस जांच जारी है, और उम्मीद है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी।
Sources: दैनिक भास्कर