5 अप्रैल 2026, Iran के ड्रोन हमलों से कुवैत और बहरीन की ऊर्जा सुविधाएं क्षतिग्रस्त: आज ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण देशों – कुवैत और बहरीन – पर ड्रोन हमले किए। ये हमले अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के 37वें दिन हुए, जिसमें ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बना रहा है। कुवैत में ईरानी ड्रोन ने तेल मंत्रालय से जुड़े कॉम्प्लेक्स और पावर-वॉटर प्लांट्स को लक्षित किया, जबकि बहरीन में BAPCO Energies की स्टोरेज फैसिलिटी पर हमला हुआ। इन हमलों से ऊर्जा क्षेत्र में आग लगी और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि किसी भी हमले में जान-माल की बड़ी हानि की खबर नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर गहरा पड़ रहा है।
कुवैत पर ईरानी ड्रोन हमले: तेल और बिजली सुविधाएं निशाने पर
हमले का विस्तृत विवरण
रविवार को ईरानी ड्रोन ने कुवैत के शुवैख (Shuwaikh) ऑयल सेक्टर कॉम्प्लेक्स पर हमला किया। यह कॉम्प्लेक्स कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) का मुख्यालय है, जहां तेल मंत्रालय भी स्थित है। हमलों में आग लग गई और पूरा कॉम्प्लेक्स खाली करा दिया गया। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने पुष्टि की कि ड्रोन हमलों से उनके विभिन्न यूनिट्स में आग लगी।
इसके अलावा, ईरानी ड्रोन ने कुवैत के पावर प्लांट्स और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बनाया। इन हमलों से बिजली और पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भी धुआं उठता दिखा। कुवैत की सरकार ने ईरान को सीधे जिम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने 15 ड्रोन और कुछ क्रूज मिसाइलें दागीं, जिनमें से कुछ को एयर डिफेंस ने रोक लिया, लेकिन कई ने अपना लक्ष्य भेद लिया।
नुकसान और तात्कालिक प्रभाव
हमलों से कुवैत की ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा। शुवैख कॉम्प्लेक्स में आग ने तेल भंडारण और प्रसंस्करण यूनिट्स को नुकसान पहुंचाया। पावर और वॉटर प्लांट्स क्षतिग्रस्त होने से बिजली कटौती और पानी की कमी की आशंका बढ़ गई। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक नुकसान करोड़ों डॉलर में हो सकता है। कुवैत, जो दुनिया का प्रमुख तेल निर्यातक है, इन हमलों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है।
ईरान का दावा है कि ये हमले अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब हैं, जिसमें ईरान की सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया था। कुवैत, जो अमेरिका का करीबी सहयोगी है, अब इस युद्ध की चपेट में आ गया है।
बहरीन की BAPCO Energies सुविधा पर ईरानी हमला: तेल टैंक में आग
हमले का विस्तृत विवरण
इसी दिन बहरीन में भी ईरानी ड्रोन ने BAPCO Energies की स्टोरेज फैसिलिटी पर हमला किया। BAPCO Energies, बहरीन की राष्ट्रीय तेल कंपनी है, जो रोजाना 4 लाख बैरल से ज्यादा तेल प्रसंस्करण करती है। हमले में कंपनी की एक स्टोरेज टैंक में आग लग गई। बहरीन के इंटीरियर मिनिस्ट्री ने पुष्टि की कि यह “होस्टाइल ईरानी ड्रोन अटैक” का नतीजा था।
आग की लपटें आसमान को चीरती दिखाई दीं। कंपनी ने तुरंत इमरजेंसी टीम भेजी और आग पर काबू पा लिया। BAPCO Energies के बयान में कहा गया, “एक स्टोरेज फैसिलिटी में आग लगी, लेकिन इसे पूरी तरह बुझा लिया गया। कोई हताहत नहीं हुआ।”
प्रतिक्रिया, नियंत्रण और सुरक्षा उपाय
बहरीन की सिविल डिफेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई की। सरकारी बयान में लोगों से शांति बनाए रखने और निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई। आग बुझाने के बाद डैमेज असेसमेंट शुरू किया गया। बहरीन सरकार ने इसे “ईरानी आक्रामकता” करार दिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर दिया।
यह हमला बहरीन के सितरा रिफाइनरी क्षेत्र में हुआ, जो देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ है। BAPCO की क्षमता बहरीन की जीडीपी का बड़ा हिस्सा है। हमले ने ऊर्जा सुरक्षा की कमजोरी उजागर की।
क्षेत्रीय प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ये दोनों हमले खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के लिए चेतावनी हैं। ईरान ने UAE, बहरीन और कुवैत सहित कई देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है, हालांकि अभी तक बाजार स्थिर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नहीं खोला गया तो और हमले होंगे। कुवैत और बहरीन ने अमेरिका से सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की मांग की है।
इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। ईरान का कहना है कि ये जवाबी कार्रवाई है, जबकि खाड़ी देश इसे “आक्रामकता” मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये हमले जारी रहे तो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार प्रभावित होंगे।
शांति की मांग और सुरक्षा की चुनौती
5 अप्रैल 2026 के ये ड्रोन हमले ईरान-खाड़ी तनाव को नई ऊंचाई पर ले गए हैं। कुवैत में तेल कॉम्प्लेक्स और पावर प्लांट्स, बहरीन में BAPCO टैंक – ये लक्ष्य ईरान की रणनीति को दिखाते हैं। दोनों देशों ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन लंबे समय में बुनियादी ढांचे की मरम्मत और सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत है।
वैश्विक समुदाय को अब शांति वार्ता के लिए आगे आना चाहिए। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर की कोशिशें तेज होनी चाहिए, वरना खाड़ी क्षेत्र का पूरा ऊर्जा नेटवर्क खतरे में पड़ जाएगा। कुवैत और बहरीन जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण देश अब बड़े युद्ध की भेंट चढ़ रहे हैं।
Sources: अलजजीरा