2 अप्रैल 2026, SC ने बंगाल सरकार को मालदा घटना पर कड़ी फटकार लगाई: को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को मालदा जिले की घटना पर जमकर फटकार लगाई। 1 अप्रैल को मालदा के कालीचौक (मोठाबाड़ी) क्षेत्र के बीडीओ कार्यालय में विशेष गहन समीक्षा (SIR) ड्यूटी पर तैनात 7 न्यायिक अधिकारियों (जिनमें 3 महिलाएं शामिल) को स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। अफसरों को भोजन, पानी या सुरक्षा नहीं दी गई। देर रात पुलिस और केंद्रीय बलों ने पथराव के बीच उन्हें बचाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे “सोची-समझी और उकसावे वाली साजिश” करार दिया।
मालदा घटना की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) शुरू की थी। इसमें 60 लाख से ज्यादा नामों पर आपत्तियां आईं। मालदा में कई लोगों के नाम कटने पर स्थानीय लोग नाराज थे। 1 अप्रैल शाम को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ कार्यालय घेर लिया, राष्ट्रीय राजमार्ग-12 जाम कर दिया और न्यायिक अधिकारियों को अंदर बंधक बना लिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। राज्य प्रशासन को पहले से खुफिया जानकारी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और प्रमुख टिप्पणियां
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “यह घटना न सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को डराने की कोशिश है, बल्कि इस अदालत के अधिकार को सीधा चुनौती है। हमने कभी इतना ध्रुवीकृत राज्य नहीं देखा।” कोर्ट ने इसे “पूर्व-नियोजित, ब्रेजन और आपराधिक अपमान” बताया। बेंच ने राज्य की कानून-व्यवस्था को “पूरी तरह चरमरा” हुआ करार दिया। मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, जिला मजिस्ट्रेट और एसएसपी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। कोर्ट ने पूछा कि पूर्व सूचना के बावजूद अधिकारियों को बचाने में देरी क्यों हुई? CJI ने कहा, “मैं 2 बजे तक सब मॉनिटर कर रहा था – बहुत दुर्भाग्यपूर्ण।”
जांच और सुरक्षा के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि घटना की जांच CBI या NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। कोर्ट खुद जांच की निगरानी करेगा। न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ मालदा की घटना नहीं, बल्कि पूरे राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर हमले का पैटर्न है। बंगाल में SIR के तहत 49 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है, लेकिन विवाद बढ़ रहा है।
ममता बनर्जी और TMC की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना की जानकारी न होने का दावा किया। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा नहीं की। ममता ने कहा, “कानून-व्यवस्था मेरे हाथ से छीन ली गई है।” उन्होंने भाजपा पर राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश का आरोप लगाया। TMC ने इसे “चुनावी साजिश” बताया, जबकि BJP ने ममता सरकार की “अराजकता” पर हमला बोला। विपक्ष ने कहा कि बंगाल में कानून का राज खत्म हो चुका है।
राजनीतिक और चुनावी प्रभाव
यह घटना बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले आई है। SIR प्रक्रिया में नाम कटने से लाखों वोटर प्रभावित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की फटकार ने राज्य सरकार की छवि को और धक्का पहुंचाया है। कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही राज्य प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठा चुका था। अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के दखल से TMC सरकार पर दबाव बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे “बंगाल की कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती” बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती ने साफ संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को कोई बाधित नहीं कर सकता। बंगाल सरकार को अब शो-कॉज नोटिस का जवाब देना होगा। अगर दोषी पाए गए तो अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इस घटना ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है कि क्या पश्चिम बंगाल में चुनाव निष्पक्ष रूप से होंगे? CBI/NIA जांच शुरू होते ही नई पेंच आएगी। फिलहाल मालदा में तनाव जारी है और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। यह घटना बंगाल की राजनीति को और गरमा देगी।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया