27 मार्च 2026, PM नरेंद्र मोदी आज शाम मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे: पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) में जारी युद्ध के प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं। चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर विशेष रूप से मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक बुलाई है।
बैठक का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन और एलपीजी आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन, जमाखोरी-काला बाजारी रोकना और विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा रहेगा। सरकार ने “टीम इंडिया” के मॉडल पर जोर देते हुए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की बात कही है, जैसा कोविड-19 संकट के दौरान किया गया था।
बैठक का संदर्भ और पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष ने अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर लिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ जहाजों पर हमलों और स्ट्रेट को आंशिक रूप से प्रभावित करने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला लगभग 60% तेल आयात इस मार्ग पर निर्भर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में बयान देते हुए कहा था कि यह युद्ध भारत के लिए आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय चुनौतियां पैदा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभाव अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक हो सकते हैं। इसके बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठकें हुईं, जिसमें खाद्य, ऊर्जा, ईंधन और सप्लाई चेन की तैयारियों की समीक्षा की गई।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल स्टॉक उपलब्ध है। एलपीजी के लिए भी पर्याप्त बफर स्टॉक (लगभग 8 लाख टन) सुरक्षित है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि कोई कमी नहीं है और पैनिक खरीदारी या लॉकडाउन जैसी अफवाहें “जानबूझकर फैलाई जा रही गलत सूचना” हैं।
आज की बड़ी घोषणा: एक्साइज ड्यूटी में कटौती
बैठक से ठीक पहले सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। वित्त मंत्रालय ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में भारी कटौती की घोषणा की। पेट्रोल पर इसे 13 रुपये से घटाकर मात्र 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया। इससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि तेल कंपनियों (OMCs) के घाटे को ध्यान में रखते हुए रिटेल कीमतों में तत्काल बड़ा बदलाव नहीं होने की संभावना है।
तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार ने राजस्व का बड़ा हिस्सा छोड़कर तेल कंपनियों को घाटे से बचाने का प्रयास किया है। साथ ही निर्यात पर विंडफॉल टैक्स भी लगाया गया है।
बैठक में क्या चर्चा होने की संभावना?
- ऊर्जा आपूर्ति प्रबंधन: राज्यों में ईंधन वितरण, पेट्रोल पंपों पर स्थिति और जरूरत पड़ने पर राशनिंग की तैयारियां।
- एलपीजी और PNG नीति: जहां पाइप्ड नेचुरल गैस उपलब्ध है, वहां घरेलू एलपीजी सिलेंडर सप्लाई पर नियंत्रण। जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई।
- आंतरिक सुरक्षा: काला बाजारी, अफवाहें फैलाने वालों पर नजर और कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
- विदेश में भारतीय: खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और संभावित निकासी की तैयारियां।
- आर्थिक प्रभाव: उर्वरक की कीमतें, खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण।
- रूस और अन्य स्रोतों से आयात: रूसी तेल आयात बढ़ाने और विविधीकरण की रणनीति।
प्रधानमंत्री मोदी राज्यों से “टीम इंडिया” भावना के साथ काम करने की अपील करेंगे। चुनाव वाले राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल, असम आदि) के मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक भी हो सकती है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने सरकार पर पर्याप्त तैयारी न करने का आरोप लगाया है। कुछ नेताओं ने एलपीजी सिलेंडर नीति को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व, विविध आयात स्रोत (रूस, सऊदी, UAE आदि) और मजबूत विदेश नीति ने अब तक स्थिति को नियंत्रण में रखा है। ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, जो सकारात्मक संकेत है।
आगे की चुनौतियां
यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति और खाद्य कीमतों पर असर पड़ेगा। सरकार ने शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म प्लान तैयार किए हैं। बैठक के बाद राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
यह बैठक केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने का अवसर है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए नागरिकों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा स्टॉक न जमा करें।
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक पश्चिम एशिया संकट के भारत पर प्रभाव को कम करने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैठक के बाद आने वाले फैसले देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।
Sources: हिंदुस्तान टाइम्स