18 मार्च 2026, Trump प्रशासन में बड़ा झटका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में ईरान के साथ चल रहे युद्ध (जो अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है) ने पहला बड़ा आंतरिक विद्रोह देख लिया है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (NCTC) के डायरेक्टर जो केंट ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि ईरान अमेरिका के लिए कोई “तत्काल खतरा” नहीं था और यह युद्ध इजराइल तथा उसके शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया गया।
केंट, जो ट्रंप के लंबे समय से समर्थक, पूर्व ग्रीन बेरेट कमांडो और सज्जित वेटरन हैं, ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक कर दिया। पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं अच्छे विवेक से ईरान के साथ इस चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान ने हमारे राष्ट्र के लिए कोई तत्काल खतरा पैदा नहीं किया था। यह स्पष्ट है कि हमने यह युद्ध इजराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया।” उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वे “कोर्स रिवर्स” करें और युद्ध समाप्त करें।
यह इस्तीफा ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका है क्योंकि केंट 2025 में ही सीनेट द्वारा कन्फर्म होकर इस उच्च पद पर पहुंचे थे। वे MAGA (Make America Great Again) बेस से जुड़े माने जाते थे और पहले ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के कड़े समर्थक रहे। उनकी पत्नी की ISIS हमले में मौत हुई थी, जिसके बावजूद उन्होंने मध्य पूर्व में नई जंगों का विरोध किया। कई विश्लेषक इसे ट्रंप के ईरान नीति पर MAGA गुट में फूट का पहला सार्वजनिक संकेत मान रहे हैं।
ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंट को “सिक्योरिटी पर बहुत कमजोर” बताया और कहा, “यह अच्छी बात है कि वह बाहर हो गया।” व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कारोलाइन लेविट ने केंट के पत्र को “कई झूठे दावों” वाला बताया और जोर देकर कहा कि ट्रंप के पास “मजबूत और आकर्षक सबूत” थे कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गाबर्ड ने भी कहा कि खतरे का आकलन राष्ट्रपति का काम है, जबकि इंटेलिजेंस अधिकारी केवल जानकारी जुटाते हैं।
NATO पर ट्रंप का तीखा हमला
इसी दिन ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर भी जमकर हमला बोला। आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ ओवल ऑफिस में बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अधिकांश NATO देश ईरान युद्ध में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने में मदद न देने पर नाराजगी जताई।
यह जलडमरूमध्य दुनिया की 20% तेल आपूर्ति का मार्ग है। ईरान ने अमेरिका-इजराइल हमलों के जवाब में इसे प्रभावी रूप से बंद कर दिया है — मिसाइल, ड्रोन और माइन्स से टैंकरों को निशाना बनाकर। ट्रंप ने NATO को “बहुत मूर्खतापूर्ण गलती” (very foolish mistake) करने वाला बताया। उन्होंने कहा, “सब हमसे सहमत हैं कि यह जरूरी था, लेकिन मदद करने को तैयार नहीं। अमेरिका को याद रखना चाहिए। मैंने लंबे समय से कहा है कि क्या NATO कभी हमारे लिए खड़ा होगा?”
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है — “हम अकेले ही काम चला लेंगे।” उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जरूरी हुआ तो ईरान के बचे-खुचे शासन को खत्म कर दें और होर्मुज की सुरक्षा उन देशों पर छोड़ दें जो इसका इस्तेमाल करते हैं।
NATO महासचिव मार्क रुट्टे ने कहा कि सहयोगी “सबसे अच्छा तरीका” ढूंढ रहे हैं, लेकिन कई यूरोपीय देश इस युद्ध को “अवैध” मानते हैं और इसमें शामिल होने से बच रहे हैं। फ्रांस समेत कई देशों ने साफ इनकार कर दिया।
युद्ध का संदर्भ और प्रभाव
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। इजराइल ने हाल ही में ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खतीब और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी को मार गिराने का दावा किया। साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गया है — तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ईरान ने जवाबी हमलों में इजराइल, लेबनान और खाड़ी देशों पर मिसाइल दागे हैं।
केंट का इस्तीफा इस युद्ध की वैधता पर सवाल उठाता है। कई पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी और रिपब्लिकन कमेंटेटर (जैसे टकर कार्लसन) पहले से ही ट्रंप पर इजराइल के दबाव में पड़ने का आरोप लगा रहे थे। यह घटना ट्रंप प्रशासन में दरार दिखाती है, खासकर जब घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक ऊर्जा संकट अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
आगे
विश्लेषकों का मानना है कि केंट का जाना तुलसी गाबर्ड जैसे अन्य “अमेरिका फर्स्ट” अधिकारियों के लिए संकेत हो सकता है। सीनेट में आज ग्लोबल थ्रेट्स पर सुनवाई होनी है, जहां इंटेलिजेंस अधिकारी गवाही देंगे। वहीं, होर्मुज में तनाव बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों (जिनका बड़ा हिस्सा इस रूट से तेल आता है) को चिंता है।
ट्रंप प्रशासन ईरान को “परमाणु खतरा” बता रहा है, लेकिन केंट जैसे अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि कोई तत्काल खतरा नहीं था। यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होगी।
Sources: बीबीसी