12 मार्च 2026, स्कूल पर US हमले की रिपोर्ट: अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान युद्ध के पहले दिन, 28 फरवरी 2026 को, एक भयावह घटना ने वैश्विक ध्यान खींचा। दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजराह तय्यिबा (Shajarah Tayyebeh) नामक लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से हमला हुआ, जिसमें कम से कम 165 से 175 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश बच्चे (ज्यादातर लड़कियां) और कुछ शिक्षक शामिल थे। ईरानी राज्य मीडिया और स्वास्थ्य अधिकारियों ने मौतों की संख्या 175 बताई, जबकि कई स्रोतों में 165-168 का आंकड़ा है। यह युद्ध की अब तक की सबसे बड़ी नागरिक हताहत घटनाओं में से एक है, और अमेरिकी सैन्य जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चला है कि यह हमला पुरानी खुफिया जानकारी और टारगेटिंग गलती के कारण हुआ।
घटना का विवरण और समय
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के बड़े पैमाने पर हवाई हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई उच्च अधिकारी मारे गए। इसी दिन, सुबह के समय जब माता-पिता बच्चों को स्कूल से घर ले जाने के लिए पहुंच रहे थे, मिनाब में IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के नौसेना बेस के निकट स्कूल पर हमला हुआ। स्कूल दो मंजिला इमारत था, जो पहले IRGC बेस का हिस्सा था, लेकिन 2016 में इसे अलग कर दिया गया था और अब यह शुद्ध रूप से शैक्षिक संस्थान था।
वीडियो फुटेज, सैटेलाइट इमेजरी और विशेषज्ञ विश्लेषण से पता चलता है कि हमला अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल से हुआ। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने रिपोर्ट किया कि हमले से स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गया, और आसपास की इमारतें भी प्रभावित हुईं। UNESCO ने इसे “मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन” बताया, क्योंकि शिक्षा संस्थानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबंधित है। UN विशेषज्ञों ने स्वतंत्र जांच की मांग की और कहा कि “कक्षा में लड़कियों की हत्या का कोई बहाना नहीं है।”
पुरानी खुफिया जानकारी और टारगेटिंग गलती
अमेरिकी सैन्य जांच (जो पेंटागन द्वारा चलाई जा रही है) के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, हमला टारगेटिंग एरर था। US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) से मिली पुरानी डेटा के आधार पर टारगेट कोऑर्डिनेट्स तैयार किए। इस डेटा में स्कूल को अभी भी IRGC नौसेना बेस का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि वास्तव में यह 10 साल पहले अलग हो चुका था।
रिपोर्ट्स (NYT, Reuters, CNN, AP, Washington Post) से पता चलता है कि:
- CENTCOM अधिकारियों ने पुराने इंटेलिजेंस पर भरोसा किया, बिना अपडेट चेक किए।
- कुछ स्रोतों ने AI-आधारित टारगेटिंग टूल्स की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन मुख्य कारण पुरानी जानकारी बताई गई।
- ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में ईरान या किसी अन्य को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन वीडियो और विशेषज्ञ विश्लेषण से टॉमहॉक मिसाइल की पहचान हुई, जो अमेरिकी हथियार है।
यह घटना पिछले दो दशकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों से जुड़ी सबसे बड़ी नागरिक हताहत घटनाओं में से एक है, जैसे 2021 काबुल ड्रोन स्ट्राइक।
अमेरिकी खर्च: पहले 6 दिनों में $11.3 बिलियन
स्कूल हमले के साथ ही युद्ध की आर्थिक लागत भी चौंकाने वाली है। पेंटागन ने कांग्रेस को क्लोज्ड-डोर ब्रीफिंग में बताया कि युद्ध के पहले 6 दिनों (28 फरवरी से 5 मार्च तक) में अमेरिका पर $11.3 बिलियन से अधिक खर्च हो चुका है। यह आंकड़ा मुख्य रूप से हथियारों और मुनिशन्स पर है:
- पहले 2 दिनों में ही $5.6 बिलियन के मुनिशन्स इस्तेमाल हुए।
- कुल लागत में ऑपरेशनल खर्च, रखरखाव और ईरानी हमलों से अमेरिकी बेसों को हुए नुकसान शामिल नहीं हैं, इसलिए वास्तविक आंकड़ा और बढ़ सकता है।
- विशेषज्ञों का अनुमान है कि रोजाना $1-2 बिलियन खर्च हो रहा है, और यदि युद्ध लंबा चला तो कुल लागत $100 बिलियन तक पहुंच सकती है।
यह खर्च अमेरिकी बजट में शामिल नहीं था, इसलिए ट्रंप प्रशासन को कांग्रेस से अतिरिक्त फंडिंग मांगनी पड़ सकती है। यह राशि राष्ट्रीय कैंसर इंस्टीट्यूट ($7.4 बिलियन) से अधिक और हेड स्टार्ट प्रोग्राम ($12.4 बिलियन) के करीब है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
- UN और UNESCO ने हमले की निंदा की और जांच की मांग की।
- अमेरिकी सीनेट डेमोक्रेट्स ने डिफेंस सेक्रेटरी पेट हेगसेथ से तत्काल जांच और नागरिक हानि कम करने के कदमों की जानकारी मांगी।
- ईरान ने इसे “युद्ध अपराध” बताया और बदला लेने की धमकी दी।
- यह घटना युद्ध के नैतिक और राजनीतिक पहलुओं पर सवाल उठा रही है, खासकर जब ट्रंप ने युद्ध को “जल्द खत्म” होने का दावा किया है।
शजराह तय्यिबा स्कूल पर हमला युद्ध की क्रूरता का प्रतीक बन गया है। पुरानी खुफिया जानकारी से हुई यह गलती सैकड़ों निर्दोष बच्चों की जान ले गई और अमेरिकी सैन्य प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। साथ ही, $11.3 बिलियन का शुरुआती खर्च दिखाता है कि यह संघर्ष कितना महंगा और लंबा हो सकता है। स्थिति तेजी से बदल रही है।
Sources: न्यूयॉर्क टाइम्स