11 मार्च 2026, ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध का असर, भारत में LPG/गैस संकट गहराया: मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते जहाजों की आवाजाही रुकने से भारत में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 80-85% आयात करता है, जिसमें से अधिकांश पश्चिम एशिया से आता है। युद्ध के 11वें दिन तक स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कमर्शियल सिलेंडरों की भारी कमी से होटल, रेस्तरां, कैंटीन और रेलवे कैटरिंग प्रभावित हो गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में मेन कोर्स बंद कर दिया गया, जबकि IRCTC ने सभी स्टेशनों पर इंडक्शन और माइक्रोवेव जैसे वैकल्पिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। केंद्र सरकार ने बार-बार आश्वासन दिया है कि घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीन पर हकीकत अलग है।
युद्ध का सीधा असर: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध लगाए, जहां से दुनिया का 20% तेल और बड़ा हिस्सा एलएनजी/एलपीजी गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से 40-50% क्रूड ऑयल, 50-60% एलएनजी और 80-85% एलपीजी आयात होता है। युद्ध शुरू होने के बाद जहाजों की आवाजाही ठप हो गई, जिससे वैश्विक कीमतों में 30-50% तक उछाल आया। भारत में कमर्शियल 19 किग्रा सिलेंडर की कीमत 1,883 रुपये पहुंच गई (पहले 1,768.50 रुपये), जबकि घरेलू 14.2 किग्रा सिलेंडर 913 रुपये हो गया (60 रुपये बढ़ोतरी)।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए, लेकिन स्टॉक केवल 2-3 हफ्तों का बचा है। सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट (ESMA) लागू कर दिया, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई। उद्योगों को 80% सप्लाई ही मिल रही है। चार प्रमुख सेक्टरों – घरेलू, अस्पताल, शिक्षा और जरूरी सेवाओं – को प्राथमिकता दी गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट कैंटीन में संकट: मेन कोर्स बंद
दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में कमर्शियल सिलेंडर खत्म होने से बुधवार को मेन कोर्स (दाल-चावल, सब्जी आदि) बंद कर दिया गया। वकील और स्टाफ को सिर्फ स्नैक्स और चाय उपलब्ध कराई गई। एक वकील ने बताया, “गैस नहीं मिल रही, इसलिए पूर्ण भोजन नहीं बन पा रहा।” यह सिर्फ एक उदाहरण है – मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे और चंडीगढ़ में भी होटल-रेस्तरां 20-30% बंद हो चुके हैं या मेन्यू काट रहे हैं। कई जगह लकड़ी के चूल्हे या इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा लिया जा रहा है।
IRCTC का बड़ा कदम: इंडक्शन-माइक्रोवेव पर स्विच
भारतीय रेलवे की कैटरिंग कंपनी IRCTC ने सभी स्टेशनों और ट्रेनों में LPG संकट को देखते हुए अलर्ट जारी किया। स्टेशनों पर खान-पान यूनिट्स को इंडक्शन, माइक्रोवेव और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल शुरू करने के निर्देश दिए गए। एक IRCTC अधिकारी ने कहा, “ट्रेनों में पका हुआ खाना प्रभावित हो सकता है, इसलिए यात्रियों को अपना टिफिन साथ रखने की सलाह दी जा रही है।” कई स्टेशनों पर अब इंडक्शन से चाय-नाश्ता बनाया जा रहा है। यह कदम लाखों यात्रियों को प्रभावित कर सकता है, खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में।
घरेलू गैस पर चिंता: केंद्र का आश्वासन vs हकीकत
केंद्र सरकार, पेट्रोलियम मंत्री और पीएम मोदी ने कहा है कि घरेलू LPG की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त रिजर्व हैं। घबराने की जरूरत नहीं। लेकिन कई शहरों में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। 25 दिन का अनिवार्य इंटर-बुकिंग गैप लागू कर जमाखोरी रोकी जा रही है।
विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस और TMC ने कहा कि अमेरिका-इजरायल का साथ देने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो एलपीजी की बड़ी समस्या आएगी। इंडक्शन चूल्हों की बिक्री अचानक 10 गुना बढ़ गई, और संबंधित कंपनियों के शेयर 10% तक उछले।
व्यापक प्रभाव और आगे की राह
यह संकट सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं – यूरिया प्लांट बंद हो रहे हैं, खाद की कमी से किसान प्रभावित। होटल-रेस्तरां उद्योग में लाखों रोजगार खतरे में। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, वैकल्पिक स्रोत (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) से आयात और सब्सिडी जारी रखने के कदम उठाए हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे युद्ध में कीमतें और बढ़ेंगी, महंगाई चरम पर पहुंच सकती है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता पर सवाल उठ रहे हैं। यह संकट “डिग्निटी इन एनर्जी सिक्योरिटी” की याद दिलाता है – जहां वैश्विक संघर्ष सीधे आम आदमी की थाली प्रभावित कर रहे हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आधिकारिक अपडेट्स के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय या IOCL की वेबसाइट चेक करें।
Sources: एनडीटीवी