11 मार्च 2026, Strait of Hormuz में जहाजों पर हमले तेज, ईरान ने तेल आपूर्ति लगभग रोक दी: अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह से संकटग्रस्त बना दिया है। यह संकीर्ण जलमार्ग, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20-21% हिस्सा संभालता है (प्रतिदिन औसतन 20-21 मिलियन बैरल तेल), अब प्रभावी रूप से बंद हो चुका है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है।
हमलों की ताजा घटनाएं
आज (11 मार्च 2026) सुबह ब्रिटिश मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रिपोर्ट की कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तीन कमर्शियल जहाजों पर प्रोजेक्टाइल हमले हुए, जिसमें एक जहाज में आग लग गई। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों को “प्रतिकारी कार्रवाई” बताया है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी 2026) के बाद से अब तक कम से कम 10-12 जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिसमें कई सीफेयरर्स की मौत की आशंका जताई जा रही है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज – खासकर तेल टैंकर – सुरक्षित रूप से नहीं गुजरेगा। IRGC के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़क़ारी ने कहा: “क्षेत्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने वालों के लिए तैयार रहें – तेल $200 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा!”
ईरान ने माइन बिछाने की कोशिश की, जिसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कल (10 मार्च) 16 ईरानी माइन-लेइंग जहाजों को नष्ट कर दिया। अमेरिका ने वीडियो जारी कर दावा किया कि ये जहाज स्ट्रेट में माइन बिछा रहे थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी: “अगर ईरान ने माइन डाले तो अमेरिका 20 गुना ज्यादा जोर से जवाब देगा।” हालांकि, ईरान का दावा है कि स्ट्रेट अब “शांति का मार्ग” या “पराजय का गलियारा” बनेगा – कोई बीच का रास्ता नहीं।
तेल आपूर्ति पर प्रभाव
युद्ध शुरू होने के बाद टैंकर ट्रैफिक लगभग शून्य हो गया है। रॉयटर्स और एनपीआर की रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 फरवरी को 37 टैंकर गुजरते थे, लेकिन अब दैनिक आधार पर शून्य। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति में 4-5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें शुरू में $118-120 तक पहुंचीं, लेकिन कुछ राहत और अमेरिकी हमलों के बाद अब $90-95 के आसपास अस्थिर हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर ब्लॉकेड लंबा चला तो कीमतें $150-200 तक जा सकती हैं। ईरान ने कहा है कि “एक भी लीटर तेल बाहर नहीं निकलेगा” और पाइपलाइनों पर भी हमले करेगा।
सऊदी अरामको ने “विनाशकारी परिणाम” की चेतावनी दी है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 32 सदस्य देशों ने 400 मिलियन बैरल आपातकालीन तेल भंडार रिलीज करने का फैसला किया है – 2022 यूक्रेन युद्ध के बाद सबसे बड़ा कदम। जापान, जर्मनी और अन्य देश तेल बचत के उपाय कर रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसा लग रहा है। मुद्रास्फीति बढ़ने, शेयर बाजार गिरने और परिवहन लागत बढ़ने का खतरा है। कई देशों में ईंधन राशनिंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं – स्कूल बंद, 4-दिन कार्य सप्ताह, सरकारी वाहनों में 60% कटौती। भारत में भी पेट्रोल-डीजल कीमतों में उछाल की आशंका है।
UN ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज का बंद होना दुनिया के सबसे कमजोर लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा, क्योंकि उर्वरक निर्यात भी प्रभावित हो रहा है, जो वैश्विक खाद्य आपूर्ति को खतरे में डाल सकता है।
क्या होगा आगे?
ट्रंप प्रशासन स्ट्रेट को “कब्जे” में लेने या एस्कॉर्ट प्रदान करने की बात कर रहा है, लेकिन ईरान के एंटी-शिप मिसाइल और ड्रोन से यह जोखिम भरा है। पूर्व NATO कमांडर जेम्स स्टाव्रिडिस ने कहा कि ईरान 5,000+ माइन से स्ट्रेट को “हेलस्केप” बना सकता है। राजनयिक प्रयास जारी हैं, लेकिन फिलहाल युद्ध तेज है – इज़राइल ने तेहरान और बेरूत पर हमले किए, ईरान ने जवाबी मिसाइल दागे।
यह संकट वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की कमजोरियां उजागर कर रहा है। हॉर्मुज जैसी निर्भरता अब बड़ा खतरा बन गई है। अगर युद्ध लंबा चला तो महंगाई, मंदी और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। दुनिया को उम्मीद है कि जल्द कोई समाधान निकले, वरना आर्थिक झटका दूरगामी होगा।
Sources: ब्लूमबर्ग