10 मार्च 2026, LPG संकट का असर: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है, जहां से भारत की LPG (Liquefied Petroleum Gas) आयात का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत अपनी कुल LPG जरूरत का 80-85% आयात करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट (कतर, सऊदी अरब, यूएई) का योगदान 90% से ज्यादा है। युद्ध से सप्लाई चेन टूट गई, जिसके परिणामस्वरूप कमर्शियल LPG (19 किलो सिलेंडर) की सप्लाई रुक गई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं (14.2 किलो सिलेंडर) को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सेक्टर पर अस्थायी रोक लगाई है। इससे सीमांचल (पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार आदि) जैसे क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं—कई बंद होने की कगार पर हैं। ब्लैक मार्केट में कीमतें आसमान छू रही हैं, और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। (शब्द गिनती: लगभग 800)
संकट की वजह: होर्मुज स्ट्रेट का प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और गैस का 20-25% गुजरता है। ईरान की धमकियों और युद्ध की स्थिति में सैकड़ों टैंकर फंस गए हैं। भारत की मासिक LPG मांग करीब 3 मिलियन टन है, जिसमें आयात का हिस्सा 62% है। मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई 95% होर्मुज से गुजरती है। युद्ध शुरू होने के बाद से जहाज रुक गए, जिससे भारत के पास स्टॉक केवल 10-30 दिनों का बचा है।
सरकार ने 5 मार्च को रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए। घरेलू बुकिंग अंतराल 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि होर्डिंग रोकी जा सके। कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो, 47.5 किलो आदि) की सप्लाई अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं तक सीमित कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने Natural Gas Supply Regulation Order 2026 जारी किया, जिसमें घरेलू, CNG, LPG उत्पादन और फर्टिलाइजर को प्राथमिकता दी गई है।
सीमांचल में कमर्शियल सेक्टर पर प्रभाव सीमांचल बिहार का पिछड़ा लेकिन घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां छोटे-मोटे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट रोजगार का मुख्य स्रोत हैं। कमर्शियल LPG की कमी से यहां स्थिति गंभीर है:
- पूर्णिया और किशनगंज: कई ढाबे और छोटे होटल 2-3 दिनों के स्टॉक पर चल रहे हैं। स्थानीय एसोसिएशन के अनुसार, अगर सप्लाई नहीं बहाल हुई तो 50% तक बंद हो सकते हैं।
- अररिया और कटिहार: सीमा क्षेत्र होने से नेपाल से आने वाले पर्यटक और ट्रक ड्राइवरों पर निर्भर ढाबे प्रभावित। कई जगहों पर मेन्यू सीमित कर दिया गया—धीमी आंच वाले व्यंजन (जैसे बिरयानी, परांठा) हटा दिए गए।
- ब्लैक मार्केट: घरेलू सिलेंडर ब्लैक में ₹1,400 तक बिक रहे हैं। कमर्शियल सिलेंडर ₹2,000+ पर उपलब्ध, लेकिन सप्लाई अनियमित।
राष्ट्रीय स्तर पर FHRAI (Federation of Hotel and Restaurant Associations of India) और NRAI ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति बनी रही तो लाखों रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं। बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई में पहले से ही 20-50% बंद होने की आशंका जताई गई है। सीमांचल में छोटे व्यवसाय होने से असर और गहरा है—हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। फूड डिलीवरी (Swiggy, Zomato) पर भी असर, ऑर्डर कम हो रहे हैं।
सरकारी कदम और राहत प्रयास पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन सदस्यीय कमिटी (IOCL, BPCL, HPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) गठित की है, जो होटल-रेस्टोरेंट की शिकायतों की समीक्षा करेगी। रिफाइनरियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं—पेट्रोकेमिकल्स में प्रोपेन-ब्यूटेन का इस्तेमाल रोका गया।
कीमतें बढ़ी हैं: दिल्ली में घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर ₹1013 (₹60 बढ़ोतरी), कमर्शियल 19 किलो ₹1,983 (₹115 बढ़ोतरी)। सरकार का दावा है कि घरेलू सप्लाई सुरक्षित है—33 करोड़ कनेक्शन प्रभावित नहीं होंगे। अमेरिका से आयात बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन मात्रा कम है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव सीमांचल में होटल-रेस्टोरेंट उद्योग रोजगार और पर्यटन का आधार है। बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है। महंगाई बढ़ेगी—खाना बाहर से महंगा या उपलब्ध नहीं। छात्र, यात्री और मजदूर प्रभावित। ब्लैक मार्केट से अपराध बढ़ने की आशंका। लंबे समय में अगर युद्ध चला तो तेल महंगाई से पूरा क्षेत्र प्रभावित होगा।
ईरान युद्ध का भारत पर सीधा असर LPG संकट के रूप में सामने आया है। घरेलू उपयोग सुरक्षित रखने के लिए कमर्शियल सेक्टर को बलिदान दिया जा रहा है, लेकिन इससे सीमांचल जैसे क्षेत्रों में लाखों व्यवसाय संकट में हैं। सरकार को वैकल्पिक आयात (अमेरिका, अन्य स्रोत) तेज करना होगा और डिप्लोमैटिक प्रयासों से होर्मुज मार्ग खुलवाना होगा। अगर 1-2 हफ्ते में राहत नहीं मिली तो बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। स्थानीय व्यापारी और आम आदमी राहत की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन स्थिति फ्लूइड है।
Sources: इकनोमिक टाइम्स