Historic change of power in IranHistoric change of power in Iran

9 मार्च 2026, Iran में सत्ता का ऐतिहासिक बदलाव: आज ईरान की राजनीति में एक अभूतपूर्व और विवादास्पद मोड़ आया, जब मौजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। यह फैसला उनके पिता, अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के महज 9 दिनों बाद हुआ, जिनकी मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। यह घटना न केवल ईरान के आंतरिक ढांचे को हिला रही है, बल्कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को और भयावह बना रही है।

अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या: युद्ध की शुरुआत अयातुल्लाह अली खामेनेई, जो 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे, 86 वर्ष की उम्र में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नामक अमेरिका-इजरायल के बड़े सैन्य अभियान में मारे गए। हमले 28 फरवरी को तेहरान में उनके आवास और कार्यालय पर किए गए, जिसमें कई वरिष्ठ आईआरजीसी कमांडर और अन्य नेता भी मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “इतिहास के सबसे बुरे तानाशाहों में से एक” की मौत बताया। ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को मौत की पुष्टि की और 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक तथा 7 दिनों की छुट्टी घोषित की।

तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग शोक मनाते और बदला मांगते नजर आए। पश्चिमी देशों में राहत की सांस ली गई, जबकि शिया समुदायों और कई मुस्लिम देशों में गुस्सा भड़का। भारत सहित कई देशों ने आधिकारिक रूप से शोक संवेदना व्यक्त की। यह हत्या 2026 ईरान युद्ध की शुरुआत थी, जिसमें अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं।

मौजतबा खामेनेई: छिपे हुए प्रभाव से सत्ता के शिखर तक मौजतबा खामेनेई (56 वर्ष) अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। वे लंबे समय से पर्दे के पीछे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाते रहे—खुफिया, सैन्य और राजनीतिक मामलों में पिता के सबसे करीबी सलाहकार। हार्डलाइनर विचारधारा वाले मौजतबा अमेरिका-विरोध, इजरायल-विरोध और क्षेत्रीय “प्रतिरोध अक्ष” (हिजबुल्लाह, हमास आदि) की नीतियों को जारी रखने के पक्षधर हैं।

वे कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाले, लेकिन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स और आईआरजीसी के बीच उनकी मजबूत पकड़ रही। अमेरिका ने उन पर पहले से प्रतिबंध लगाए हुए हैं। युद्ध की शुरुआत में उनकी पत्नी और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार एक बच्चे की भी मौत हुई थी। उनकी नियुक्ति को “खामेनेई राजवंश” की शुरुआत कहा जा रहा है, जो इस्लामी गणराज्य के सिद्धांतों (जहां सुप्रीम लीडर को धार्मिक योग्यता पर चुना जाता है) से अलग है।

उत्तराधिकार की प्रक्रिया और तेज फैसला ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर की मौत पर 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नया नेता चुनती है। अली खामेनेई की हत्या के बाद अंतरिम तीन सदस्यीय परिषद बनी, लेकिन युद्ध की स्थिति में फैसला जल्दबाजी में लिया गया। 8 मार्च को असेंबली ने मौजतबा को चुना। ईरानी सेना, आईआरजीसी और राजनीतिक नेताओं ने तुरंत निष्ठा की शपथ ली। राज्य टीवी ने इसे “राष्ट्रीय एकता का प्रतीक” बताया।

यह फैसला ट्रम्प प्रशासन की उम्मीदों पर पानी फेरता है, जिन्होंने “रिजीम चेंज” और अधिक उदार नेता की आशा जताई थी। ट्रम्प ने मौजतबा की नियुक्ति पर नाराजगी जताई और कहा कि “बिना मेरी मंजूरी वाला नेता ज्यादा दिन नहीं टिकेगा”।

युद्ध पर गहरा असर और वैश्विक प्रभाव मौजतबा की नियुक्ति के साथ युद्ध और तेज हो गया। इजरायल ने तेहरान और बेरूत पर नए हमले किए, जबकि ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर गईं, वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई। लेबनान में विस्थापन बढ़ा, गल्फ देशों में अलर्ट जारी है।

मौजतबा की हार्डलाइन नीति से युद्ध लंबा खिंच सकता है। वे परमाणु कार्यक्रम और प्रॉक्सी सपोर्ट जारी रखेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह “हार्डलाइनर्स की पकड़ मजबूत” करता है, लेकिन आंतरिक असंतोष (आर्थिक संकट, प्रदर्शन) बढ़ सकता है। फरीद जकारिया जैसे विश्लेषकों ने इसे “युद्ध के लिए बहुत बुरा संकेत” बताया।

आगे की चुनौतियां और अनिश्चित भविष्य मौजतबा के सामने युद्ध में जीवित रहना, अर्थव्यवस्था संभालना और अंतरराष्ट्रीय अलगाव जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। उनकी नियुक्ति से ईरान में “राजवंशीय” शासन की शुरुआत मानी जा रही है, जो भविष्य में बड़े विरोध पैदा कर सकती है।

यह मोड़ मध्य पूर्व की राजनीति को स्थायी रूप से बदल सकता है। दुनिया अब देख रही है कि मौजतबा खामेनेई युद्ध को कैसे संभालते हैं—बदला लेते हैं या बातचीत की राह अपनाते हैं। फिलहाल, ईरान एकजुट दिख रहा है, लेकिन अंदरूनी दरारें उभर सकती हैं। यह ऐतिहासिक घटना ईरान के भविष्य और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा प्रभाव डालेगी।

Sources: अल-जज़ीरा

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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