7 मार्च 2026, Fake News- सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नया UT नहीं बन रहा: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक खतरनाक अफवाह तेजी से फैल रही है कि केंद्र सरकार बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार) और पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों (मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्षेत्र) को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory – UT) बनाने की योजना बना रही है। इस दावे को “सुरक्षा कारणों” और “रणनीतिक महत्व” से जोड़ा जा रहा था, लेकिन सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने शनिवार को इस पूरी अफवाह को फर्जी करार देते हुए स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। PIB ने X (पूर्व Twitter) पर पोस्ट किया: “यह दावा फेक है। भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
अफवाह का दावा क्या था?
वायरल पोस्ट्स और मैसेजेस में दावा किया जा रहा था कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है) की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों को अलग कर एक नया UT बना रही है। इसमें शामिल जिले:
- बिहार से: पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार (सीमांचल क्षेत्र)
- पश्चिम बंगाल से: मालदा, उत्तर दिनाजपुर, और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास के इलाके
कुछ पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि यह कदम “घुसपैठ, आतंकवाद, फेक करेंसी” जैसी समस्याओं से निपटने के लिए है, और इससे पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव मजबूत होगा। अफवाह इतनी तेजी से फैली कि किशनगंज, अररिया जैसे जिलों में लोग इसे सच मानकर चर्चा करने लगे। कुछ यूजर्स ने इसे “बिहार का विभाजन” करार दिया और राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए।
PIB फैक्ट चेक: क्या कहा सरकार ने?
PIB Fact Check Unit ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया:
- “सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर नया UT बना रही है। यह दावा फेक है।”
- “भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”
- “ऐसी जानकारी गुमराह करने वाली है, इसे शेयर न करें।”
PIB ने वायरल पोस्ट्स की स्क्रीनशॉट्स शेयर कर लोगों से आग्रह किया कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों संवेदनशील है?
अफवाह फैलने का मुख्य कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत है। यह पश्चिम बंगाल में 20-22 किलोमीटर चौड़ी और लगभग 60 किलोमीटर लंबी संकरी पट्टी है, जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के 8 राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम) से जोड़ती है। इसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है क्योंकि यह बेहद संकरी है और चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश से घिरा है। यहां घुसपैठ, तस्करी, फेक करेंसी और सुरक्षा चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई।
कुछ लोग इसे “सुरक्षा मजबूती” से जोड़कर अफवाह फैला रहे थे, लेकिन PIB ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्लान नहीं है।
अफवाह क्यों फैली?
- सोशल मीडिया का रोल: X, WhatsApp, Facebook पर बिना स्रोत के पोस्ट्स वायरल हुए। कुछ यूजर्स ने इसे “बिहार विभाजन” या “कांग्रेसी/ममता विरोधी” एजेंडा बताया।
- स्थानीय संवेदनशीलता: सीमांचल क्षेत्र में नेपाल-बांग्लादेश बॉर्डर होने से घुसपैठ की शिकायतें आम हैं। लोग इसे “समस्या का समाधान” मानकर शेयर कर रहे थे।
- पिछले उदाहरण: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में UT बनने के बाद ऐसे दावे आम हो गए हैं।
क्या होगा असर?
यह अफवाह बिहार के सीमांचल जिलों (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया) में अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकती है। लोग संपत्ति, पहचान और राजनीतिक स्थिति पर चिंतित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फेक न्यूज से सामाजिक सद्भाव प्रभावित होता है और सरकारी संसाधन बर्बाद होते हैं।
PIB ने स्पष्ट कर दिया है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास कोई नया UT नहीं बन रहा। यह पूरी तरह फर्जी अफवाह है। लोग आधिकारिक स्रोतों (PIB, सरकार की वेबसाइट) से जानकारी लें और बिना पुष्टि के कुछ भी शेयर न करें। फेक न्यूज से बचना हमारी जिम्मेदारी है—खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में।
Sources: PIB X-हैंडल