6 मार्च 2026, Nepal चुनाव 2026: नेपाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत मिल रहा है। 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों के मतगणना के शुरुआती रुझानों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह (बालेन्द्र शाह) के नेतृत्व वाली RSP पार्टी अब 100 से अधिक सीटों पर लीड कर रही है, जबकि पारंपरिक दलों जैसे CPN-UML (केपी शर्मा ओली की पार्टी) और नेपाली कांग्रेस पीछे छूट गए हैं। यह चुनाव पिछले साल के जन-आंदोलन (Gen Z विरोध प्रदर्शन) के बाद पहला आम चुनाव है, जिसमें युवा वोटरों ने भ्रष्टाचार, अस्थिर सरकार और पुरानी राजनीति के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। RSP का यह उभार युवा पीढ़ी की ताकत और बदलाव की चाहत को दर्शाता है।
चुनाव की पृष्ठभूमि और RSP का उदय
नेपाल में 2025 में Gen Z नेतृत्व वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया था। इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी और युवाओं ने भ्रष्टाचार-मुक्त, स्थिर और युवा-केंद्रित राजनीति की मांग की। इसी पृष्ठभूमि में RSP, जो 2022 में बनी थी, ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। बालेन शाह, जो 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू मेयर बने थे, RSP में शामिल होकर पार्टी के प्रमुख चेहरा बन गए। पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोध, सुशासन, युवा रोजगार और आर्थिक सुधारों पर फोकस किया। RSP ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया और चुनाव में युवा वोटरों को आकर्षित किया।
चुनाव में कुल 275 सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें 165 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) से और बाकी समानुपातिक प्रतिनिधित्व से भरी जाती हैं। मतदान शांतिपूर्ण रहा और लगभग 60% मतदाताओं ने हिस्सा लिया। मतगणना 6 मार्च से शुरू हुई और शाम तक RSP ने स्पष्ट बढ़त बना ली।
शुरुआती रुझान: RSP की लैंडस्लाइड जीत की ओर
मतगणना के नवीनतम अपडेट्स (शाम 7 बजे तक) के अनुसार:
- RSP 100+ सीटों (कुछ रिपोर्ट्स में 103 से 110 तक) पर लीड कर रही है, जिसमें कई सीटों पर जीत दर्ज हो चुकी है।
- RSP ने काठमांडू की कई सीटों (जैसे काठमांडू-1, काठमांडू-6 आदि) पर जीत हासिल की है।
- अन्य पार्टियां काफी पीछे हैं: CPN-UML कुछ सीटों पर लीड, नेपाली कांग्रेस भी कमजोर।
- RSP अब स्पष्ट बहुमत (138+ सीटें) की ओर बढ़ रही है, जो एक नई सरकार बनाने के लिए पर्याप्त है।
यह प्रदर्शन RSP के लिए ऐतिहासिक है। पार्टी ने पूरे देश में, खासकर शहरी और युवा-बहुल इलाकों में मजबूत पकड़ बनाई। मोरंग, झापा, काठमांडू वैली और अन्य क्षेत्रों में RSP उम्मीदवार आगे हैं।
केपी ओली का झटका: अपने गढ़ झापा-5 में भी पीछे
सबसे बड़ा उलटफेर झापा-5 सीट पर हुआ, जहां RSP के बालेन शाह CPN-UML प्रमुख और चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़े अंतर से पीछे छोड़ रहे हैं। शुरुआती गिनती में बालेन शाह को 10,000+ वोट मिले, जबकि ओली को सिर्फ 2,000-3,000 के आसपास। कुछ रिपोर्ट्स में अंतर 8,000-10,000 वोटों का बताया गया है। झापा ओली का पारंपरिक गढ़ रहा है, जहां वे 2017 और 2022 में जीते थे। बालेन शाह का यहां उतरना एक साहसिक कदम था, जो अब जीत की ओर है। यह ओली और पुरानी कम्युनिस्ट राजनीति के लिए बड़ा झटका है।
युवा क्रांति और राजनीतिक बदलाव का संकेत
RSP की सफलता Gen Z और युवा मतदाताओं की ताकत दिखाती है। पिछले चुनावों में पारंपरिक दल (नेपाली कांग्रेस, UML, माओवादी) हावी रहे थे, लेकिन अब युवा बदलाव चाहते हैं। बालेन शाह की रैप बैकग्राउंड, सोशल मीडिया प्रभाव और सुशासन का वादा युवाओं को आकर्षित किया। RSP ने भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट पर फोकस किया, जो नेपाल में आम मुद्दे हैं।
नेपाली कांग्रेस के गगन थापा और अन्य नेताओं ने भी युवा मुद्दों पर बात की, लेकिन RSP ने इसे सबसे बेहतर तरीके से पेश किया। चुनाव आयोग के अनुसार, परिणाम शुक्रवार शाम या शनिवार तक स्पष्ट हो सकते हैं। अगर RSP बहुमत हासिल करती है, तो बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
नेपाल में नया युग?
यह चुनाव नेपाल की राजनीति में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो रहा है। RSP की लीड युवा-केंद्रित, भ्रष्टाचार-मुक्त और स्थिर सरकार की उम्मीद जगाती है। केपी ओली जैसे वरिष्ठ नेताओं का पीछे छूटना पुरानी राजनीति के अंत का संकेत है। दुनिया की नजरें अब नेपाल पर टिकी हैं—क्या यह बदलाव स्थायी होगा या फिर गठबंधन की राजनीति जारी रहेगी?
Sources: एनडीटीवी