5 मार्च 2026, Nepal में ऐतिहासिक चुनाव: को नेपाल में संसदीय चुनाव (House of Representatives) के लिए मतदान जारी है। यह देश के लिए एक निर्णायक मोड़ है—पिछले साल सितंबर 2025 में हुए Gen Z-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला आम चुनाव। इन प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक ठहराव और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूटने दिया था। कम से कम 77 लोगों की मौत हुई, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा, और अंततः तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। संसद भंग हुई और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। अब लगभग 1.89 करोड़ पंजीकृत मतदाता (कुल आबादी 3 करोड़) 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा चुन रहे हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चल रहा है, और चुनाव आयोग को उम्मीद है कि टर्नआउट 65% से अधिक रहेगा। परिणाम 9 मार्च तक आने की संभावना है।
Gen Z आंदोलन की पृष्ठभूमि सितंबर 2025 में शुरू हुए प्रदर्शन पहले सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ थे, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार, युवा बेरोजगारी (20%+), धन असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ बड़े विद्रोह में बदल गया। हजारों युवा, छात्र और टीनएजर्स सड़कों पर उतरे। काठमांडू में संसद भवन और सरकारी इमारतों पर हमले हुए। प्रदर्शनकारी “पुरानी राजनीति” के खिलाफ थे—CPN-UML, Nepali Congress और Maoist Centre जैसी पार्टियां दशकों से सत्ता में हैं, लेकिन युवाओं के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया। इन प्रदर्शनों ने नेपाल को हिला दिया और अंतरिम सरकार ने चुनाव कराने का वादा किया। यह चुनाव Gen Z की राजनीतिक ताकत का पहला बड़ा परीक्षण है—क्या युवा वोट पुरानी पार्टियों को सत्ता से बाहर कर पाएंगे?
चुनाव की व्यवस्था और सुरक्षा चुनाव मिश्रित प्रणाली से हो रहा है: 165 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (सीधे मतदान) से और 110 सीटें समानुपातिक प्रतिनिधित्व से। कुल 3,406 उम्मीदवार 165 सीटों के लिए और 3,135 समानुपातिक के लिए मैदान में हैं। 10,967 मतदान केंद्र और 23,112 बूथ बनाए गए हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं—हजारों सैनिक और पुलिस तैनात। अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने मतदाताओं से “बिना डर के” वोट डालने की अपील की। दोपहर तक टर्नआउट 18-25% तक पहुंच चुका था, और काठमांडू वैली में यह 36% तक था। चुनाव आयोग के प्रमुख राम प्रसाद भंडारी ने कहा कि गिनती जल्द पूरी होगी।
प्रमुख नेता और पार्टियां: पुराना vs नया यह चुनाव पीढ़ीगत टकराव का है। मुख्य चेहरे:
- केपी शर्मा ओली (CPN-UML): 75 वर्षीय वरिष्ठ कम्युनिस्ट, चार बार प्रधानमंत्री। वे वापसी की कोशिश में हैं, लेकिन Gen Z विरोध के कारण मुश्किल स्थिति में। उनकी पार्टी पुरानी व्यवस्था का प्रतीक मानी जाती है।
- गगन थापा (Nepali Congress): 49 वर्षीय सुधारवादी, पार्टी के नए अध्यक्ष। वे पुरानी व्यवस्था में बदलाव का वादा कर रहे हैं। धनुषा-4 से चुनाव लड़ रहे हैं ताकि तराई में प्रभाव बढ़ा सकें। युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश।
- बालेन शाह (बालेन्द्र शाह, Rastriya Swatantra Party – RSP): 35 वर्षीय पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर। RSP (तीन साल पुरानी) युवाओं में जबरदस्त लोकप्रिय। बालेन को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वे “बदलाव” और एंटी-एस्टेब्लिशमेंट का चेहरा हैं। झापा जैसे क्षेत्रों में भी उनकी रैलियां भर रही हैं।
अन्य प्रमुख: पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (CPN-Maoist Centre) और रवि लामिछाने (RSP)।
मुख्य मुद्दे जो चुनाव को गर्म कर रहे हैं
- युवा बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था: सबसे बड़ा मुद्दा—युवा रोजगार चाहते हैं।
- भ्रष्टाचार और शासन: प्रदर्शनों का मूल कारण।
- राजनीतिक अस्थिरता: नेपाल में सरकारें बार-बार गिरती रही हैं।
- विदेश नीति: भारत-चीन प्रभाव पर बहस, RSP त्रिपक्षीय आर्थिक साझेदारी का वादा कर रही है।
- युवा भागीदारी: Gen Z मतदाता निर्णायक—कई उम्मीदवार 40 साल से कम उम्र के।
संभावित परिणाम और भविष्य पोलिंग जारी है, लेकिन रुझान बताते हैं कि RSP और बालेन शाह युवा वोट से मजबूत स्थिति में हैं। Nepali Congress गगन थापा के साथ सुधार का चेहरा पेश कर रही है, जबकि CPN-UML ओली के साथ पुरानी ताकत। यदि RSP जीती, तो नेपाल में नई राजनीति की शुरुआत हो सकती है—पुरानी पार्टियां कमजोर पड़ सकती हैं। यदि पुरानी पार्टियां जीतीं, तो Gen Z निराश हो सकती है और भविष्य में और बड़े आंदोलन हो सकते हैं।
यह चुनाव न केवल नेपाल के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में युवा शक्ति का प्रतीक है। बदलाव की लहर अब रुकने वाली नहीं—मतदान के बाद का नेपाल कैसा होगा, यह युवा वोट तय करेगा।
Sources: अल-जज़ीरा